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Aaj Ka Panchang 19 June 2025:19 जून 2025 (गुरुवार) आषाढ़ कृष्ण अष्टमी जानें शुभअशुभ मुहूर्त और राहुकाल

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Aaj Ka Panchang 19 June 2025: आषाढ़ मास का आठवां दिन है और यह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है. आज दिन की अवधि 13 घंटे 58 मिनट 8 सेकंड है, जबकि रात्रि का समय 10 घंटे 2 मिनट 3 सेकंड रहेगा. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, अभी ग्रीष्म ऋतु चल रही है और सूर्य इस समय उत्तरायण में गोचर कर रहे हैं. आइए जानते हैं, 19 जून के पंचांग के पांचों अंगों – तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण की क्या स्थिति है? आज का कौन सा समय आपके लिए शुभ साबित होने का योग दिखा रहा है और राहुकाल का समय क्या है?

आज का पंचांग तिथि नक्षत्र वार योग और करण

  • तिथि: आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है, जो 19 जून की सुबह 11:55 बजे तक रहेगी. इसके बाद आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि शुरू हो जाएगी.
  • नक्षत्र: आज का दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र से शुरू होगा, जो 19 जून की अष्टमी को रहेगा. यह एक शुभ नक्षत्र माना जाता है. इसके बाद रेवती नक्षत्र का आरंभ होगा.
  • वार/दिन: आज गुरुवार है. यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. साथ ही, यह दिन नवग्रहों में देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है. बृहस्पति की कृपा और शांति प्राप्त करने के लिए इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और उपाय किए जाते हैं.
  • योग: आज का दिन आयुष्मान योग से शुरू होगा, जो 19 जून की सुबह 05:24 बजे तक रहेगा, यह एक शुभ योग नहीं है. इसके बाद सौभाग्य योग का आरंभ होगा. इसके अलावा, आज सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे विशेष योग भी बन रहे हैं, जिसने इस दिन को ख़ास बना दिया है. इन योगों की अवधि आप नीचे शुभ योग की श्रेणी में देख सकते हैं.
  • करण: आज कौलव करण का प्रभाव सुबह 11:55 बजे तक रहेगा, इसके बाद तैतिल करण शुरू होगा, जो 19 जून की मध्यरात्रि 12:48 बजे तक रहेगा. इसके बाद गर करण का आरंभ होगा.

सूर्य-चंद्रमा का गोचर और आज के ग्रह योग

आज के पंचांग के उपरोक्त पांच अंगों के साथ-साथ, आज सूर्य और चंद्रमा की गोचर स्थिति कुछ इस प्रकार रहने की संभावना है:

  • सूर्य गोचर: सूर्य मिथुन राशि में गोचर कर रहे हैं, जिसके स्वामी बुध हैं.
  • चंद्रमा गोचर: चंद्रमा मीन राशि में गोचर कर रहे हैं, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं.

शुभ और अशुभ मुहूर्त का समय

आज शुभ मुहूर्तों की स्थिति इस प्रकार रहने की संभावना है:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:03 बजे से 04:43 बजे तक
  • प्रातः संध्या: सुबह 04:23 बजे से 05:23 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:42 बजे से 03:38 बजे तक
  • गोधूलि वेला: शाम 07:20 बजे से 07:40 बजे तक
  • सायाह्न संध्या: शाम 07:22 बजे से 08:22 बजे तक
  • अमृत काल: शाम 06:42 बजे से रात 08:13 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त: 20 जून की मध्यरात्रि 12:03 बजे से 12:43 बजे तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: रात 11:17 बजे से 20 जून की सुबह 05:24 बजे तक

आज अशुभ मुहूर्तों की स्थितियाँ इस प्रकार हैं

  • राहुकाल: आज राहुकाल दोपहर 02:07 बजे से 03:52 बजे तक रहने की संभावना है. हिन्दू धर्म में इस अवधि के दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू करना वर्जित माना गया है.
  • यमगण्ड: सुबह 05:23 बजे से 07:08 बजे तक
  • गुलिक काल: सुबह 08:53 बजे से 10:38 बजे तक
  • दुर्मुहूर्त काल: सुबह 10:03 बजे से 10:59 बजे तक और दोपहर 03:38 बजे से 04:34 बजे तक
  • विष घाटी/वर्ज्य काल: सुबह 09:32 बजे से 11:04 बजे तक
  • गंड मूल: रात 11:17 बजे से 20 जून की सुबह 05:24 बजे तक
  • पंचक: आज पूरे दिन पंचक का प्रभाव रहेगा.

आज के त्योहार और धार्मिक महत्व गुरुवार का विशेष दिन

आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है और आज गुरुवार है. गुरुवार का हिन्दू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. गुरुवार को हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष रूप से पवित्र माना जाता है. इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उनसे कृपा, सुख, समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत और भक्ति से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं. इसके साथ ही, गुरुवार नवग्रहों में देवगुरु बृहस्पति को भी समर्पित है. बृहस्पति ग्रह को ज्ञान, धर्म, संतान सुख, विवाह और समृद्धि का कारक माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमज़ोर होता है, उन्हें इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और उपाय करने की सलाह दी जाती है.

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आज के लिए यात्रा सलाह और पंचांग का महत्व

आज दक्षिण दिशा में दिशाशूल होने के कारण, आपातकाल को छोड़कर आज इस दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं है.

पंचांग का महत्व: पंचांग सिर्फ़ तिथियों और त्योहारों का एक कैलेंडर नहीं है, बल्कि यह जीवन को सफलता और समृद्धि की ओर मार्गदर्शन करने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है. यह ब्रह्मांड की प्राकृतिक लय और खगोलीय घटनाओं के अनुरूप चलने के लिए प्रेरित करता है, ताकि समय और परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाया जा सके.

पंचांग के पांच मुख्य अंग: पंचांग के पांच मुख्य घटक हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर किए गए कार्यों में सफलता और समृद्धि की संभावना बढ़ जाती है. पंचांग के ये घटक हैं:

  • वार: यह सप्ताह के सात दिनों और उनके प्रभाव का महत्व बताता है.
  • तिथि: इसके अनुसार, चंद्र मास के अनुसार दिन की गणना ज्ञात होती है.
  • नक्षत्र: यह विशिष्ट नक्षत्रों और उनके प्रभाव की स्थिति बताता है.
  • योग: यह विशेष खगोलीय संयोगों के महत्व को प्रकट करता है.
  • करण: आधी तिथि के सूचक को करण कहते हैं, जो कार्य की शुभता को प्रभावित करता है.

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अगर आप अपने दिन की शुरुआत पंचांग के अनुसार करते हैं, तो क्या आपको लगता है कि यह आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है?

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