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पुतिन के पलटवार का खौफ… क्या ‘पर्ल हार्बर मोमेंट’ साबित होगा क्रीमिया ब्रिज अटैक?

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नई दिल्ली,

दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के संगठन G-7 ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सख्त से सख्त शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है अगर रूस परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करता है तो इसका अंजाम बहुत ही बुरा होगा. जी-7 देशों की वार्निंग से इतर पुतिन की सेना लगातार यूक्रेन पर बम और मिसाइल बरसा रही है. पुतिन का ये बदला-बदला आक्रामक अंदाज रूस की शान कहे जाने वाले क्रीमिया ब्रिज पर हमले के बाद दिख रहा है. सोमवार को उन्होंने अपनी सेनाओं को यूक्रेन पर मिसाइलों से हमले करने का आदेश दिया. इसके बाद यूक्रेन में रूसी सेनाओं का कहर देखने को मिल रहा है. इसे 24 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद मास्को का सबसे बड़ा हवाई हमला कहा जा रहा है.

क्रीमिया ब्रिज पर हमले से पुतिन प्रशासन बिलबिलाया हुआ है. इस ब्रिज को पुतिन रूस की शान समझते थे. लेकिन एक भीषण ब्लास्ट में 3 खरब रुपये की लागत से बीच समंदर में बना ये ब्रिज तबाह हो गया है. इस घटना से रूसी सैनिकों के मनोबल को तगड़ा झटका लगा है. अब दुनिया इस खौफ में है कि इस हमले का बदला लेने के लिए पुतिन कई अपने टैक्टिकल परमाणु हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ न कर दें.

क्या हुआ था पर्ल हार्बर में
रूस यूक्रेन वार का जो मौजूदा हाल है उससे दूसरे विश्व युद्ध की याद आती है. जब 7 दिसंबर 1941 में जापान ने अमेरिका के नौसैनिक अड्डे पर्ल हार्बर पर हमला किया था. इस क्रूर हमले में जापान ने अमेरिका को पानी पिला दिया था. 90 मिनट की इस बमबारी में ढाई हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. पर्ल हार्बर हवाई द्वीप में मौजूद अमेरिका का नौसैनिक सैन्य अड्डा है. जापान ने अमेरिका के कई युद्धपोत, पनडूब्बी को समंदर में डूबो दिया, 500 से ज्यादा हवाई जहाज नष्ट कर डाले. अमेरिका नुकसान अरबों डॉलर में था. छोटे से जापान ने पर्ल हार्बर में अपनी नौसैनिक और हवाई ताकत का ऐसा परिचय दिया कि दुनिया की ताकतें हैरान रह गई. दुनिया की महाशक्ति अमेरिका पर ये जापान का डायरेक्ट हमला था.

पर्ल हार्बर हमले के बाद वर्ल्ड वार में हुई अमेरिका की एंट्री
जान-माल के नुकसान के अलावा इस अटैक का रणनीतिक महत्व ये है कि इस हमले से पहले अमेरिका दूसरे विश्व युद्ध में तटस्थ था. लेकिन हमले के अगले ही दिन यानी कि 8 दिसंबर 1941 को अमेरिका इस विश्वयुद्ध में औपचारिक रूप से शामिल हो गया.पर्ल हार्बर हमला इतिहास का वो टर्निंग प्वाइंट है जहां से विश्व की राजनीति की धारा बदल गई. अमेरिका विश्व युद्ध में शामिल हुआ, जापान पर परमाणु हमला हुआ और दुनिया ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का ऐसा विध्वंसक रूप देखा कि लोगों की आत्मा कांप गई.

पुतिन का ड्रीम प्रोजेक्ट क्रीमिया ब्रिज हो गया है ध्वस्त
दरअसल जिस तरह क्रीमिया ब्रिज अटैक को पुतिन के प्राइड पर चोट बताया जा रहा है उसी तरह पर्ल हार्बर हमला दुनिया की महाशक्ति अमेरिका के गुमान पर चोट था जिसे जापान जैसे छोटे से एशियाई देश ने अमेरिका जैसे मुल्क पर ढाया था. इस हमले के बाद बिलबिलाये अमेरिका ने सेकेंड वर्ल्ड वार में औपचारिक एंट्री ले ली. बता दें कि साल 2014 में जब पुतिन ने क्रीमिया पर कब्जा किया तो क्रीमिया को रूस से जोड़ने के लिए उन्होंने समंदर में 19 किलोमीटर लंबा ब्रिज बनवाया. इस ब्रिज पर दो रास्ते हैं जिससे ट्रेन और ट्रक गुजर सकते थे. यूक्रेन वार में ये ब्रिज रूस के सप्लाई लाइन का अहम है. इस ब्रिज पर हुए अटैक की वजह क्रीमिया और रूस के बीच मौजूद डायरेक्ट लिंक फिलहाल खत्म हो गया है.

इस हमले से पहले भी यूक्रेन वार में पुतिन के कदम डगमगा रहे थे. 7 अक्टूबर को जब उन्होंने अपना जन्मदिन मनाया तबतक यूक्रेन की सेना इस जंग में रूसी सेना पर भारी पड़ रही थी. यूक्रेनी सेना रूस से जीते गए इलाकों को वापस ले रही थी. इसी दौरान क्रीमिया ब्रिज पर हमला हुआ है. हालांकि यूक्रेन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है लेकिन पुतिन ने इस हमले को आतंकी कृत्य करार देते हुए यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया है.

पुतिन के ‘All means’ का मतलब क्या?
वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे एक लेख के अनुसार परमाणु हथियारों ने सोवियत रूस को सुपर पावर बनाया है. सोवियत विघटन के बाद रूस की प्रतिष्ठा को धक्का लगा है. पुतिन रूस के लिए इस सम्मान को वापस चाहते हैं. बता दें कि रूस ये कह चुका है कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए अपनी क्षमता में All means यानी कि “सभी साधनों” का उपयोग करेगा. यहां सभी साधनों शब्द की व्याख्या बहुत ही व्यापक है जिसमें परमाणु हथियार भी शामिल है. अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने दावा किया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ऐसा कहकर कोई “मजाक नहीं कर रहे थे. पुतिन के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा परमाणु हथियारों का उपयोग करके एक पैमाना तय कर दिया गया है.

क्या पुतिन टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन का इस्तेमाल करेंगे?
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन लगातार अपना बयान बदल रहे हैं. पहले पुतिन के बयान को ‘मजाक’ के रूप में लेने को न कहने वाले बाइडेन ने बुधवार को कहा कि उन्हें संदेह है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सामरिक परमाणु हथियार का इस्तेमाल करेंगे. बाइडेन ने कहा कि पुतिन तर्कसंगत रूप से काम करने वाले एक्टर हैं जिन्होंने बहुत ही गलत अनुमान लगाया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कितना विश्वास है कि पुतिन टैक्टिकल परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि वे ऐसा नहीं करेंगे.

दुनिया को पुतिन के बदले का डर
क्रीमिया ब्रिज पर हमले के बाद अगर पुतिन किसी भी तरह से परमाणु हथियारों का इस्तेमाल, जिसकी आशंका फिलहाल नहीं है, करते हैं तो आधुनिक इतिहास में इस घटना का वही महत्व होगा जो दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पर्ल हार्बर हमले का था. फिलहाल जी-7 देशों ने पुतिन को ऐसे किसी भी फैसले से बाज आने को कहा है और ऐसा करने पर अभूतपूर्व अंजाम भुगतने की धमकी दी है. लेकिन अगर रूस की ओर से टैक्टिकल परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है तो फिर दुनिया को संपूर्ण विनाश का भयावह मंजर देखने को तैयार रहना पड़ेगा.

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