नई दिल्ली
कर्ज में डूबी लैंको अमरकंटक पावर बिकने को तैयार है। इसे खरीदने के लिए देश के दो दिग्गज रईस गौतम अडानी और मुकेश अंबानी आमने-सामने हैं। साथ ही सरकारी कंपनी पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) ने भी REC लिमिटेड के साथ साझेदारी में बोली लगाई है। फिलहाल इस कोल बेस्ड पावर प्रोजेक्ट को खरीदने की रेस में मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे आगे माना जा रहा है। कंपनी ने इसके लिए 1960 करोड़ रुपये के कैश अपफ्रंट की पेशकश की है। अगर रिलायंस यह बिड जीतती है तो इसके जरिए कंपनी पहली बार कोल बेस्ड पावर प्रॉडक्शन में उतरेगी।
अगर लैंको अमरकंटक पावर के लेंडर्स रिलायंस के प्रस्ताव को हरी झंडी देते हैं तो आईबीसी कोड के तहत मुकेश अंबानी की तीसरी बड़ी खरीद होगी। इससे पहले वह रिलायंस कम्युनिकेशंस की सहयोगी कंपनी रिलांयस इन्फ्राटेल और टेक्सटाइल कंपनी आलोक इंडस्ट्रीज को आईबीसी कोड के तहत खरीद चुकी है। लैंको अमरकंटक पावर को खरीदने के लिए रिलायंस की सीधी टक्कर अडानी ग्रुप से है। दोनों ग्रुप तेजी से अपना बिजनस फैला रहे हैं।
अडानी की बोली
सूत्रों के मुताबिक दूसरी ओर एशिया के सबसे बड़े रईस गौतम अडानी की अडानी पावर (Adani Power) ने 1,800 करोड़ रुपये की बोली लगाई है। यह बॉन्ड्स के रूप में है जिसका भुगतान आठ फीसदी ब्याज के साथ पांच साल में किया जाना है। इसके अलावा पावर फाइनेंस-आरईसी कंसोर्टियम ने 3,400 करोड़ रुपये का ऑफर दिया है। यह राशि 20 साल में दी जानी है। साथ ही लेंडर्स को 40 फीसदी इक्विटी की पेशकश की गई है।
लैंको अमरकंटक पावर के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) ने 17 बैंकों के 14632 करोड़ रुपये के दावों को एडमिट किया है। इसमें पीएफसी और आरईसी की हिस्सेदारी 42 फीसदी है। इससे पहले वेदांत लिमिटेड ने 3,000 करोड़ रुपये की पेशकश की थी लेकिन बैंकों ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद आरपी ने जनवरी में कंपनी की सेल प्रोसेस दोबारा शुरू की थी। 11 कंपनियों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई थी। लैंको अमरकंटक पावर के पास कैश और कैश इक्विवेलेंट्स तथा रिसीवेबल्स के रूप में 1,300 करोड़ रुपये हैं।
क्या करती है कंपनी
लैंको अमरकंटक पावर छत्तीसगढ़ के कोरबा-चांपा राज्य राजमार्ग पर कोयला आधारित थर्मल पावर प्रोजेक्ट चलाती है। पहले चरण में 300-300 मेगावाट की दो यूनिट से बिजली पैदा की जा रही है। इनसे हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को बिजली की आपूर्ति की जा रही है। दूसरे चरण में दो यूनिट और बन रही हैं। इनमें प्रत्येक की क्षमता 660 मेगावाट है। तीसरे चरण में भी 660 मेगावाट की दो यूनिट बननी हैं। इन पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है।
