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जो सवाल नरसिम्हा राव और केसरी से किए वो सोनिया-राहुल गांधी से नहीं पूछे, आजाद ने साधा निशाना

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नई दिल्ली

कांग्रेस छोड़ने के बाद गुलाम नबी आजाद और उनकी पुरानी पार्टी के नेताओं की ओर से एक दूसरे पर कई आरोप लगाए जा रहे हैं। गुलाम नबी आजाद की ओर से राहुल गांधी की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। टाइम्स नाउ नवभारत को दिए इंटरव्यू में गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष रहते पीवी नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी से जो सवाल किए वो कभी सोनिया गांधी और राहुल गांधी से नहीं किए। उन्होंने कहा कि पीवी नरसिम्हा राव निसंदेह अच्छे प्रधानमंत्री थे लेकिन बतौर पार्टी अध्यक्ष वो असफल थे। उनकी संगठन में रुचि नहीं थी जिसका खामियाजा पार्टी को भी उठाना पड़ा। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वो इस बात को शुरू में अकेले उठाते थे लेकिन बाद में कई और नेता इसमें शामिल हुए।

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि नरसिम्हा राव जब पार्टी के अध्यक्ष थे उनकी संगठन में कोई रुचि नहीं रहती। शुरू-शुरू में इस बात को मैं अकेला उठाता था। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी भी सरकार और पार्टी दोनों चलाते थे। पब्लिक मीटिंग के अलावा भी लोगों से मिलते थे। इन दोनों से किसी को शिकायत भी नहीं रहती न संगठन में और न ही सरकार में। वो सिलसिला खत्म हो गया जब नरसिम्हा राव पीएम बने।

वो बड़े बुद्धिमान थे, कई भाषा जानते थे और उस मामले में उनका कोई जवाब नहीं। आर्थिक सुधार की बात की जाए तो इसमें वो बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए लेकिन दुर्भाग्य से संगठन में उनकी कोई रुचि नहीं थी। जिसकी वजह से हर वर्किंग कमेटी में यह बात उठाते थे। शुरू-शुरू में मैं इस बात को उठाता था बाद में राजेश पायलट, शरद पवार, माधव राव सिंधिया और नेता भी जुड़ गए। हर वर्किंग कमेटी जो 3 महीने बाद होती है उसमें यह बात उठाई गई कि आप संगठन को नजअंदाज कर रहे हैं। आप अध्यक्ष पद से हट जाइए।

एक साल तक उन्होंने इस मामले को टरकाया। फिर हमने कहा कि वर्किंग प्रेसिडेंट बनाइए तो उन्होंने कहा कि नाम दो। हमने शर्त रखी कि वर्किंग प्रेसिडेंट वही बनेगा जो मंत्रालय छोडे़गा। एक साल उसमें भी उन्होंने निपटाया फिर हमने कहा उपाध्यक्ष बना दो। उन्होंने नाम मांगे उसमें भी वक्त निकल गया। उसके बाद तब तक चुनाव आ गया और चुनाव हार गए।

चुनाव हारने के बाद जो पहली वर्किंग कमेटी की मीटिंग हुई उसमें हम लोगों ने निर्णय लिया कि इनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए। वोट ऑफ नो कॉन्फिडेंस का ड्राफ्ट बना जिसमें यह बात थी कि आप बेस्ट पीएम थे लेकिन बतौर अध्यक्ष बहुत ही खराब। ड्राफ्ट पढ़ेगा कौन इसको लेकर कोई साहस नहीं कर रहा था तो मैंने पढ़ना शुरू किया। बताया कि पीएम आप अच्छे थे देश के विकास के लिए कई काम किए। आर्थिक सुधार लाने की दिशा में कई काम किए लेकिन आप कांग्रेस अध्यक्ष अच्छे साबित नहीं हुए हैं। आपकी पार्टी में कोई रुचि नहीं है।

जिस वजह से पार्टी को नुकसान हुआ। सरकार के अच्छे काम की बात जनता तक नहीं पहुंची। संगठन कमजोर था जिसकी वजह से हार हुई। ये इल्जाम मैंने लगाए और कहा कि आप पद छोड़ दें तत्काल। सीताराम केसरी जी भी आए उसके बाद। इन दोनों से जो सवाल पूछे वह कभी भी सोनिया और राहुल गांधी से नहीं किए।

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