Thursday , October 22 2020

मॉब लिंचिंग: केंद्र सख्त, राज्यों को सुरक्षा कड़ी करने का निर्देश

नई दिल्ली

देशभर में मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी के तहत केंद्र ने मंगलवार को सभी राज्यों से हर जिले में पुलिस अधीक्षक स्तर का अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। इसके अलावा सोशल मीडिया की निगरानी के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का भी गठन करने को कहा है जिससे खुफिया सूचना एकत्र की जा सके ताकि कोई बच्चा चोर या गो तस्कर समझकर किसी पर हमला नहीं कर सके।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि अगर कोई पुलिस अधिकारी या जिला प्रशासन के मॉब लिंचिंग की घटना को रोकने में अक्षम रहने या फिर इस तरह की घटनाओं के लिए त्वरित ट्रायल कराने में असफल रहने को जानबूझकर की गई उपेक्षा मानी जाएगी। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मॉब लिंचिंग पर 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए सरकार ने यह अडवाइजरी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजा है। पिछले एक महीने में मॉब लिंचिंग पर जारी यह दूसरी अडवाइजरी है। अडवाइजरी में कहा गया है कि सभी राज्य सरकार, केंद्रशासित प्रदेश और उनकी कानून लागू करने वाली एजेंसियां सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करें।

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एक बार फिर 1984 के सिख दंगों को मॉब लिचिंग की सबसे बड़ी घटना बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार मॉब लिचिंग को बहुत गंभीरता से ले रही है और ‘अगर इन घटनाओं को रोकने के लिए जरूरत पड़ी तो’ कानून लाया जाएगा। राजस्थान के अलवर में एक पशुपालक को कथित रूप से गोरक्षकों द्वारा पीट-पीटकर मारे जाने का मुद्दा विपक्ष द्वारा लोकसभा में उठाए जाने पर राजनाथ ने कहा, ‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम केवल चिंतित ही नहीं हैं, बल्कि घटनाओं को गंभीरता से ले रहे हैं।’ राजनाथ सिंह ने कहा कि 1984 में लिंचिंग की सबसे बड़ी घटना हुई थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हजारों सिख मारे गए थे। उन्होंने कहा कि लेकिन, लिचिंग की घटनाओं का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर अपनी टिप्पणी की है।

गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने सोमवार को एक पैनल बनाया जो देश में भीड़ की हिंसा को रोकने के उपायों पर सुझाव देगा। राजनाथ के अनुसार, गृह सचिव के नेतृत्व वाला पैनल चार सप्ताह के भीतर मंत्रियों के समूह को अपनी सिफारिशें देगा। उन्होंने कहा, ‘विचार-विमर्श के बाद हम निर्णय लेंगे कि इस तरह की घटनाओं के खिलाफ मजबूत कार्रवाई करने के लिए क्या करने की आवश्यकता है। अगर जरूरत पड़ी तो हम कानून लाएंगे।’ उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं पिछले कई सालों से हो रही हैं।

गृह सचिव आर.के गौबा की अध्यक्षता में अधिकारियों की समिति में न्याय विभाग, कानूनी मामलों, विधान और सामाजिक न्याय व सशक्तिकरण के सचिव भी सदस्य होंगे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, कानून एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्री थवार चंद गहलोत भी इसके सदस्य हैं। मंत्रियों का समूह (जीओएम) प्रधानमंत्री को अपनी सिफारिशें देगा। लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मांग की कि सरकार को लिंचिंग की घटनाओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश की नियुक्ति करनी चाहिए।

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