14.6 C
London
Sunday, June 7, 2026
HomeभोपालMP: आतंकी और रेपिस्ट पर रहम नहीं, अंतिम सांस तक जेल में...

MP: आतंकी और रेपिस्ट पर रहम नहीं, अंतिम सांस तक जेल में रहेंगे… सरकार ला रही कठोर नीति

Published on

भोपाल

गंभीर अपराध के मामलों में अगर किसी को आजीवन कारावास की सजा होती है तो वह 14 साल बाद जेल से छूट जाता है। अब एमपी में शिवराज सरकार गंभीर अपराध करने वाले अपराधियों पर कोई रहम नहीं करेगी। सरकार आजीवान कारावास नीति में बदलाव करने जा रही है। नई नीति में पहले की तुलना में ज्यादा कठोर है। इसमें आतंकियों, रेपिस्ट और जहरीली शराब बनाने वाले लोगों पर कोई रहम नहीं होगी। गुरुवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इसे लेकर मंत्रियों और अधिकारियों के साथ चर्चा की है। अभी एमपी में आजीवन कारावास से दंडित बंदियों की रिहाई के लिए वर्ष 2012 की नीति लागू है।

राज्य सरकार अब आजीवन कारावास नीति में बदलाव कर रही है। वहीं, राज्य सरकार ने अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा की अध्यक्षता में आजीवन कारावास की नीति पर विचार करने के लिए समिति बनाई है। इस समिति ने यूपी, महाराष्ट्र, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों की नीति का अध्ययन की है। इसके बाद एमपी के लिए नई नीति प्रस्तावित की है। गुरुवार को सीएम के साथ इस नीति पर चर्चा हुई है।

अंतिम सांस तक जेल में रहेंगे रेपिस्ट
वहीं, प्रदेश में नई नीति लागू हो जाने के बाद नाबालिग से रेप, आतंकी गतिविधियों में लिफ्त लोग और जहरीली शराब बनाने वाले लोगों पर कोई रहम नहीं होगी। आजीवन कारावासा की सजा के बाद अंतिम सांस तक लोगों को जेल में ही रहना पड़ेगा। इस नीति के अनुसार आजीवन कारावास की सजा पाए लोगों को कोई रियायत नहीं दी जाएगी। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मीटिंग के दौरान कहा कि आजीवन कारावास के ऐसे बंदी जो अच्छे व्यवहार के कारण समय से पूर्व रिहाई का लाभ लेते हैं, वे अलग श्रेणी के हैं। आतंकी और रेपिस्ट अलग श्रेणी के है। ऐसे बंदियों को समय के पूर्व रिहाई का लाभ नहीं मिलना चाहिए। ऐसे अपराध करने वाले लोग समाज के विरोधी हैं।

ऐसे हो सकती है रिहाई
हालांकि इस नीति में यह प्रावधान दिया गया है कि आजीवान कारावास के बंदियों की रिहाई तभी होगी, जब कलेक्टर, एसपी और जिला अभियोजक की अनुशंसा होगी। इसके बाद जेल मुख्यालय शासन से अनुशंसा करेगा और फिर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रदेश में अभी अच्छे कार्य करने वाले बंदियों की साल में दो बार रिहाई होती। एक 26 जनवरी और दूसरा 15 अगस्त को होता है। नई नीति के बाद साल में चार बार रिहाई होगी। एक 26 जनवरी, दूसरा 15 अगस्त, तीसरा 14 अप्रैल और चौथा दो अक्टूबर है।गौरतलब है कि एमपी में कुल 131 जेल हैं। इन जेलों में 12 हजार से अधिक कैदी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। ये कैदी अलग-अलग अपराध के मामलों में जेल में बंद हैं। वहीं, नई नीति को जल्द ही लागू करने के लिए राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है।

Latest articles

मप्र में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त बरकरार, सिविल सेवा नियम-2026 का ड्राफ्ट जारी

भोपाल। मप्र सरकार ने सिविल सेवा नियमों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया...

मप्र में शिक्षकों के तबादलों का शेड्यूल जारी, 8 जून से शुरू होगी ऑनलाइन प्रक्रिया

भोपाल। मप्र स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026 के लिए शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों...

नरेला के अन्ना नगर में मंत्री विश्वास सारंग ने किया पौध-रोपण, बोले- ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान अब बन चुका है जन-आंदोलन

भोपाल। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास...

अयोध्यानगर में राहगीरों पर जानलेवा हमला करने वाले चार शातिर गुंडे गिरफ्तार, भेजे गए जेल

भोपाल। राजधानी के अयोध्यानगर थाना क्षेत्र में देर रात राहगीरों के साथ गाली-गलौज और...

More like this

मप्र में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त बरकरार, सिविल सेवा नियम-2026 का ड्राफ्ट जारी

भोपाल। मप्र सरकार ने सिविल सेवा नियमों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया...

मप्र में शिक्षकों के तबादलों का शेड्यूल जारी, 8 जून से शुरू होगी ऑनलाइन प्रक्रिया

भोपाल। मप्र स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026 के लिए शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों...

नरेला के अन्ना नगर में मंत्री विश्वास सारंग ने किया पौध-रोपण, बोले- ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान अब बन चुका है जन-आंदोलन

भोपाल। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास...