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Saturday, May 9, 2026
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क्या BJP में शामिल हो जाएंगे सचिन पायलट? सतीश पूनिया ने दिए ये संकेत

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जयपुर

राजस्थान कांग्रेस में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जारी खींचतान पर मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने चुटकी ली है। इसके अलावा जब उनसे पूछा गया कि पिछली बार जब राजस्थान कांग्रेस में ऊठापटक हो रही थी तब बीजेपी काफी ऐक्टिव थी। इसपर उन्होंने कहा कि उनका कांग्रेस से कोई मतलब नहीं है। अगर वह डूबने पर ही आमदा हैं तो इसमें बीजेपी क्या कर सकती है। सचिन पायलट के बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कुछ नहीं है। ये लोग आपसी झगड़े में राजस्थान का नुकसान कर रहे हैं।

सतीश पूनिया कहा कि किसी भी सरकार के लिए स्थिरता सबसे ज्यादा जरूरी होता है। नेतृत्व परिवर्तन होता है भी तो सरकार की स्थिरता भंग नहीं होनी चाहिए। बीजेपी ने 5-5 मुख्यमंत्री बदल दिए। यहां तो एक मुख्यमंत्री को बदलने के लिए इतनी मशक्कत हो रही है। इससे संदेश साफ है कि कांग्रेस का आलाकमान कमजारे है। जो नीतिगत निर्णय लेने में बेहद कमजोर है। 2018 से यह अंर्तकलह चलता आ रहा है। उस समय भी इसी तर्ज पर राजभवन में नारे लगे। फिर मंत्रिमंडल के गठन पर लड़े, कमरों अलॉटमेंट पर लड़े, दुनिया में कहीं भी कोई सरकार 50 दिन बाड़े में बंद नहीं रही। राजस्थान के साथ ठगी की, कांग्रेस जब आई थी तब कोई हक से नहीं आई थी, उनको कोई बहुमत नहीं था, बाई डिफॉल्ट आई थी। बीजेपी और कांग्रेस के वोटों में 2.5 फीसदी का फर्क था। उन्होंने बीएसपी को मर्ज किया, निर्दलीय को साथ लिया, ये लोग जुगाड़ की सरकार चला रहे हैं। इनका हश्र यही होना था। राजस्थान का दुर्भाग्य है कि ऐसी सरकार चार साल तक काबिज रही। जिसने विरासत में 8 लाख मुकदमे दिए। रोजाना 17 बलात्कार दिए, 7 हत्यायें दी, 9 हजार किसानों की जमीनों की नीलामी दी, 25 प्रतिशत बेरोजगारी दी, हर 12 किलोमीटर पर भ्रष्टाचार दिया, उस पार्टी का यही हश्र होना था।

पूनिया ने आगे कहा कि आज कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कांग्रेस पार्टी की जो हालत है उसके लिए उनका नेतृत्व ही जिम्मेदार है। कांग्रेस ने जो राजनीतिक अस्थिरता दी है उसका सबसे ज्यादा नुकसान राजस्थान को हो रहा है।

उधर, राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के वफादार कई विधायकों ने विधायक दल की बैठक से पहले अपने इस्‍तीफे रव‍िवार रात विधानसभा अध्‍यक्ष डॉ. सीपी जोशी को सौंपे जाने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता राज्य में गतिरोध को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन जयपुर में ही हैं। गहलोत के वफादार माने जाने वाले विधायक राज्‍य में सच‍िन पायलट को अगला मुख्‍यमंत्री बनाए जाने की अटकलों से नाराज हैं।

कांग्रेस विधायक दल की बैठक रविवार रात मुख्‍यमंत्री निवास में होनी थी, लेकिन इससे पहले ही गहलोत के वफादार माने जाने वाले विधायक संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के बंगले पर बैठक करने के बाद जोशी के आवास पर पहुंचे और अपने इस्‍तीफे उन्‍हें सौंप दिए। वहीं, खड़गे, माकन, गहलोत, कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्‍यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व उपमुख्‍यमंत्री पायलट एवं कुछ अन्य विधायक देर रात तक मुख्‍यमंत्री आवास में इंतजार करते रहे और बाकी विधायकों के नहीं आने से विधायक दल की बैठक अंतत: नहीं हो सकी। ऐसा माना जा रहा है कि पर्यवेक्षक अब राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए गहलोत के वफादार व‍िधायकों को एक-एक करके उनसे मिलने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। गहलोत के वफादारों ने दावा किया कि 90 से अधिक विधायक जोशी के आवास गए थे, लेकिन इस संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी।

कुल 200 सदस्यों वाले सदन में कांग्रेस के 108 विधायक हैं। पार्टी को 13 निर्दलीय उम्मीदवारों का भी समर्थन प्राप्त है। इन इस्‍तीफों के बारे में जोशी के कार्यालय से अभी कुछ नहीं कहा गया है। गहलोत के सलाहकार संयम लोढ़ा के अलावा मंत्रियों धारीवाल, प्रताप सिंह खाचरियावास और महेश जोशी ने कांग्रेस पर्यवेक्षकों से मुलाकात की, लेकिन गतिरोध जारी रहा।

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