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मणिपुर में हो गया खेल, एन बीरेन फिर बनेंगे सीएम, 44 विधायकों के समर्थन का दावा

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मणिपुर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा खेल हो गया है. मणिपुर के राज भवन में 10 सदस्यीय बीजेपी विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात सरकार गठन का दावा पेश किया है. सूत्रों का मानना है कि एक बार फिर मणिपुर में एन बीरेन का सीएम बनना तय है. विधायक राधेश्याम ने इस मुलाकात के बाद घोषणा की कि 44 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जो एक लोकप्रिय और स्थिर सरकार बनाने के लिए तैयार हैं. कुछ महीने पहले ही विधायकों के आंतरिक विरोध के बाद राज्‍य में बीजेपी की सरकार गिर गई थी.

विधायक राधेश्याम ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारे पास 44 विधायकों का समर्थन है, और सभी भाजपा विधायक एकजुट होकर जनता की इच्छा के अनुरूप सरकार बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम राज्यपाल से अनुरोध करते हैं कि वे हमारे बहुमत को मान्यता दें और शीघ्र कार्रवाई करें.” प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को समर्थन का औपचारिक पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने अपनी स्थिति को स्पष्ट किया. यह कदम राज्य में सरकार गठन की प्रक्रिया को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण है. मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में, जहां अनिश्चितता बनी हुई है, यह दावा सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है.

अब राज्‍यपाल के पाले में गेंद
राज्यपाल अब इस दावे की जांच करेंगे और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार निर्णय लेंगे. यह प्रक्रिया न केवल विधायकों की संख्या बल्कि उनकी एकजुटता और सरकार चलाने की क्षमता पर भी निर्भर करेगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम राज्य की सत्ता की दौड़ में नया मोड़ ला सकता है. जनता और राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर उत्सुकता है कि राज्यपाल का अगला कदम क्या होगा. फिलहाल, सभी की निगाहें राज भवन पर टिकी हैं, और राजनीतिक स्थिति के और विकसित होने की प्रतीक्षा है.

मणिपुर में कब-कैसे गिरी थी सरकार?
मणिपुर में एन. बीरेन सिंह की सरकार 9 फरवरी 2025 को उनके इस्तीफे के साथ गिर गई थी. मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच राज्‍य में जातीय हिंसा जारी है, जिसमें 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इस मुद्दे पर उनकी सरकार पर दबाव बढ़ा. विपक्ष और भाजपा के 19 विधायकों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी की, जिसके डर से बीरेन ने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ. ऐसा इस‍लिए हुआ क्‍योंकि भाजपा नया मुख्यमंत्री नहीं चुन पाई थी.

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