रांचीः
झारखंड विधानसभा चुनाव में इस बार पोस्टल बैलेट गेम चेंजर बन सकता है। 13 और 20 नवंबर को होने वाले मतदान को लेकर जिस तरह से पोस्टल बैलेट के माध्यम से वोटिंग के लिए आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, उसे देखकर एक रिकॉर्ड बनने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों की भी उम्मीद जताई जा रही है कि कई विधानसभा सीटों के चुनाव परिणाम में पोस्टल बैलेट से मतदान निर्णायक साबित होगा।
पोस्टल बैलेट मतदान से किस पार्टी या गठबंधन को होगा फायदा
पोस्टल बैलेट मतदान से बीजेपी-एनडीए को फायदा मिलेगा या जेएमएम-कांग्रेस इंडिया गठबंधन को लाभ होगा, इसे लेकर अलग-अलग अनुमान जा रहा है। जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी और भाकपा-माले नेताओं को उम्मीद है कि पोस्टल बैलेट मतदान से सरकारी सेवा में लगे कर्मचारियों की ओर से उनके पक्ष में मतदान किया जाएगा, क्योंकि इंडिया गठबंधन की सरकार में सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना समेत अन्य योजनाओं का लाभ दिया गया। इसके अलावा अनुबंध और मानदेय आधारित कर्मचारियों के लिए भी कई तरह की रियायत दी गई। दूसरी तरफ बीजेपी-एनडीए नेताओं का मानना है कि इस सरकार से सरकारी कर्मचारियों में नाराजगी है। इसका फायदा बीजेपी और सहयोगी दलों को मिलेगा।
2019 के चुनाव में 9 सीटों पर हार-जीत का अंतर रहा था कम
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड की 9 सीटों पर हार जीत का अंतर काफी कम रहा था। सिमडेगा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार को सिर्फ 285 वोटों के अंतर से जीत मिली थी। वहीं बाघमारा में बीजेपी को 824 वोटों से जीत मिली। कोडरमा में बीजेपी को 1797, मांडू में बीजेपी को 2062, देवघर में बीजेपी को 2674, जरमुंडी में कांग्रेस को 3099 , नाला में जेएमएम को और गोड्डा में बीजेपी को 4512 वोटों से जीत मिली थी। इसके अलावा 10 सीटें ऐसी थीं, जहां हार-जीत का फैसला 10 हजार से कम वोटों से हुआ था। इस तरह की सीटों पर इस बार पोस्टल बैलेट की भूमिका निर्णायक होगी।
पिछले चुनाव में 1.81 लाख मतदाताओं ने पोस्टल बैलेट से किया मतदान
झारखंड की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. नेहा अरोड़ा का भी मानना हैं कि पहले के चुनाव की अपेक्षा इस बार पोस्टल बैलेट से मतदान में बढ़ोतरी संभावित हैं। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव के लिए पोस्टल बैलेट से मतदान के लिए लगातार आवेदन प्राप्त हो रहे है। पिछले सप्ताह तक ही 2.60 लाख से अधिक प्राप्त हो चुके हैं, जबकि पिछले चुनाव में 1.81 लाख मतदाताओं ने पोस्टल बैलेट की मदद से मतदान किया था।
ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्र में पोस्टल बैलेट से अधिक मतदान
डॉ. नेहा अरोड़ा का कहना है कि भारत निर्वाचन आयोग की ओर से दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए भी पोस्टल बैलेट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। लेकिन सुदूरवर्ती गांव में रहने वाले अधिकांश बुजुर्ग मतदाताओं की इच्छा है कि वो मतदान के दिन बूथ पर पहुंच कर ही मतदान करें, इस कारण पोस्टल बैलेट को लेकर ग्रामीण मतदाताओं में खास उत्साह देखने को नहीं मिलता। लेकिन शहरी क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं की ओर से बढ़चढ़ कर इसका प्रयोग किया जा रहा है।
पोस्टल बैलेट एक्सचेंज की सुविधा से मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी
अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी नेहा अरोड़ा ने बताया कि पोस्टल बैलेट से मतदान प्रतिशत बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के लिए एक्सचेंज की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इस कारण सरकारी सेवा में कार्यरत ऐसे कर्मी जिनका नाम किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र में है और उनकी ड्यूटी किसी और क्षेत्र में हैं, वो भी इस सुविधा का लाभ उठाकर पोस्टल बैलेट से मतदान कर रहे हैं।
