नई दिल्ली
भारत की अर्थव्यवस्था की तस्वीर दिखाने वाला आंकड़ा आ गया है। चालू वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की आर्थिक विकास दर (GDP) 13.5 फीसदी रही है। सरकार के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। पिछली तीन तिमाही के मुकाबले यह ग्रोथ सबसे शानदार है। इन तिमाहियों में ग्रोथ 4.1 फीसदी से 8.4 फीसदी रही थी। जब दुनियाभर में बाजारों में मंदी का संकट मंडरा रहा है तो भारत का डबल डिजिट में ग्रोथ दर्ज करना वाकई शानदार है। यह विदेशी निवेशकों में भारत की धाक को मजबूत करेगा। वे भारतीय बाजारों में निवेश करने के लिए आकर्षित होंगे। इस बात का पहले से ही अनुमान था कि अर्थव्यवस्था के लिए इस तरह के शानदार आंकड़े आएंगे। हालांकि, एक पहलू यह भी है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमानों से यह कम है। केंद्रीय बैंक ने इस महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में 2022-23 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ करीब 16.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट में भी इसके 15.7 फीसदी रहने की संभावना जताई गई थी। इसका मतलब है कि इकनॉमिस्ट्स के अनुमानों से यह कम रही है। ऐसे में कह सकते हैं कि 13.5 फीसदी ग्रोथ अच्छी है। लेकिन, इस पर जश्न नहीं मनाया जा सकता है।
2020-21 की पहली तिमाही में 20.1 फीसदी रहने के बाद ग्रोथ में लगातार गिरावट थी। वित्त वर्ष 2021-22 की दूसरी तिमाही में यह 8.4 फीसदी, तीसरी तिमाही में 5.4 फीसदी और चौथी तिमाही में 4.1 फीसदी रही थी। यानी पिछली तीनों तिमाहियों में ग्रोथ ने डबल डिजिट को नहीं छुआ। इस तरह पिछली चार तिमाहियों में यह पहला मौका है जब ग्रोथ डबल डिजिट के ऊपर गई है। वित्त वर्ष 2022-23 पहली तिमाही में यह 13.5 फीसदी रही है।
क्यों जरूरी है तेज आर्थिक विकास?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन बिबेक देबरॉय ने मंगलवार को इस संदर्भ में एक अहम अनुमान जाहिर किया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2047 तक 20,000 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा, बशर्ते कि अगले 25 वर्षों में औसत वार्षिक विकास 7-7.5 फीसदी हो। इस समय भारत 2700 अरब डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के साथ दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। देश को अभी एक विकासशील राष्ट्र के रूप में रखा गया है। उन्होंने कहा था कि अगर देश अगले 25 वर्षों में इस रफ्तार से बढ़ने में सफल हो पाया तो वार्षिक प्रति व्यक्ति आय 10,000 डॉलर से अधिक होगी। इस तरह वह भी 2047 तक भारत भी उच्च मध्य आय वाले देशों में शामिल हो जाएगा।
टारगेट क्या आसान नहीं है?
हालांकि, यह आसान नहीं है। पिछले 30 साल में ऐसा सिर्फ एक बार हुआ है जब देश पांच साल या इससे ज्यादा में लगातार 7 फीसदी की औसत रफ्तार से बढ़ा हो। बेशक, पहली तिमाही में 13.5 फीसदी ग्रोथ देखने में उत्साहित करने वाली है। लेकिन, रास्ता अभी लंबा है। खासतौर से इस आशंका को देखते हुए कि आने वाली तिमाहियों में ग्रोथ घट सकती है। पिछले 30 सालों में ऐसे कम ही मौके आए हैं जब भारत ने 7-7.5 की रेंज से ऊपर ग्रोथ दर्ज की हो। ऐसे में नजर रखनी होगी कि आगे अर्थव्यवस्था कि रास्ते बढ़ती है।
