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योगी सरकार में मुसलमानों की सुनने वाला कोई नहीं… सपा से ‘आजाद’ हो क्या पॉलिटिक्स कर रहे शिवपाल यादव?

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लखनऊ

समाजवादी पार्टी से ‘आजाद’ किए जाने के बाद अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव लगातार उत्तर प्रदेश में अपनी सियासी जमीन तैयार करने की कोशिश में जुटे हैं। इसके लिए उन्होंने समाजवादी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक मुसलमानों पर डोरे डालना शुरू कर दिया है। शिवपाल हाल ही में एटा में थे और यहां पर यदुकुल पुनर्जागरण मिशन के कार्यक्रम में उन्होंने मुसलमानों का मुद्दा उठाकर इस बात का साफ संकेत भी दे दिया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में मुसलमानों के सामने कई दिक्कते हैं और उनकी परेशानियों को सुनने वाला कोई नहीं है। शिवपाल यह जताना चाह रहे हैं कि ऐसे में समय में जब सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी उनसे किनारा कर लिया है, तब वह मुसलमानों की ‘दिक्कतों’ पर उनके साथ खड़े रहेंगे।

शिवपाल की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी को हालिया विधानसभा में एक भी सीट नहीं मिली थी। चाचा शिवपाल की सपा के निशान पर जसवंतनगर सीट से चुनाव लड़ पाए थे। हालांकि, चुनाव के बाद अखिलेश ने उनसे दूरी बनाना शुरू कर दिया। बाद में चाचा के नाम लिखी एक चिट्ठी में उन्हें कहीं भी जाने के लिए आजाद कर दिया गया। शिवपाल इसे अपने अपमान के तौर पर ले रहे हैं। इससे उनकी पुरानी टीस भी उभर आई है। उन्होंने एटा के अपने भाषण में कहा कि साल 2017, 2019 और 2022 में भी हमने प्रयास किया लेकिन अगर मुझे मेरे हक का सम्मान मिल जाता तो यूपी में परिवर्तन हो जाता। शिवपाल यहीं नहीं रुके। उन्होंने ऐलान किया कि यूपी में परिवर्तन आकर रहेगा और इसके लिए वह सबको इकट्ठा कर रहे हैं।

मुसलमानों के सामने दिक्कतें
सपा के समर्पित वोट बैंक यादवों में सेंधमारी के लिए शिवपाल ने यदुकुल पुनर्जागरण मिशन के तहत ताकत जुटाने का काम तो शुरू ही कर दिया है। इसके साथ ही वह मुलायम सिंह यादव के माय (मुसलमान-यादव) समीकरण को एक बार फिर से यूपी की राजनीति में आजमाना चाहते हैं। एटा के मंच से मुसलमानों की दिक्कतों की चर्चा शुरू करके उन्होंने इसकी शुरुआत भी कर दी है। शिपवाल ने कहा कि किसानों, नौजवानों और मुसलमानों के सामने दिक्कते हैं। नौकरशाही की मनमानी चल रही है और सुनने वाला कोई नहीं है। ऐसे में सवाल है कि मुस्लिमों के सामने क्या दिक्कत है?

क्या है मुसलमानों की दिक्कतें
बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार पर लगातार मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगता है। आजम खान, अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी जैसे मुस्लिम विपक्षी नेताओं पर योगी सरकार के लगातार ऐक्शन के जरिए विपक्ष लगातार सत्ता पर लगने वाले इस आरोप को पुष्ट करने की कोशिश करता रहता है। शिवपाल ने एटा में बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसी मुद्दे को हवा देने की कोशिश की है। इसके अलावा उन्होंने मदरसों के सर्वे पर भी सवाल उठाया और कहा कि सिर्फ मदरसों की नहीं बल्कि प्रदेश के सभी स्कूलों की जांच की जानी चाहिए।

मुस्लिमों पर इतना फोकस क्यों?
शिवपाल यादव प्रसपा को प्रदेश में मजबूत करने के लिए अपने बड़े भाई के आजमाए MY-समीकरण पर भरोसा करते दिखते हैं। इसके पीछे की प्रेरणा यह हो सकती है कि अखिलेश यादव के यादव-मुस्लिम के ठप्पे से आजाद होने और सर्वसमाज का नेता बनने की कोशिश से सपा का पारंपरिक वोट बैंक असमंजस की स्थिति में है। यूपी में यादवों की संख्या 8 फीसदी के आसपास बताई जाती है। गैर-यादव ओबीसी वोटों का प्रतिशत भी 32 के करीब है। माना जाता है कि अखिलेश गैर यादव ओबीसी वोटर्स में पैठ बनाने की कोशिश में हैं। इस बीच यदुकुल पुनर्जागरण मिशन के तहत यादवों को एक मंच पर जुटाकर शिवपाल उनके पारंपरिक वोटों में सेंधमारी की कोशिश में है, जिसमें यादव के अलावा मुसलमान भी हैं।

शिवपाल की ‘मुसलमान नीति’ को लेकर चर्चा तब शुरू हुई थी, जब उन्होंने सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की थी। कहा जा रहा है कि आजम से मुलाकात कर वह उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटे हैं। इससे असमंजस में पड़े मुसलमानों के रूप में एक बड़ा वोटबैंक उनके हाथ लग सकता है। बीजेपी के यूपी की राजनीति में एकछत्र रूप में उभरने के बाद से सभी पार्टियों ने अपनी सेकुलर छवि को किनारे रख दिया है। अखिलेश भी इसी लाइन पर जाते दिखते हैं। ऐसा लगता है कि वह पार्टी की मुसलमानपरस्त छवि को भी बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने मुसलमानों से जुड़े तमाम मुद्दों से कथित तौर पर दूरी बनाए रखी। ऐसे में मुसलमानों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत नेतृत्व को लेकर भी है।

शिवपाल की कोशिश है कि सपा के आजम खान, नाहिद हसन, बर्क जैसे मुसलमान क्षत्रपों का साथ मिल जाए तो वह प्रदेश में मुसलमानों के लिए एक उपयुक्त विकल्प के तौर पर सामने आ सकते हैं, जिससे अखिलेश को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। यही कारण है कि अपने यदुकुल सम्मेलनों में भी शिवपाल मुस्लिमों की दिक्कतों को खासतौर पर रेखांकित करने लगे हैं।

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