पटना
बिहार की सियासत इन दिनों देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। 2024 और 2025 के चुनावों से पहले ही राज्य तीन सियासी ध्रुवों में बंटता दिख रहा है। इसमें एक तरफ नीतीश कुमार-तेजस्वी यादव की महागठबंधन सरकार है तो दूसरी तरफ बिहार बीजेपी हैं। वहीं तीसरी तरफ प्रशांत किशोर अलग से जन सुराज यात्रा निकाल नीतीश पर ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने नीतीश कुमार और खासकर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह पर कई हमले किए। ये हमले तब किए गए जब ललन सिंह ने पीके यानि प्रशांत किशोर की जन सुराज यात्रा की फंडिंग पर सवाल उठाए। लेकिन इसमें बीजेपी को मौका मिल गया।
नीतीश को छोड़ जेडीयू में सब जमूरे- BJP
बिहार बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने इसी कड़ी में एक के बाद एक कई ट्वीट दागे। इसी में से एक ट्वीट में उन्होंने लिखा कि ‘पीके के अनुसार लालूजी और राजद का जनाधार नहीं, हवा हवाई हैं क्योंकि अगर 2015 विधानसभा चुनाव में वे कंधा नहीं लगाते तो नीतीशजी की सरकार नहीं आती। दूसरी बात पीके ने कहा कि जदयू में सारे लोग जमूरे हैं क्योंकि नीतीश कुमार जी ने उन्हें बुलाकर अपना उत्तराधिकारी बनाने का ऑफर दिया था।’
JDU-PK में तगड़ी सेटिंगः बीजेपी
निखिल आनंद यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे लिखा कि ‘जदयू-पीके बहदवासी में एक दूसरे को खारिज कर रहे हैं उससे दोनों की सेटिंग साफ है। नीतीशजी-पीके 2साल तक एक घर में साथ रहे-खाए-पिए-सोए, राजनीति की, लगातार गुप्त बात- मुलाकात करते रहे। अब एक्सपोज हुए तो ललन सिंह और पीके खुद सफाई देते फिर रहे हैं।
इसलिए ललन सिंह पर हत्थे से उखड़े पीके
राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा प्रहार करते हुए दावा किया कि उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का नेतृत्व करने के उनके हालिया अनुरोध को ठुकरा दिया था। अपने जन सुराज अभियान के तहत बिहार में 3500 किलोमीटर की ‘पदयात्रा’ पर निकले किशोर ने यहां से लगभग 275 किलोमीटर दूर पश्चिम चंपारण जिले के जमुनिया गांव में नीतीश कुमार पर प्रहार करते हुए कहा, ‘मुख्यमंती बनके बहुत होशियार बन रहे हैं।’ उन्होंने नीतीश कुमार पर अपना प्रहार जारी रखते हुए कहा, ‘2014 में (लोकसभा) चुनाव हारने के बाद दिल्ली आकर उन्होंने कहा था कि हमारी मदद कीजिए। महागठबंधन बनाकर (2015 बिहार विधानसभा चुनाव) में हमलोगों ने उनको जिताने में कंधा लगाया, अब बैठकर (मुख्यमंत्री बनकर) हमें ज्ञान दे रहे हैं । अभी 10-15 दिन पहले बुलाकर बोले कि हमारी पार्टी का नेतृत्व कीजिए, हमने कहा कि अब यह नहीं हो सकता है। ’
किशोर का यह गुस्सा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह द्वारा उनकी फंडिंग के स्रोत पर सवाल उठाने के एक दिन बाद आया। किशोर ने नाराजगी भरे लहजे में कहा, ‘जो लोग जानना चाहते हैं कि मुझे पैसा कहां से मिल रहा है, उन्हें पता होना चाहिए कि उनकी तरह मैंने दलाली नहीं की है। अपनी बुद्धि से दस साल काम किए हैं। ‘बडे़-बडे़ नेता मेरे पास इस बात के लिए आते थे कि चुनाव कैसे जीतेंगे। इसके लिए कुछ पैसा ले लीजिए । मेरी मदद कीजिए । मीडिया वाले मुझे राजनीतिक रणनीतिकार और चुनाव प्रबंधक कहते थे । इससे पहले मैंने कभी किसी से पैसा नहीं लिया । लेकिन आज मैं दान मांग रहा हूं। यह वह शुल्क है जो मैं इस आंदोलन के लिए ले रहा हूं, जिसमें हमारे द्वारा यहां लगाए गए तंबू पर खर्च होता है।’
