Saturday , October 24 2020

मराठा आंदोलन: हिंसा, मौत के बाद बातचीत को तैयार CM

मुंबई

महाराष्ट्र में मराठा क्रांति मोर्चा द्वारा बुलाए गए बंद के हिंसक होने और प्रदर्शनों के बीच औरंगाबाद में एक प्रदर्शनकारी की आत्महत्या के बाद इसे वापस बुलाने का फैसला किया गया है। इस बीच सीएम देवेंद्र फडणवीस का पक्ष भी सामने आया है। फडणवीस ने कहा है कि वह मराठा समुदाय से बात करने को तैयार हैं। इस आंदोलन में दो मौतों की बात सामने आई है।

राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को दिन भर चले हिंसक प्रदर्शनों के बाद शाम को चुप्पी तोड़ी। फडणवीस ने कहा, ‘सरकार ने मराठा समुदाय के विरोध को संज्ञान में लिया है और इससे जुड़े कई निर्णय लिए गए हैं। सरकार उनसे बात करने को तैयार है।’ हाई कोर्ट के फैसले को मराठा समुदाय को आरक्षण न मिलने की वजह बताते हुए सीएम ने कहा, ‘सरकार ने मराठा समुदाय के आरक्षण के लिए कानून बनाया था लेकिन वह बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा रोक दिया गया।’

मराठा आंदोलन का असर बुधवार को राज्य के कई हिस्सों के साथ राजधानी में देखने को मिला। यहां तक कि कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए और पुलिस को लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग का सहारा लेना पड़ा। इस सबके बीच केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नेता रामदास आठवले ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। देर शाम इसे वापस लेने की घोषणा की गई है।

बता दें, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 72 हजार सरकारी नौकरियों की भर्ती में मराठों के लिए 16 प्रतिशत पद आरक्षित रखने का फैसला किया है लेकिन इससे भी आंदोलन की आग शांत नहीं हो रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में साल भर से भी कम वक्त है। इसके अलावा 2019 में ही राज्य में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में मराठा आंदोलन फडणवीस सरकार और बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

क्या है मराठा समुदाय की मांग
मराठा समुदाय की मुख्य मांग सरकारी नौकरियों और शिक्षा में समुदाय के लिए आरक्षण है। 2014 में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार ने मराठा समुदाय के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। इसके लिए पहली बार ‘इकनॉमिकली ऐंड बैकवर्ड कम्यूनिटी’ की कैटेगिरी बनाई गई, इस तरह सूबे में कुल आरक्षण 51 प्रतिशत कोटा से ज्यादा हो गया था।

बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठा आरक्षण पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि मराठाओं को पिछड़े वर्ग में नहीं गिना जा सकता। अभी भी यह मामला अदालत में लंबित है और मराठा समुदाय चाहता है कि सरकार आरक्षण की ऐसी व्यवस्था करे, जिसे कोर्ट खारिज न कर पाए और तब तक 72 हजार सरकारी नौकरियों की भर्ती पर रोक लगे।

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