नई दिल्ली
रेलवे के पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) में व्यापक बदलाव होने जा रहा है। रेल मंत्रालय ने संसद की एक समिति को बताया कि भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने रेलवे यात्री आरक्षण प्रणाली के मौजूदा तंत्र का अध्ययन करने और इसके उन्नयन के लिये सुझाव देने के उद्देश्य से अग्रणी सलाहकार फर्म ग्रांट थॉर्नटन को नियुक्त किया है। संसद के मानसून सत्र में भारतीय जनता पार्टी के सांसद राधा मोहन सिंह के नेतृत्व वाली रेल संबंधी स्थायी समिति की ‘भारतीय रेल की यात्री आरक्षण प्रणाली’ शीर्षक से पेश रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने कहा कि वर्ष 2019-20 के दौरान आईआरसीटीसी की वेबसाइट/एप के जरिये ऑनलाइन बुक किए गए आरक्षित टिकट वास्तविक आरक्षण केंद्र स्थल पर खरीदे गए टिकटों की तुलना में तीन गुणा अधिक हैं । हालांकि यह वेबसाइट आमतौर पर धीमी होती है और विशेष रूप से व्यस्तता वाले समय के दौरान इसके माध्यम से टिकट बुक करने में काफी समय लगता है। समिति ने ध्यान दिलाया कि ई टिकटिंग की सुविधा न केवल यात्रियों के लिये सुविधाजनक है बल्कि रेलवे काउंटरों पर भीड़-भाड़ कम करने में भी मदद करती है तथा दलालों की समस्या को समाप्त करने के साथ साथ काउंटरों पर जाली नोट मिलने की भी संभावना समाप्त हो जाती है।
ई-टिकटिंग की बढ़ती संख्या
समिति ने मंत्रालय से कहा कि आईआरसीटीसी की वेबसाइट/सर्वरों की क्षमता को नियमित रूप से सुदृढ़ एवं उन्नत बनाने की जरूरत है ताकि इसे और सुदृढ़ बनाकर अधिकाधिक ट्रैफिक को संभालने योग्य बनाया जा सके। सरकार ने अपने उत्तर में समिति को बताया कि ऑनलाइन टिकटिंग को मजबूत करने के लिये 2014 में शुरू प्रणाली की क्षमता को लगातार उन्नत किया जा रहा है। भारतीय रेल ई-टिकटिंग के तहत कुल आरक्षित टिकटों की हिस्सेदारी दिसंबर 2021 तक 80.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
उसने बताया कि आईआरसीटीसी के पास 10 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं का आधार है जिसमें 7.60 करोड़ एक्टिव यूजर हैं। मंत्रालय ने समिति को बताया कि भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने रेलवे यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) की मौजूदा प्रणाली का अध्ययन करने और इसके उन्नयन के लिये सुझाव देने के उद्देश्य से अग्रणी सलाहकार फर्म ग्रांट थॉर्नटन को नियुक्त किया है। रेल मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार, भारतीय रेल में कुल आरक्षित टिकटों में ई टिकट की हिस्सेदारी वर्ष 2016-17 में 59.9 प्रतिशत थी । वर्ष 2016-17 में कुल आरक्षित टिकटों में ई टिकट की हिस्सेदारी 65.8 प्रतिशत, वर्ष 2018-19 में 70.1 प्रतिशत, वर्ष 2019-20 में 72.8 प्रतिशत, वर्ष 2020-21 में 79.6 प्रतिशत और वर्ष 2021-22 में दिसंबर माह तक 80.5 प्रतिशत दर्ज की गई ।
