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अडानी-NDTV मामले में मुकेश अंबानी का बड़ा कनेक्शन, यहां समझिए पूरी क्रोनोलॉजी

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नई दिल्ली

अडानी ग्रुप ने एनडीटीवी (NDTV) को खरीद लिया है! तीन दिनों से खबरों और सोशल मीडिया में इसी पर ही चर्चा हो रही है। लोग मीम बना रहे हैं, तो कुछ लोग चिंतित भी हैं। वहीं, इस मामले में मुकेश अंबानी के कनेक्शन पर भी लोग बात कर रहे हैं। अडानी और एनडीटीवी के बीच जो कुछ भी हुआ, उसमें अंबानी का कनेक्शन जानने से पहले एक बात जान लेना जरूरी है। एनडीटीवी पर अडानी ग्रुप का मालिकाना हक नहीं हुआ है। अडानी ग्रुप के पास एनडीटीवी में 29.30 फीसदी हिस्सेदारी आई है। जब तक अडानी ग्रुप के पास एनडीटीवी में 51 फीसदी या इससे अधिक हिस्सेदारी नहीं आएगी, इस मीडिया कंपनी का मालिकाना हक गौतम अडानी के पास नहीं आएगा। एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय और राधिका रॉय के पास अभी भी कंपनी में कुल 32.26 फीसदी हिस्सेदारी है। अब आते हैं अंबानी कनेक्शन पर… तो जी हां, इस मामले का कनेक्शन मुकेश अंबानी से है। दरअसल, अडानी ग्रुप की जिस कंपनी ने एनडीटीवी में 29.30 फीसदी हिस्सेदारी ली है, वह पहले रिलायंस ग्रुप से जुड़ी कंपनी थी। आइए समझते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है।

रिलायंस की कंपनियों से आया लोन का पैसा
गौतम अडानी के पास एनडीटीवी की हिस्सेदारी प्रणय और राधिका रॉय द्वारा लिए गए एक लोन के चलते आई है। यहां दिलचस्प बात यह है कि प्रणय और राधिका रॉय को यह पैसा अप्रत्यक्ष रूप से रिलायंस की कंपनियों द्वारा ही मिला। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनी है, रिलायंस वेंचर्स लिमिडेट । इस कंपनी से साल 2009-10 में 403.85 करोड़ का लोन शिनानो रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के पास आया। इस कंपनी की 100 फीसदी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट एंड होल्डिंग्स लिमिटेड के पास थी। इसके बाद शिनानो से उतना ही पैसा विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) के पास आया। इस कंपनी के डायरेक्टर अश्विन खासगीवाला और कल्पना श्रीनिवासन थे। ये दानों रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड से भी जुड़े थे। इसके बाद उसी साल विश्वप्रधान से उतना ही पैसा राधिका रॉय और प्रणव रॉय की कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के पास आया।

पैसा रिलायंस से आया हिस्सेदारी अडानी ने ली
बाद में वीसीपीएल को उसके नए मालिक से अडानी ग्रुप की कंपनी ने खरीद लिया। वीसीपीएल को कर्ज के बदले एनडीटीवी से वॉरंट मिले थे, जिसे वह 29.18 फीसदी हिस्सेदारी में भुना सकता था। इस तरह वीसीपीएल के जरिए यह हिस्सेदारी अडानी ग्रुप के पास आ गई। सरल शब्दों में कहें, तो एनडीटीवी को लोन तो अप्रत्यक्ष रूप से अंबानी की कंपनियों के जरिए मिला, लेकिन हिस्सेदारी अडानी के पास आ गई। जबकि अडानी ग्रुप ने तो एनडीटीवी को कोई लोन ही नहीं दिया था।

ओपन ऑफर की क्यों है जरूरत
अडानी ग्रुप के पास इस समय एनडीटीवी में सबसे अधिक हिस्सेदारी 29.30 फीसदी है। लेकिन जब तक 51 फीसदी या इससे अधिक हिस्सेदारी अडानी के पास नहीं आएगी, मालिकाना हक नहीं मिलेगा। अडानी ग्रुप के पास 29.30 फीसदी हिस्सेदारी आने के बाद नियमों के तहत उसके पास ओपन ऑफर लाने का अधिकार है। वह ओपन ऑफर लाकर कंपनी के अन्य शेयरधारकों से अतिरिक्त 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदना चाहता है। इस तरह अडानी के पास एनडीटीवी में कुल 55.3 फीसदी हिस्सेदारी आ जाएगी और मालिकाना हक मिल जाएगा। हालांकि, ओपन ऑफर का सफल होना इतना भी आसान नहीं है।

किस तरह मिली अडानी को हिस्सेदारी
एएमजी मीडिया नेटवर्क्स लिमिटेड (AMNL) अडानी ग्रुप की मीडिया कंपनी है। एएमएनएल एडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) की 100 फीसदी सब्सिडियरी कंपनी है। एएमएनएल की एक पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लमिटेड (VCPL) है। वीसीपीएल ने एनडीटीवी की एक प्रमोटर ग्रुप कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के 99.5 फीसदी इक्विटी शेयर्स का अधिग्रहण किया है। आरआरपीआर होल्डिंग्स के पास एनडीटीवी में 29.30 फीसदी हिस्सेदारी थी। इस तरह एनडीटीवी की हिस्सेदारी अडानी ग्रुप के पास आ गई।

एनडीटीवी को ले डूबा एक बकाया कर्ज
अडानी ग्रुप के पास एनडीटीवी की हिस्सेदारी आने के पीछे एक बकाया कर्ज है। यह कर्ज एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय और राधिका रॉय ने 2009-10 में मुकेश अंबानी से जुड़ी कंपनी से लिया था। विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) ने एनडीटीवी की प्रवर्तक कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड को 403.85 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। इस ब्याज मुक्त कर्ज के बदले आरआरपीआर ने वीसीपीएल को वॉरंट जारी किए। इस वॉरंट के अनुसार, अगर कंपनी भुगतान नहीं कर सकी, तो ऐसी स्थिति में कर्जदाता को आरआरपीआर में 99.9 फीसदी हिस्सेदारी लेने का अधिकार होगा। वीसीपीएल का स्वामित्व 2012 में बदल गया। अडाणी समूह की फर्म ने पहले वीसीपीएल का अधिग्रहण किया और फिर बकाया ऋण को मीडिया कंपनी में 29.18 फीसदी हिस्सेदारी में बदलने के विकल्प का प्रयोग किया। इसके बाद अडाणी समूह ने देश के अधिग्रहण मानदंडों के अनुरूप जनता से अतिरिक्त 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए 493 करोड़ रुपये की खुली पेशकश की।

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