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जमीयत उलमा-ए-हिंद में अब महिलाओं की एंट्री, पहली बार चलेगा सदस्यता अभियान, क्यों हटा ‘प्रतिबंध’?

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कानपुर

जमीयत उलमा-ए-हिंद के दरवाजे महिलाओं के लिए खोल दिए गए हैं। महमूद मदनी वाले देश के सबसे बड़े मुस्लिम संगठन ने पहली बार महिलाओं को सदस्यता देने का निर्णय लिया है। धार्मिक एवं सामाजिक संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद स्थापना के बाद से पहली बार महिलाओं को प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता देने का निर्णय लिया है। पहली बार इसके लिए विशेष अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। संगठन की ओर से महिलाओं को मजहबी और सामाजिक जिम्मेदारियों को देने का निर्णय लिया है। यह अब तक संगठन में प्रतिबंधित था।

देश भर में चल रहा है अभियान
जमीयत उलमा-ए-हिंद ने पूरे देश में सदस्यता अभियान को शुरू किया है। अभियान के जरिए पहली बार तहरीक का हिस्सा महिलाओं को बनाया जा रहा है। जमीयत के प्रांतीय उपाध्यक्ष अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासिमी ने कहा कि दिल्ली में हुई वर्किंग कमिटी की बैठक में पहली बार इस मामले में विचार किया गया।

प्रांतीय उपाध्यक्ष ने कहा कि 7 से 9 मई के बीच बेंगलुरु में हुई जमीयत की राष्ट्रीय बैठक में सदस्यता अभियान का खाका तैयार किया। इसमें पहली बार महिलाओं को भी सदस्य बनाने की राह खोल दी। संगठन के प्राथमिक सदस्यों की संख्या 16.8 लाख है। अभियान के जरिए इसमें वृद्धि होगी।

बड़े बदलाव की शुरुआत
मौलाना अमीनुल हक ने कहा कि महिलाओं को जिम्मेदारियां देने का प्रस्ताव पारित हुआ है। अगले दो माह तक हर जुमे की नमाज के बाद मस्जिदों और रविवार को सार्वजनिक स्थानों पर सदस्यता कैंप लगाया जाएगा। घर-घर जाकर महिलाओं को सदस्य बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन बड़े बदलावों के तहत खुद को बदल रहा है। महिलाओं को सदस्यता देना पहला कदम है।

कार्यक्रमों को चलाने की योजना
जमीयत की ओर से हर बच्चे के एडमिशन की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा ट्रैफिक जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। मौलाना अमीनुल हक ने कहा कि हम हेलमेट के प्रति जागरूकता अभियान चलाएंगे। साथ ही, शजरकारी अभियान, पर्यावरण प्रदूषण और झगड़े सुलझाने के लिए मुहल्ला स्तर पर कमिटी बनाएंगे। संगठन भविष्य में महिला विंग भी बनाएगा।

कई क्षेत्रों में है सक्रिय
जमीयत उलमा-ए-हिंद की स्थापना 1919 में हुई थी। संगठन के सीनियर सदस्य डॉ. हलीमुल्लाह खान का कहना है कि संगठन का आजादी की लड़ाई में रिश्ता रहा है। संगठन तालीम, यतीमों एवं विधवाओं की मदद, मजलूमों को कानूनी सहायता, प्राकृतिक आपदा में राहत, धार्मिक अधिकारों का संरक्षण, मस्जिदों की देखभाल आदि कार्य में जुटी है। संगठन के 62.2 लाख प्राथमिक सदस्य हैं, जिनमें 26 लाख सदस्य यूपी से हैं।

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