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नोएडा में गंगाजल की सप्लाई बंद होने से दिक्‍कत शुरू, 20 दिनों तक रहेगी किल्‍लत, पानी बर्बाद न करें

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नोएडा

दशहरे के बाद त्योहारों का माहौल बन जाता है, लेकिन नोएडा में पानी की समस्या शुरू हो जाती है। लोगों को पानी की किल्लत, कम प्रेशर और हाई टीडीएस लेवल की समस्या का सामना करना पड़ता है। चाह कर भी लोग इस समस्या से खुद को दूर नहीं कर पाते हैं। पिछले कई वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है। दशहरा के आसपास गंग नहर की सफाई शुरू होती है। गंग नहर का पानी पीछे से रुकते ही नोएडा को गाजियाबाद से मिलने वाली गंगाजल की सप्लाई बंद हो जाती है। हर साल लोग 20-22 दिन पानी के संकट के बीच समय गुजारते हैं। इस बार भी कुछ वैसा ही हुआ है। बुधवार रात 12 बजे से गंग नहर का पानी रोक दिया गया है। नोएडा को आज (गुरुवार) से गाजियाबाद से गंगाजल नहीं मिलेगा। ऐसे में जरूरी है कि लोग पानी बर्बाद न करें और इसे सोच-समझकर इस्तेमाल करें।

1250 एमएलडी पानी है स्टोर में
गंग नहर में अब पानी 25 अक्टूबर को छोड़ा जाएगा। अगले 20 दिनों के लिए नोएडा अथॉरिटी की तरफ से तैयारियों को पूरा करने का दावा हर साल की तरह इस बार भी किया गया है। अथॉरिटी अधिकारियों के मुताबिक, अगले 5 दिन तक गंगाजल की सप्लाई सामान्य रूप में की जाएगी। इसके लिए अथॉरिटी ने करीब 1250 एमएलडी गंगाजल का स्टोरेज शहर के 6-7 टैंक में किया हुआ है। स्टोरेज खत्म होने के बाद अथॉरिटी ट्यूबवेल और रेनीवेल से पानी की सप्लाई शुरू करेगी। अथॉरिटी के जल विभाग प्रभारी ओएसडी अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि जल विभाग की पूरी कोशिश है कि कहीं भी पानी का संकट न होने पाए। जहां पर भी पानी की ज्यादा समस्या होगी वहां टैंकर भेजे जाएंगे। शहर में जो ट्यूबवेल उपयोग में हैं उन्हें पूरी क्षमता के साथ चलाया जाएगा। शहर में मौजूदा समय में हर दिन करीब 400 से 425 एमएलडी पानी की खपत होती है। इसमें 250 एमएलडी गंगाजल गाजियाबाद से आता है। इसे शहर के उन इलाकों में जहां टीडीएस का लेवल हाई रहता है उनके ट्यूबवेल के पानी में मिलाकर सप्लाई किया जाता है। लेकिन गंगाजल की सप्लाई रुकने पर सीधे ट्यूबवेल के पानी की सप्लाई होती है, जिससे टीडीएस लेवल बढ़ा हुआ ही पहुंचता है।

शहर में 20 दिन रहेगी किल्लत
नोएडा अथॉरिटी का दावा 5 दिन के गंगाजल स्टोरेज का है। अथॉरिटी थोड़ा-थोड़ा गंगाजल खर्च करती है। टीडीएस का लेवल पहले दिन से ही बढ़ेगा।
शहर के कुछ सेक्टरों में लो-प्रेशर की समस्या आनी शुरू हो जाएगी। कुछ जगहों पर दूसरी मंजिल के ऊपर पानी नहीं चढ़ पाता।
8-10 दिन बाद हाई-टीडीएस की समस्या शहर के कुछ इलाकों को छोड़कर हर जगह हो जाती है।
सप्लाई का बोझ पूरी तरह ट्यूबवेल पर आने से कुछ जगहों पर किल्लत भी शुरू होती है। इसका कारण ट्यूबवेल खराब होना है।

अगर रेनीवेल चालू करा पाता जल विभाग तो समस्या नहीं होती
शहर के सेक्टर व सोसायटी में सप्लाई होने वाले पानी का टीडीएस लेवल 1600 से 1900 तक पहुंच रहा है। गंग नहर की सफाई शुरू होने पर गंगाजल की सप्लाई रुक जाती है। इन दोनों समस्याओं का निदान यमुना किनारे लगे और बंद पड़े 11 रेनीवेल से ही मुमकिन है। ये रेनीवेल चालू करवाने की तैयारी नोएडा अथॉरिटी का जल विभाग पिछले 3 साल से कर रहा है। 2 साल से लगातार काम शुरू करवाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन एक भी रेनीवेल चालू नहीं हो पाया है। यमुना किनारे के 11 रेनीवेल में 9 पूरी तरह बंद हो चुके हैं। जो 2 चल भी रहे हैं वह बंद होने के कगार पर हैं। एक रेनीवेल की क्षमता 18 एमएलडी है। अगर ये सभी 9 रेनीवेल चालू हो जाएं तो 162 एमएलडी पानी यमुना की तलहटी से मिलने लगेगा।

शहर में अभी 250 एमएलडी गंगाजल की सप्लाई है। पानी की खपत 400 एमएलडी की है। गाजियाबाद के प्रताप विहार प्लांट से और साफ होकर आने वाले गंग नहर के पानी में टीडीएस का लेवल 100 से 150 के बीच में रहता है। सीधे ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी में टीडीएस का लेवल 1200 से 1900 तक अधिकतर जगहों पर है। यमुना किनारे लगे रेनीवेल से निकलने वाले पानी में टीडीएस का लेवल 300 तक रहता है। इस तरह 162 एमएलडी यमुना का पानी शहर के टीडीएस लेवल में संतुलन लाने और ट्यूबवेल से निर्भरता हटाने को पर्याप्त है।

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