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पायलट गुट पर चलेगा ACB का डंडा ! CM गहलोत के अचानक दफ्तर पहुंचने के मायने क्या ?

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जयपुर

राजस्थान के चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच सीएम अशोक गहलोत अचानक एसीबी मुख्यालय पहुंचना सियासी गलियारों में नई चर्चा का विषय बन गया है। मंगलवार 4 अक्टूबर को सीएम गहलोत अचानक एसीबी के दफ्तर पहुंचे। ऐसे सवाल उठ रहे हैं कि प्रदेश में मुख्यमंत्री बदले जाने की चर्चाओं के बीच गहलोत अचानक एसीबी दफ्तर क्यों पहुंचे। सब जानते हैं कि जुलाई 2020 में जब सचिन पायलट और उनके समर्थकों ने बगावती तेवर अपनाए थे। तब तीन ऑडियो क्लिप वायरल हुई थी। इन ऑडियो क्लिप में विधायकों की खरीद फरोख्त की बातचीत रिकॉर्ड है। चीफ व्हिप महेश जोशी की ओर से एसीबी में दो मुकदमें दर्ज कराए गए। फिलहाल ये मुकदमें पेंडिंग हैं।

आधा दर्जन विधायकों के खिलाफ जांच लंबित
कांग्रेस नेता सचिन पायलट समर्थित विधायक रहे विश्वेन्द्र सिंह, भंवरलाल शर्मा के साथ तीन निर्दलीय विधायकों ओमप्रकाश हुड़ला, खुशवीर सिंह जोजावर और सुरेश टांक के खिलाफ एसीबी में रिपोर्ट दर्ज है। दो साल पहले जब सचिन पायलट और उनके समर्थित 18 विधायकों ने बगावती तेवर अपनाए थे। तीन ऑडियो क्लिप वायरल हुए थे। उन ऑडियो में भंवरलाल शर्मा और विश्वेन्द्र सिंह के साथ केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह की आवाज होने के दावे किए जा रहे हैं।एसीबी ने पूछताछ के लिए पांच विधायकों और पूर्व केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह को नोटिस भेजे थे लेकिन अभी तक किसी ने आवाज के नमूने नहीं दिए हैं। विधायकों से खरीद फरोख्त के प्रकरण अभी तक एसीबी में लम्बित हैं।

दो लोगों को एसओजी ने गिरफ्तार किया था
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता महेश जोशी की ओर से दी गई रिपोर्ट पर एसओजी ने मुकदमा दर्ज किया था। एसोजी ने भरत मालानी और अशोक सिंह को गिरफ्तार किया था। हथियार तस्करी के लिए दोनों के मोबाइल सर्विलांस पर रखे गए थे। इनकी बातचीत सुनने के बाद एसओजी ने सरकार गिराने से षड़यंत्र में दोनों को लिप्त माना था। 25-25 करोड़ रुपए देकर विधायकों को खरीदने के आरोप लगे थे। बाद में एसओजी ने महेश जोशी की रिपोर्ट पर दर्ज किए गए मुकदमें को एसीबी को सुपूर्द कर दिए। अब एसीबी के पास मुकदमें लम्बित हैं।

पायलट और गहलोत को भी जारी हुए थे नोटिस
दो साल पहले उठे सियासी बवंडर के दौरान एसओजी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए थे। उस समय दिन प्रतिदिन इन मामलों में नए नए कारनामे सामने आते थे लेकिन बाद जब सुलह हो गई तो ये प्रकरण ठंडे बस्ते में चले गए। अब मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए फिर से छिड़ी जंग के दौरान एक बार फिर ये मामले में चर्चा में आ गए हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का अचानक एसीबी मुख्यालय पहुंचने के कई मायने हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि गहलोत फिर से कानूनी दांवपेच खेलकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज रहना चाहते हैं।

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