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FATF के एक्शन से बचने के लिए आतंकी मसूद अजहर पर झूठ बोल रहा पाकिस्तान!

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इस्लामाबाद,

पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. अब पाकिस्तान ने पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के एक्शन से बचने के लिए आतंकवादियों पर कार्रवाई जैसे कदम उठाने का दिखावा किया है. पाकिस्तान के इस बार FATF ग्रे लिस्ट से बाहर आने की संभावना है. हालांकि, इससे पहले ही वह पुरानी हरकतों पर उतर आया है.

पाकिस्तान ने हाल ही में अफगानिस्तान को एक लेटर लिखा है. इसमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को गिरफ्तार करने के लिए कहा गया है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, पत्र में कहा गया है कि मसूद अजहर के नंगरहार और कुनार इलाकों में छिपे होने की संभावना है. ऐसे में उसे गिरफ्तार कर सूचित किया जाना चाहिए.

इतना ही नहीं पाकिस्तान ने FATF के दबाव के चलते हाल ही में लश्कर ऐ तैयबा के ऑपरेशनल कमांडर साजिद मीर पर भी कार्रवाई की थी. चौंकाने वाली बात ये है कि साजिद मीर को पाकिस्तान अब तक मरा हुआ बताता रहा है. दक्षिण एशिया प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पाकिस्तान की आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर दोहरे रवैये को दिखाता है.

यह सभी को पता है कि लश्कर ने दो दशक में कई बार नाम बदला और पाकिस्तान में लगातार एक्टिव है. कुछ समय तक इसे जमाद उद दावा के नाम से जाना जाता था. लेकिन जब इसे बैन कर दिया गया, यह फलाह ए इंसानियत फाउंडेशन के नाम से काम करने लगा. जब यह भी जांच के घेरे में आ गया तो इसका नाम अल्लाह हू अकबर तहरीर कर दिया गया.

ऐसे में ये सवाल एक बार फिर उठने लगा है कि क्या पाकिस्तान FATF के दबाव में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के चीफ मौलाना मसूद अजहर समेत यूएन द्वारा घोषित आतंकवादियों पर कार्रवाई करेगा. हालांकि, ऐसा संभव नहीं लग रहा है.

पाकिस्तान यह दावा करता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में नहीं, बल्कि वह संभवता अफगानिस्तान में है. साउथ एशिया प्रेस के मुताबिक, भले ही पाकिस्तान ये दावा कर रहा है कि उसका पता नहीं लगाया जा सकता है. वह पाकिस्तानी सोशल मीडिया नेटवर्क पर लगातार लेख जारी करता है. वह जैश के आतंकियों को जिहाद में शामिल होने के लिए उकसाता है. साथ ही उसने पिछले दिनों काबुल पर तालिबान के कब्जे की भी तारीफ की थी. जैश ने दावा किया था कि अफगानिस्तान में तालिबान की जीत से मुस्लिम जीत के रास्ते खुलेंगे.

FATF द्वारा पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बनाए रखने के बावजूद पाकिस्तान में जैश और जमात उद दावा जैसे प्रतिबंधित संगठनों के नेता अपनी गतिविधियों को जारी रखने में सक्षम हैं. वे युवाओं को जिहाद के लिए उकसा रहे हैं. सोशल मीडिया पर लगातार सक्रियता दिखाते हैं.

 

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