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तस्‍वीर जब पत्‍थरबाज ने भीड़ से इंद‍िरा पर मारी थी ईंट, देश ने देखी थी ‘आयरन लेडी’ की हिम्‍मत

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नई दिल्‍ली

बात 1967 की है। चुनाव होने वाले थे। देश में राजनीतिक उठापटक थी। इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे एक साल ही हुआ था। चुनाव का दोबारा शंखनाद हो गया था। पूर्व प्रधानमंत्री देशभर में घूम-घूमकर चुनाव प्रचार में जुटी थीं। ऐसी एक जनसभा को संबोधित करने वह ओडिशा पहुंची थीं। तब कई लोगों को लगता था कि इंदिरा गांधी शायद इस पद के लायक नहीं हैं। उन दिनों ओडिशा स्वतंत्र पार्टी का गढ़ होता था। रैली भुवनेश्‍वर में थी। जब इंदिरा रैली को संबोधित कर रही थीं तो अचानक उन पर पथराव शुरू हो गया। पत्‍थरबाजों की एक ईंट उनकी नाक पर सीधे लगी थी। इससे इंदिरा लहूलुहान हो गई थीं। उस वक्‍त पूरे देश ने आयरन लेडीका लोहा देखा था। स्‍थानीय नेताओं ने तब इंदिरा को भाषण खत्‍म करने के लिए कहा था। वह चाहते थे कि इंदिरा को तुरंत अस्‍पताल ले जाया जाए। यह और बात है कि इंदिरा ने नेताओं की नहीं सुनी। वह अपना भाषण अंत करने तक वही अड़ी रहीं।

इस वाकये ने इंदिरा की ताकत और धैर्य को दिखा दिया था। ईंट लगने से उनकी नाक से बुरी तरह खून बह रहा था। हालांकि, वह रुकी नहीं। मंच से अपनी स्‍पीच को जारी रखा। उन्‍होंने रूमाल से बहते खून को पोंछा। फिर अपनी बात को आगे बढ़ाया। उनकी नाक से बहते खून को देखकर स्‍थानीय नेता परेशान होने लगे थे। सब मिलकर इंदिरा से बैठ जाने की अपील कर रहे थे। लेकिन, इंदिरा तो ठहरी इंदिरा। भला वो कहां किसी की मानने वाली थीं। उन्‍होंने सबकी बातों को अनसुना कर दिया।

उपद्रव‍ियों को ललकारा था
खून से सने रूमाल से नाक दबाकर वो खड़ी रहीं। तब उन्‍होंने उपद्रवियों को ललकारा था। कहा था कि यह उनका अपमान नहीं है। अलबत्‍ता देश का अपमान है। उन्‍होंने अपने प्रधानमंत्री को निशाना बनाया है। इस घटना से तत्‍कालीन पीएम को लोगों की जोरदार सहानुभूति मिली थी।

बात यहीं खत्‍म नहीं हुई थी। कार्यक्रम के अनुसार, इंदिरा को भुवनेश्‍वर से कोलकाता जाना था। हालांकि, इस वाकये के बाद उनका स्‍टाफ चाहता था कि इंदिरा को सीधे दिल्‍ली ले जाया जाए। उनसे दिल्‍ली चलने का अनुरोध किया गया। लेकिन, इंदिरा ने मना कर दिया। नाक पर पट्टी लगवाकर इंदिरा कोलकाता में रैली को संबोधित करने के लिए पहुंच गईं।

नाक पर प्‍लास्‍टर लगाए हुए क‍िया था प्रचार
दिल्‍ली पहुंचने पर पता चला था कि उनकी नाक पर तो बहुत ज्‍यादा चोट आई है। डॉक्‍टरों को तुरंत ऑपरेशन की जरूरत महसूस हुई। उन्‍हें बेहोश करके सर्जरी की गई। बताया जाता है कि इसमें काफी वक्‍त लगा था। इसके बाद इंदिरा ने नाक पर प्‍लास्‍टर लगाए हुए पूरे देश में प्रचार किया था। लोग उनकी हिम्‍मत की दाद दे रहे थे। वह चौथे लोकसभा चुनाव को जीतकर प्रधानमंत्री बनी थीं। उनके राजनीतिक जीवन में काफी उतार-चढ़ाव रहे। 1975 में इमरजेंसी के बाद उनकी लोकप्रियता अचानक तेजी से गिर गई थी। नाक की सर्जरी के बाद वह मजाक-मजाक में कहती थीं। उनकी नाक ठीक होने का एक मौका निकल गया। सभी जानते हैं कि उनकी नाक लंबी है। लेकिन, डॉक्‍टरों ने कुछ नहीं किया।

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