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किरायेदार, चपरासी… क्या मनीष भी गुलाम के रास्ते पर? जी-23 में अब बचे कितने हैं

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नई दिल्ली

हमें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। मैंने इस पार्टी को 42 साल दिए हैं। मैं यह पहले भी कह चुका हूं, ‘हम इस संस्था (कांग्रेस) के किरायेदार नहीं हैं, हम सदस्य हैं।’ अजीब बात यह है कि जिन लोगों में वार्ड चुनाव लड़ने की क्षमता नहीं है, वे कांग्रेस नेताओं के “चपरासी थे और अब ज्ञान दे रहे हैं। कांग्रेस छोड़ने के बाद गुलाम नबी आजाद को लेकर पार्टी में उठा बयानबाजी का तूफान शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस्तीफे के बाद जहां गुलाम नबी को लेकर कांग्रेस नेताओं के तीखे बयान आए, वहीं, कुछ नेताओं ने आजाद की बात का समर्थन भी किया।

धक्के मारकर निकालने की कोशिश करोगे तो…
एक इंटरव्यू में जी-23 समूह से जुड़े सवाल को लेकर मनीष तिवारी ने कहा कि हमें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। मैंने 42 साल इस पार्टी को दिए हैं और बाकी लोगों जिन्होंने खत लिखा था मेरे से ज्यादा समय दिया है। इस पार्टी में अपनी जिंदगी व्यतीत की थी। तो किसी को कोई सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। तिवारी ने कहा, मैं पहले भी इस बात को कह चुका हूं, इस संस्था में हम किरायेदार नहीं हिस्सेदार हैं। उन्होंने कहा कि अब आप धक्के मार कर निकालने की कोशिश करोगे तो फिर दूसरी बात है, फिर देखा जाएगा।

कांग्रेस नेताओं के चपरासी दे रहे ज्ञान
गुलाम नबी के बाद मनीष तिवारी ने भी पार्टी की ‘मंडली संस्कृति’ की आलोचना की। आनंदपुर साहिब के सांसद ने कहा कि पार्टी ने दिसंबर 2020 में जी23 समूह के सुझावों को लागू किया होता, तो मौजूदा स्थिति पैदा नहीं होती। मंडली की संस्कृति पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के चपरासी उन लोगों को ज्ञान दे रहे हैं जिन्होंने पार्टी को दशकों दिए हैं। ये नेता ऐसे होते है, जो नगरपालिका चुनाव भी जीत नहीं सकते। अनुभवी नेता ने कहा कि कांग्रेस सभी चुनाव हार रही है। यह इस बात की पुष्टि है कि पार्टी देश के लोगों के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है।

गुलाम की राह पर मनीष तिवारी?
मनीष तिवारी ने आज फिर इस बात को दोहराया कि हम इस संस्था में हम किरायेदार नहीं हिस्सेदार हैं। उन्होंने कहा कि अब आप धक्के मार कर निकालने की कोशिश करोगे तो फिर दूसरी बात है, फिर देखा जाएगा। आखिर मनीष तिवारी को धक्केमारने की बात क्यों कहनी पड़ रही है। क्या कांग्रेस में स्थितियां मनीष के अनुकूल नहीं है? खैर इस बारे में मनीष से बेहतर तो शायद ही कोई बता पाए लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों अनुसार इतना तो तय है कि अगर स्थितियों में सुधार नहीं हुआ तो कई नेता गुलाम की राह पकड़ सकते हैं।

जी-23 से 4 नेताओं ने छोड़ी पार्टी
गुलाम नबी आजाद के कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद जी-23 समूह से पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की संख्या बढ़कर चार हो गई हैं। इससे पहले कपिल सिब्बल ने पार्टी का दामन छोड़ दिया है। कपिल सिब्बल ने समाजवादी पार्टी समर्थित उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। इससे पहले जी-23 का हिस्सा रहे और यूपी में पार्टी का ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले जितिन प्रसाद ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया था। जितिन प्रसाद अभी यूपी कैबिनेट में मंत्री बने हैं। जी-23 में शामिल योगानंद शास्त्री ने भी पिछले साल नवबंर में कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में शामिल हो गए थे। योगानंद शास्त्री पुराने कांग्रेसी नेता रहे हैं। वह 2008 से 2013 तक दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे थे।

पार्टी में बदलाव के लिए उठाई थी मांग
2014 में लोकसभा चुनावों में हार के बाद विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिल रही लगातार हार के बाद से पार्टी में इसे लेकर सवाल उठने लगे थे। अगस्त 2020 में कांग्रेस के शीर्ष 23 नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस संबंध में चिट्ठी लिखी। चिट्ठी में नेतृत्व परिवर्तन से लेकर संगठनात्मक बदलावों की मांग की गई थी। इन्हीं 23 कांग्रेस नेताओं के समूह को जी-23 कहा गया। इस चिट्ठी को पार्टी नेतृत्व और खासकर गांधी परिवार को चुनौती दिए जाने के तौर पर देखा गया। इसी साल 28 फरवरी को इस जी-23 समूह की बैठक भी जम्मू में हुई थी।

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