नई दिल्ली,
भारत और चीन के बीच कई दशकों से सीमा विवाद जारी है. लेकिन 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत, चीन की सेनाओं के बीच गतिरोध बढ़ने से दोनों देशों के बीच संबंध काफी बिगड़ गए थे. दोनों देशों के बीच यह सीमा विवाद गलवान घाटी, गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र के पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 (PP-15), डेमचोक और देपसांग तक गहराया हुआ है. अभी नए घटनाक्रम के तहत भारत, चीन के बीच 16वें दौर की बातचीत के बाद सोमवार को पूर्वी लद्दाख में गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स एरिया में पेट्रोलिंग प्वाइंट15 (PP-15) से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट गईं हैं.
इस घटनाक्रम के जानकार लोगों का कहना है कि दोनों पक्षों ने तय योजना के अनुरूप ही सेनाएं हटाई हैं और इस प्रक्रिया का पूरा वेरिफिकेशन किया गया है. एक सूत्र ने बताया, विवादित क्षेत्र से सेनाएं हटाने और इसकी वेरिफिकेश प्रक्रिया का ब्योरा अभी मिलना बाकी है.हालांकि, दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स एरिया में पेट्रोलिंग प्वाइंट15 (PP-15) से सेनाएं हटा ली हैं लेकिन डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों में गतिरोध का कोई समाधान नहीं निकल पाया है.बता दें कि दोनों देशों की सेनाओं ने आठ सितंबर को ऐलान किया था कि उन्होंने पीपी-15 से सेनाएं हटाना शुरू कर दिया है.
दोनों देशों के बीच 2020 से सैन्य गतिरोध बढ़ा
मई 2020 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की घुसपैठ के बाद दोनों देशों के बीच गतिरोध के चार मुख्य बिंदु हॉट स्प्रिंग्स का पेट्रोलिंग प्वाइंट15 (पीपी15), गोगरा पोस्ट के पास पीपी17ए, गलवान घाटी के पास पीपी14 और पैंगोंग त्सो झील का उत्तरी किनारा है.चीनी सैनिक एलएसी में घुसपैठ कर पीपी15 और पीपी17ए सहित इन प्वाइंट्स में दाखिल हुए, जिससे इन इलाकों में भारतीय सेना के साथ गतिरोध पैदा हुआ.
पेट्रोलिंग प्वाइंट पर विवाद के अलावा जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे जबकि चीन के 30 जवान मारे गए थे. हालांकि, चीन ने बाद में दावा किया कि इस झड़प में उनके सिर्फ चार जवान मारे गए.
हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा पोस्ट से सेनाएं हटने का महत्व
पीपी15 और पीपी17ए उस क्षेत्र में स्थित हैं, जहां भारत और चीन के बीच बड़े पैमाने पर एलएसी अलाइनमेंट पर सहमति बनी है. 2020 की घटना के बाद चीन की सेना ने हॉट स्प्रिंग्स-गोगरा क्षेत्र में तैनाती बढ़ गई थी. हॉट स्प्रिंग्स-गोगरा क्षेत्र से दोनों देशों की सेनाएं हटने से चीन के साथ भारत का तनाव कम होगा क्योंकि इसे आधिकारिक तौर पर 2020 में चीन की सेना द्वारा तैयार किए गए सभी नए फ्रिक्शन प्वाइंट पर टकराव खत्म होगा.
भारत, चीन की सेना डेमचोक और देपसांग में अभी भी आमने-सामने
पिछले साल अगस्त में भारतीय सेना और चीनी सेना ने गोगरा (पीपी17ए) में फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट (Forward Deployment) रोक दिया था और दोनों देशों के जवान अपने स्थाई बेस शिविर लौट गए थे. यह घटनाक्रम साल 2021 में पूर्वी लद्दाख में चुशुल मोल्दो मीटिंग प्वाइंट पर भारत और चीन के कॉर्प्स कमांडर्स के बीच 12वें दौर की बातचीत के बाद हुआ. फरवरी 2021 में दोनों देशों की सेनाओं ने पैंगोंग त्सो क्षेत्र से सेनाएं पूरी तरह से हटा ली थी.
लेकिन एलएसी पर देपसांग में अभी भी दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं. हालांकि, यहां गतिरोध 2020 की घटना से पहले से ही है. चीन की सेना देपसांग और चार्डिंग नाला इलाकों में भारत के पारंपरिक गश्ती इलाकों तक पहुंच में रुकावट डाल रही है. बता दें कि देपसांग भारत के सब सेक्टर नॉर्थ (एसएसएन) के तहत आता है.
16वें दौर की सैन्य वार्ता
दोनों देशों के बीच इस साल जुलाई महीने में 16वें दौर की उच्च स्तर की सैन्य वार्ता के बाद हॉट स्प्रिंग्स-गोगरा क्षेत्र से दोनों देशों की सेनाएं हटी हैं. यह वार्ता चुशुल-मोल्दो मीटिंग पॉइंट पर हुई थी.इस बैठक के बाद दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि यह प्रतिबद्धता जताई गई है कि दोनों देशों के बीच बाकी बचे विवादों के समाधान से पश्चिमी सेक्टर में एलएसी पर शांति बहाल करने में मदद मिलेगी और द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती आएगी. इस बैठक के बाद दोनों देशों ने अपनी-अपनी सेनाएं को सीमा से पीछा हटाने का खाका तैयार किया था.
मोदी, शी जिनपिंग की होगी मुलाकात?
पूर्वी लद्दाख में गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में पेट्रोलिंग प्वाइंट15 (PP-15) से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटने का यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब इसी हफ्ते में उज्बेकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की सालाना बैठक होने जा रही है, जिसमें नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग शिरकत करेंगे. दोनों नेताओं के बीच इस सम्मेलन से इतर भी बैठक हो सकती है. हालांकि,अभी इसका कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है.
