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Tuesday, March 24, 2026
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UKSSSC पेपर लीक में SIT का ऐक्शन, तीरथ सरकार में सलाहकार रहे आरबीएस रावत गिरफ्तार

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देहरादून

उत्तराखंड अधीस्थ सेवा चयन आयोग के पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। आयोग के तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति की घोषणा कर चुके सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई को संतोषजनक करार दिया है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां सही दिशा में काम कर रही हैं। वर्ष 2016 की वीडीपीओ भर्ती परीक्षा UKSSSC की ओर से कराई गई थी। परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला सामने आया। मामले की जांच का जिम्मा धामी सरकार ने एसआईटी को सौंपा। इस मामले में एसआईटी ने शनिवार को आयोग के पूर्व चेयरमैन आरबीएस रावत, सचिव मनोहर कन्याल और पूर्व एग्जामिनेशन कंट्रोलर आरएस पोखरिया को गिरफ्तार किया है।

तीरथ सरकार में बने थे सलाहकार
आरबीएस रावत उत्तराखंड में बड़ा रसूख रखने वाले अधिकारी माने जाते हैं। वे पूर्व पीसीसीएफ रहे हैं। इसके अलावा तीरथ सिंह रावत सरकार के कार्यकाल में उन्हें सलाहकार बनाया गया था। भर्ती परीक्षा घोटाले में इसे अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। घोटाले की जांच काफी समय से चल रही है। लेकिन, धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान जांच में तेजी आई है। छह सालों के बाद इस मामले में कार्रवाई हुई है।

सीएम ने एसटीएफ की कार्रवाई को सराहा
एसटीएफ की ओर से तीन बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी का भी इस मामले में बयान सामने आया है। उन्होंने जांच एजेंसी की कार्रवाई की तारीफ की है। सीएम धामी ने कहा कि जांच एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से काम कर रही हैं। उत्तराखंड के युवाओं का हक मारने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा सरकार आगे की परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से कराने के लिए माहौल तैयार कर रही है।

सीएम ने कहा कि परीक्षार्थियों के हक के साथ कोई छेड़छाड़ न कर सके, इसके लिए आज की कार्रवाई मिसाल बनेगी। अधिकारी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर गलती करेगा तो उस पर भी कार्रवाई होगी। सीएम ने आगे की परीक्षाओं को पूर्ण पारदर्शिता से कराने का भरोसा जताया।

क्या है पूरा मामला
UKSSSC की ओर से 6 मार्च 2016 को ग्राम पंचायत विकास अधिकारी चयन परीक्षा का आयोजन किया गया। 13 जिलों के 236 परीक्षा केंद्रों पर इसका आयोजन कराया गया। इसमें 87,196 परीक्षार्थियों ने भाग लिया। 30 मार्च 2016 को इस परीक्षा का रिजल्ट आया। इसी के साथ धांधली का मामला भी सामने आया। उत्तराखंड सरकार ने इस मामले में वर्ष 2017 में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की। जांच समिति ने परीक्षा में गड़बड़ी पाई और रिजल्ट को निरस्त कर दिया गया।

वर्ष 2019 में मामले की जांच का जिम्मा देहरादून विजिलेंस को दिया गया। वर्ष 2020 में जांच रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस ने देहरादून में केस दर्ज किया। दो वर्षों से इस मामले की जांच चल रही थी। एसआईटी ने इस मामले में पिछले दिनों लगातार गिरफ्तारियां की हैं।

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