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ऐसी चुभ गई थी बात, इस्तीफा दे रहे थे मनमोहन और फिर मनाने पहुंच गए अटल

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नई दिल्ली

देश के पूर्व पीएम मनमोहन सिंहअपने काम और नाम को लेकर हमेशा सजग रहने वाले थे। देश में आर्थिक सुधार की शुरुआत करने वाले मनमोहन सिंह को विपक्ष की एक आलोचना इतनी चुभी थी कि वह अपने पद से इस्तीफा देने का मन बना चुके थे। तब मनमोहन को मनाने की जिम्मेदारी तत्कालीन पीएम पी वी नरसिम्हा राव ने अटल बिहारी वाजपेयी को सौंपी थी।

जब विपक्ष की आलोचना से नाराज हो गए थे मनमोहन
करियर ब्यूरोक्रेट्स और मशहूर अर्थशास्त्री मनमोहन को नरसिम्हा राव राजनीति में लेकर आए थे। लेकिन राजनीति की हकीकत से जब उनका सामना हुआ तो वो थोड़े असहज भी हुए दरअसल, वाजपेयी के नेतृत्व वाले विपक्ष ने जब तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह पर हमला बोलना शुरू किया तो इतने दुखी हुए कि कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले थे। जब नरसिम्हा राव को इस बात की जानकारी मिली तो वह वाजपेयी को मनमोहन सिंह को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी।

वाजपेयी के मनाने के बाद माने थे
राव के कहने के बाद वाजपेयी ने मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी और कहा था कि विपक्ष की आलोचना को वो निजी तौर पर न लें। विपक्ष का काम तो सरकार की आलोचना करना होता है। तब से लेकर दो बार देश के पीएम रहने तक मनमोहन ने एक गंभीर नेता की छवि में रहे। हालांकि, इस दौरान भी विपक्ष उनपर लगातार हमलावार रहा, आलोचना हुई लेकिन वह इन आलोचनाओं से कभी घबराए नहीं।

नोटबंदी पर राज्यसभा में सरकार को जब मनमोहन सिंह घेर रहे थे तब पूरा सभा एकदम शांत होकर उन्हें सुन रही थी। मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर, 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के एक गांव ‘गाह’ में हुआ था। वह 2004 से 2014 के बीच देश के प्रधानमंत्री रहे। प्रधानमंत्री की कुर्सी पर पहुंचने से पहले डॉ. सिंह 1971 में उन्हें वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया। इसके बाद साल 1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया। मनमोहन सिंह ने 1991 से 1996 के बीच पांच साल के लिए भारत के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया। इस दौर में आर्थिक सुधारों को लेकर उनकी भूमिका की सराहना की जाती है।

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