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एकनाथ शिंदे और अजित पवार के विधायकों में क्याें हैं ‘घर वापसी’ की बेचैनी, जानिए असली वजह

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मुंबई:

लोकसभा चुनावों के बाद सबसे ज्यादा सियासी सरगर्मी महाराष्ट्र में देखी जा रही है। सीएम एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री अजित पवार के साथ शिवसेना और एनसीपी में आए विधायक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। लोकसभा चुनावों में महाविकास आघाड़ी (MVA) को 30 सीटों पर जीत मिली है जब महायुति को 17 सीटें मिली हैं। लोकसभा चुनावों से निकले जनता के मूड को भांपकर अब शिंदे और अजित पवार के साथ वाले विधायकों में ज्यादा बैचेनी है। इसकी वजह है कि महाविकास आघाड़ी को राज्य की 288 विधानसभा में 150 पर लीड मिली हैं। महायुति 130 सीटों पर आगे रही। शरद पवार और उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर आए विधायक अब किसी तरीके से अपना सियासी भविष्य सुरक्षित करना चाहते हैं।

विपक्ष को मिला मौका
अजित गुट के नेताओं का कहना है कि महायुति से उनके पुराने रिश्ते नहीं हैं। सिर्फ कामकाजी संबंध हैं। बीजेपी के साथ रहने धर्मनिरपेक्षता के दावे पर असर हुआ है। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक वोट बैंक खो दिए। यही वजह रही है कि पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। अजित गुट के नेता चाहते हैं कि इस वोट बैंक को फिर से हासिल किया जाए। यही वजह है कि हवा को रुख भांप कर राज्य में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और डीसीएम अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के 40 विधायक घर वापसी के उत्सुक हैं। महाविकास आघाडी के नेता सेमीफाइनल मुकाबले में जीत से मिले मूमेंटम को हर हाल में बरकरार रखना चाहते हैं।

दोहरी सिंपैथी पड़ी भारी
राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि अगर महाराष्ट्र में वंचित बहुजन आघाडी (VBA) नेता प्रकाश आंबेडकर भी अगर महाविकास आघाडी के साथ होते तो नतीजे और फिर अलग हो सकते थे। अब देखना यह है कि लोकसभा में खुद भी चुनाव हारे प्रकाश आंबेडकर विधानसभा चुनावों के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं। महाराष्ट्र में किसानों की नाराजगी के साथ मराठा आरक्षण और संविधान बदलने के मुद्दे काफी प्रभावी रहे। इसके अलावा महाविकास आघाडी के साथ दोहरी सिंपैथी रही। यह सिंपैथी उद्धव ठाकरे और शरद पवार को लेकर थी। शिंदे और अजित पवार के साथ मौजूद विधायकों को अब चिंता इस बात की है। अगर यही स्थिति रही तो उन्हें सियासी नुकसान हो सकता है।

हासिल किया बहुमत
केंद्र में भले ही पीएम मोदी की अगुवाई में बीजेपी बहुमत से दूर रही है लेकिन महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी ने लोकसभा चुनावों में बहुमत का आंकड़ा पार किया है। राज्य की 288 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 145 सदस्यों का है। महाविकास आघाडी 150 सीटों पर आगे रहा है। यही वजह है कि महाविकास आघाडी के दल लोकसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद अब विधानसभा की तैयारियों में जुट गए हैं। लोकसभा चुनावों में सिर्फ चार सीट पर लड़े अजित पवार ने 80 सीटों को मांगकर नई परेशानी खड़ी कर दी है, हालांकि लोकसभा चुनावों में जब उनके खाते में कम सीटें आई थीं। तब यह माना गया था कि बीजेपी इसकी भरपाई विधानसभा चुनावों में कर सकती है।

152 सीटों पर लड़ी थी बीजेपी
2019 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी 152 सीटों पर लड़ी थी। शिवसेना को 124 सीटें मिली थी। एनडीए के दूसरे सहयोगियों को 12 सीटें मिली थी। अब देखना यह है कि लोकसभा चुनावों में सिर्फ 9 सीटें जीतने वाली बीजेपी किस फॉर्मूले से आगे बढ़ती है, क्योंकि लोकसभा चुनावों में उसे 28 सीटों पर लड़कर 9 पर जीत मिली हैं। शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को 15 सीटों पर लड़कर सात पर जीत मिली है। यही वजह है कि लोकसभा चुनावों के परिणाम आते ही राज्य में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। महाराष्ट्र में अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने हैं।

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