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ज्ञानवापी: मुस्लिम पक्ष का सबसे बड़ा ‘हथियार’ फेल? 2024 से पहले अब क्या बदलने वाला है

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नई दिल्ली

वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में जब से कोर्ट ने सुनवाई के योग्य वाला फैसला दिया है, हिंदू पक्ष जश्न मना रहा है। जैसे ही हिंदू पक्ष के वकील ने बाहर आकर बताया कि कोर्ट ने हमारी सारी दलीलों को मान लिया है, मुस्लिम पक्ष की एप्लीकेशन खारिज कर दी है… महिला-पुरुषों ने सड़क पर ही हर हर महादेव के नारे लगाने शुरू कर दिए। खुशी में महिलाओं ने गाना भी गाया, बम-बम बोल रहा है काशी। टीवी चैनलों के कैमरे पल-पल की घटना का लाइव कवरेज दिखा रहे थे, उनके सामने ही याचिकाकर्ता महिलाएं जश्न मनाते हुए झूमने लगीं। कुछ लोगों ने पटाखे जलाए। नगाड़े बजे। अभी तो झांकी है, दर्शन अभी बाकी है… ऐसे नारे देर शाम तक काशी की गलियों में गूंजते रहे। हालांकि असदुद्दीन ओवैसी समेत मुस्लिम पक्ष ने 1991 के एक्ट का हवाला देते हुए कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाराणसी कोर्ट के फैसले का असर मथुरा समेत दूसरे मामलों पर भी पड़ेगा?

ओवैसी और 1991 का ऐक्ट
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कोर्ट के फैसले पर कहा है कि 1991 का जो प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट है उसका तो मकसद ही फेल हो जाता है। उधर, हिंदू संतों का कहना है कि मथुरा और काशी के साथ-साथ 20 हजार मंदिर ऐसे हैं, जहां पर हम विजय हासिल करेंगे। वाराणसी कोर्ट के फैसले से साफ है कि 1991 का पूजा स्थल कानून श्रृंगार गौरी केस के आड़े नहीं आएगा, यानी ज्ञानवापी परिसर में पूजा के अधिकार वाली पांच महिलाओं की याचिका अब सुनी जा सकती है।

हिंदू पक्ष के लिए शुभ संकेत क्या है?
इस फैसले का मतलब यह भी निकाला जा रहा है कि काशी के मामले में मुस्लिम पक्ष का सबसे बड़ा हथियार यानी 1991 का प्लेसेस ऑफ वर्शिप ऐक्ट अपना प्रभाव खो सकता है। इससे सभी विवादित पूजास्थलों की कानूनी लड़ाई में हिंदुओं के लिए नई उम्मीद पैदा हो सकती है। सिर्फ काशी ही क्यों, इस बात की पूरी संभावना है कि वाराणसी कोर्ट के फैसले को मथुरा समेत अन्य विवादित स्थलों के मामलों में हिंदू पक्ष अपनी दलीलों में शामिल कर सकता है।

इतना ही नहीं, ओवैसी काफी पहले से आशंका जता चुके हैं, अयोध्या में मंदिर बनना शुरू होने के बाद शांत हो चुका मंदिर-मस्जिद विवाद फिर से जोर पकड़ सकता है। ऐसे में सवाल है कि क्या अब मंदिर पॉलिटिक्स का नया अध्याय शुरू हो सकता है। ज्यादा कुछ नहीं यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के एक ट्वीट पर नजर मार लीजिए। एक लाइन में उन्होंने लिखा, ‘करवट लेती मथुरा, काशी!’

सोमवार शाम में डेप्युटी सीएम ने अपने इस ट्वीट को पिन भी कर रखा था। धड़ाधड़ लोगों के कॉमेंट्स आने लगे। कोई जय श्री राधे, हर हर महादेव लिख रहा था तो विकास ठाकुर ने लिखा, ‘क्या बात है सर, आज तो आप फुल फॉर्म में हैं।’ ट्विटर रिएक्शंस देखकर लगता है जैसे एक अलग ही माहौल बन गया हो। ऐसे में इसे 2024 के चुनावी लाभ हानि के ऐंगल से भी देखा जाने लगा है।

देश अस्थिर होगा, क्यों कह रहे ओवैसी
उधर, ओवैसी ने वाराणसी कोर्ट के आदेश पर चिंता जताते हुए कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद का केस बाबरी मस्जिद के रास्ते पर जाता दिख रहा है और ऐसे तो देश 80-90 के दशक में वापस चला जाएगा। इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील होनी चाहिए। उन्होंने वक्फ बोर्ड के 1942 के गजट में इसे मस्जिद और वक्फ की संपत्ति बताते हुए कह दिया कि इस तरह के अदालती फैसलों से देश अस्थिर होगा। उन्होंने एक बार फिर कहा कि बाबरी मस्जिद पर जब फैसला आया था तभी मैंने कहा था कि आगे और दिक्कत होगी।

स्वामी से भी समझ लीजिए
1991 के ‘द प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट’ के खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर कर रखा है। इस पर भी सुनवाई होने वाली है। उन्होंने कहा कि सोमवार को आए फैसले में वाराणसी कोर्ट ने बिल्कुल सही किया है। फैसले का मतलब समझाते हुए उन्होंने कहा कि अब कोर्ट को फैसला देना है कि महिलाओं को ज्ञानवापी में पूजा की इजाजत दी जाए या नहीं। इस फैसले के तहत तो कोर्ट ने एक रोड़ा हटाया है। मुस्लिम पक्ष चाहता था कि ऐसी किसी याचिका पर सुनवाई होनी ही नहीं चाहिए।

यह हार जीत का मुद्दा नहीं: VHP
विहिप के नेता आलोक कुमार ने ज्ञानवापी मामले पर वाराणसी जिला अदालत के फैसले पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले ही विश्वास था कि वाराणसी का मामला पूजा स्थल अधिनियम से बाधित नहीं होता है। कुमार ने कहा, ‘इसे (अदालत के निर्णय को) हार-जीत का मुद्दा नहीं मानना चाहिए क्योंकि यह एक धार्मिक और आध्यात्मिक मामला है।’

अब फैसला जान लीजिए
वाराणसी की जिला अदालत ने सोमवार को ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले को सुनवाई योग्य माना, यानी विचारणीयता पर सवाल उठाने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि वह पूजा के अधिकार की मांग वाली याचिका पर सुनवाई जारी रखेगी। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने बताया कि जिला न्यायाधीश ए.के. विश्वेश ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख 22 सितंबर तय कर दी है। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति ने ज्ञानवापी मस्जिद को वक्फ संपत्ति बताते हुए कहा था कि मामला सुनवाई योग्य नहीं है। इस मामले में पांच महिलाओं ने याचिका दायर कर हिंदू देवी-देवताओं की दैनिक पूजा की अनुमति मांगी थी, जिनके विग्रह ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित हैं।

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