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मतलब दोनों हाथों में लड्डू चाहता है गहलोत खेमा, 19 अक्टूबर वाली वो शर्त पढ़ी आपने

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जयपुर

राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए कांग्रेस पार्टी में ‘जंग’ छिड़ गई है। ये लड़ाई सीधे तौर पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच देखी जा रही है। गहलोत गुट को सीएम पद पर सचिन पायलट किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। गहलोत गुट के विधायकों का साफ कहना है कि सचिन पायलट ने सरकार को खतरे में डाला था। ऐसे में पायलट गुट के किसी को भी सीएम के रूप में मंजूर नहीं किया जाएगा। जयपुर में पार्टी के पर्यवेक्षक बनकर पहुंचे अजय माकन के सामने गहलोत गुट के विधायकों ने तीन शर्तें रखी हैं, जिनमें एक शर्त है विधायक दल की बैठक 19 अक्टूबर के बाद हो। इस बैठक में नए सीएम पर चर्चा हो। माना जा रहा है कि इस शर्त के पीछे भी ‘सियासत के जादूगर’ का ही दिमाग है। आइए आपको बताते हैं 19 अक्टूबर की शर्त के मायने…

गहलोत के कांग्रेस चीफ की राह हुई मुश्किल
दरअसल अशोक गहलोत कांग्रेस के नए चीफ की दौड़ में है। उनके खिलाफ शशी थरूर का नाम सामने आ चुका है। माना जा रहा कि अशोक गहलोत नहीं चाहते हैं, कांग्रेस अध्यक्ष बने बिना वो सीएम पद से इस्तीफा दे दें। राजस्थान में हालिया घटनाक्रम को देखते हुए पार्टी आलाकमान गहलोत से नाखुश है। पहले कहा जा रहा था कि कांग्रेस के नए चीफ के लिए गांधी परिवार के साथ पार्टी के अन्य नेताओं का भी गहलोत को समर्थन है। ऐसे में गहलोत आसानी से कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं। लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं।

19 अक्टूबर से दो निशाने लगाना चाहते हैं गहलोत
गहलोत गुट के विधायकों का खुलकर बगावत करना और इस्तीफे की धमकी देना पार्टी आलाकमान का रास नहीं आया है। माना जा रहा है कि सीएम गहलोत को इस बात की आशंका है कि पार्टी के नए चीफ के लिए उनकी राह मुश्किल हो गई है। ऐसे में गहलोत 19 अक्टूबर के फॉर्मूल से दो निशाने लगाना चाहते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए 17 अक्टूबर को वोटिंग है और चुनाव परिणाम 19 अक्टूबर को घोषित होगा।

दोनों हाथों में ‘लड्डू’ रखना चाहते हैं गहलोत
अशोक गहलोत इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि अगर वे पार्टी के नए आलाकमान बनेंगे तो राजस्थान में अपनी पसंद का सीएम बना सकते हैं। इसके लिए 19 अक्टूबर के बाद विधायक दल की बैठक होगी। इसमें बैठक में विधायकों के बहुमत के आधार पर फैसला होगा। बैठक में तय रणनीति के तहत एक लाइन का प्रस्ताव पास होगा- ‘सीएम का फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष करें।’ फिर गेंद गहलोत के पाले में होगी। अगर अशोक गहलोत पार्टी ने नए बॉस नहीं बन पाते हैं तब वो सीएम बने रहेंगे।

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