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राजस्थान संकट के बीच गहलोत का ‘खेल’, 92 विधायकों के इस्तीफे ले सीपी जोशी ने देखा पोलो

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जयपुर:

राजस्थान सरकार पर सियासी संकट के बीच सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी रामबाग पोलो ग्राउंड पर मैच देखते नजर आए। उनके साथ कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, मंत्री भी दिखे। 92 विधायकों के इस्तीफे लेने के बाद उन्हें मंजूरी करने या अस्वीकार करने के बजाय जोशी आश्वस्त होकर मैच देखते नजर आए। वहीं गहलोत की सीएम पद को लेकर ‘जादूगरी’ के भी चर्चे हैं। बीजेपी नेताओं ने सरकार को अल्पमत में बताते हुए इन्हें बर्खास्त करने की मांग उठाई है। कांग्रेस में मचे बवाल को लेकर जहां एक गुट में सन्नाटा छाया हुआ है। वहीं दूसरे गुट के विधायक मैच का लुफ्त उठाकर तालियां बजाते हुए नजर आए।

रामबाग पोलो ग्राउंड में पोलो मैच का आनंद लेने के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर सीपी जोशी मीडिया से बचते हुए निकल गए। उन्होंने विधायकों द्वारा दिए गए इस्तीफे पर कोई टिप्पणी नहीं की। इस दौरान कैबिनेट मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि ‘हां, मैंने अपना इस्तीफा दे दिया है और आगामी 3-4 दिन तक छुट्टी पर रहूंगा।’

डॉ. सीपी जोशी का नाम भी CM पद की दौड़ में
प्रदेश में मुख्यमंत्री बदले जाने की चर्चाओं के बीच डॉक्टर सीपी जोशी का नाम भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में है। हालांकि गहलोत गुट के किसी भी विधायक ने खुले तौर पर डॉ. जोशी का नाम नहीं लिया है लेकिन ऐसा बताया जा रहा है कि अशोक गहलोत ने डॉक्टर सीपी जोशी के नाम की सिफारिश की है। इस पूरे सियासी घटनाक्रम पर डॉक्टर सीपी जोशी की पूरी नजर है लेकिन ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में नजर आए।

विवार को हुआ राजस्थान कांग्रेस में बड़ा बवाल
कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में अशोक गहलोत नामांकन दाखिल करने वाले हैं। इसी बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि अगर अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे तो राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन होगा। राहुल गांधी यह स्पष्ट कर चुके थे कि ‘एक व्यक्ति एक पद’ का फार्मूला लागू रहेगा। इससे साफ हो गया कि अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। नए मुख्यमंत्री की तलाश को लेकर कांग्रेस में जंग छिड़ी हुई है। इसी बीच कांग्रेस आलाकमान यानी कि सोनिया गांधी ने विधायकों की राय जानने के लिए दो पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को जयपुर भेजा। मुख्यमंत्री आवास पर रविवार शाम 7 बजे विधायक दल की बैठक में विधायकों से रायशुमारी की जानी थी लेकिन बैठक हो ही नहीं पाई। विधायक दल की बैठक नहीं होने से दोनों पर्यवेक्षक विधायको की राय नहीं ले पाए और उन्हें वापस दिल्ली लौटना पड़ा।

पायलट को रोकने के लिए कांग्रेस में हुआ बड़ा खेल
दरअसल दिल्ली से आने वाले दोनों पर्यवेक्षक एक प्रस्ताव पास कराना चाहते थे। इस प्रस्ताव के मुताबिक राजस्थान के भावी मुख्यमंत्री का फैसला लेने का अधिकार आलाकमान को देना था। गहलोत समर्थक विधायकों को यह शंका थी कि कहीं सचिन पायलट को राजस्थान का मुख्यमंत्री ना बना दिया जाए। इसी कारण विधायक दल की बैठक से पहले कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल के सरकारी आवास पर विधायकों की बैठक बुला ली गई और उसमें यह तय कर लिया गया था कि सचिन पायलट और उनके समर्थित 18 विधायकों में से किसी को भी मुख्यमंत्री बनाया जाए तो यह हमें स्वीकार नहीं होगा। धारीवाल ने कहा था कि 2 साल पहले जब सरकार पर संकट आया था तब सरकार को बचाने वाले निष्ठावान 102 विधायकों में से किसी को भी मुख्यमंत्री बनाए हमें मंजूर है। लेकिन पार्टी के साथ गद्दारी करने वालों को मुख्यमंत्री नहीं बनने देंगे। इसके बाद विधायक दल की बैठक में जाने के बजाय कांग्रेस के विधायक अपना इस्तीफा लेकर विधानसभा अध्यक्ष के घर पहुंच गए।

आलाकमान को भेजे जाने वाले प्रस्ताव पर विधायकों ने रखी 3 शर्तें
आलाकमान को जो प्रस्ताव भेजा जणा था। उस पर गहलोत समर्थक विधायकों ने तीन शर्तें रख दी। प्रदेश प्रभारी अजय माकन के मुताबिक पहली शर्त यह थी कि पास किए जाने वाला प्रस्ताव 19 अक्टूबर के बाद लागू हो। दूसरी शर्त यह थी कि एक एक विधायकों से अलग अलग बातचीत करने के बजाए सामूहिक रूप से बात करें। इसमें विधायक अपनी राय रखेंगे। और तीसरी शर्त यह थी कि भावी मुख्यमंत्री उन 102 विधायकों में से हो जिन्होंने सवा 2 साल पहले सरकार का साथ देकर सरकार को गिरने से बचाया था।

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