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Sunday, June 7, 2026
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर में किया ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ और मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में आपातकालीन सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने तथा अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक दिशा देने के लिए एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने सोमवार को रायपुर के माना पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित गरिमामयी समारोह में छत्तीसगढ़ पुलिस की अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ तथा मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष श्री रमन सिंह की विशेष उपस्थिति में केंद्रीय गृहमंत्री ने 400 अत्याधुनिक डायल-112 वाहनों तथा 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। नागरिकों की सुरक्षा के लिए शुरू की गई यह आधुनिक सेवा ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित है। इसके तहत पुलिस, अग्निशमन (आगजनी) और चिकित्सा (मेडिकल इमरजेंसी) सेवाओं को एकीकृत किया गया है, जिससे आपदा या सड़क दुर्घटना जैसी किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को एक ही नंबर पर त्वरित सहायता मिल सकेगी।

सेवा में शामिल किए गए 400 नए वाहनों को स्मार्टफोन, जीपीएस, वायरलेस रेडियो, पीटीजेड कैमरा, डैश कैम और सोलर बैकअप जैसी उन्नत तकनीकों से लैस किया गया है। 24×7 संचालित होने वाली इस सेवा में जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग और स्वचालित कॉलर लोकेशन जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया है। राज्य के सभी 33 जिलों को इस नेटवर्क से जोड़ा गया है, जहां नागरिक कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप या ‘SOS-112 इंडिया ऐप’ के जरिए मदद ले सकेंगे। अपराधों की सटीक जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए थीम के साथ 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन की शुरुआत की गई है। लगभग 65 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत वाली ये वैन प्रदेश के 32 जिलों में तैनात की जाएंगी।

इन अत्याधुनिक वैन में साक्ष्य संग्रहण उपकरण, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन, नार्कोटिक्स परीक्षण किट, डिजिटल फॉरेंसिक सपोर्ट और गनशॉट रेजिड्यू (GSR) परीक्षण किट जैसी उन्नत सुविधाएं मौजूद हैं। अब तक साक्ष्यों को प्रयोगशाला तक पहुंचाने में समय लगने के कारण उनके दूषित होने की संभावना रहती थी, लेकिन अब घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच और डिजिटल दस्तावेजीकरण संभव हो सकेगा। इस प्रभावी पहल से प्रदेश में साक्ष्य आधारित न्याय प्रणाली मजबूत होगी, जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा और आम नागरिकों का कानून व्यवस्था पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

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