जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल और मजबूत इच्छाशक्ति के फलस्वरूप राजस्थान ‘टीबी मुक्त’ होने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। राज्य सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “टीबी मुक्त भारत” के संकल्प को साकार करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी कड़ी में प्रदेश भर में संचालित ‘टीबी मुक्त भारत अभियान-100 दिवसीय विशेष अभियान’ के शुरुआती 60 दिनों (दो माह) में ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। गत 24 मार्च को शुरू हुए इस अभियान के तहत मात्र दो महीने में करीब 19 लाख व्यक्तियों की टीबी स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि ‘निरामय राजस्थान’ के विजन के तहत इस गंभीर बीमारी के उन्मूलन के लिए व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, शीघ्र जांच, पोषण सहायता और जनजागरूकता को प्राथमिकता दी जा रही है। जनभागीदारी और तकनीक के समन्वय से हम टीबी की इस जंग को हर हाल में जीतेंगे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बताया कि प्रदेशभर के 11,328 हाई रिस्क गांवों और शहरी वार्डों में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अब तक राज्य में करीब 5 हजार आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 18.93 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई।
सटीक और त्वरित जांच के लिए 16.51 लाख चेस्ट एक्स-रे तथा 1.41 लाख से अधिक एनएएटी (NAAT) जांचें की गईं। सक्रिय केस खोज (एक्टिव केस फाइंडिंग) गतिविधियों के माध्यम से अभियान के दौरान कुल 32,102 नए टीबी रोगियों की पहचान की गई है, जिनमें से 10,457 ऐसे मरीज हैं जिनमें बीमारी के कोई शुरुआती लक्षण नहीं थे।
इसके साथ ही टीबी संक्रमण की रोकथाम के लिए 12,535 व्यक्तियों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) देना शुरू किया गया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि टीबी मरीजों के उपचार में पोषण सहायता के तहत 1 जनवरी 2026 से अब तक सहमति प्राप्त मरीजों में से करीब 38 हजार लाभार्थियों को न्यूट्रिशन किट वितरित की जा चुकी हैं, जो कि 83 प्रतिशत की बड़ी उपलब्धि है।
