नई दिल्ली,
भारतीय मूल की ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन के भारतीय प्रवासियों को लेकर दिए गए बयान के बाद से ही भारत-ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अटक जाने के कयास लगाए जा रहे हैं. ब्रिटिश गृह मंत्री ने मुक्त व्यापार समझौते का विरोध करते हुए कहा था कि इससे भारतीय प्रवासियों की भीड़ बढ़ जाएगी. ब्रिटेन ने अब इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि ब्रिटेन भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाना चाहता है.
क्या कहा ब्रिटेन ने
ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली से भारतीय प्रवासियों के बारे में गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन की टिप्पणियों और एफटीए डील के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन का सहयोग कई क्षेत्रों में मजबूत रहा है. हम इस डील के द्वारा व्यापार क्षेत्र में भी सहयोग को मजबूत बनाना चाहते हैं.
तय समय सीमा में डील नहीं होगी पूरी
ब्रिटेन के ट्रेड सेक्रेटरी केमी बडेनोच ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि हम इस डील पर अभी भी काम कर रहे हैं. भारत से कई मुद्दों पर बातचीत जारी है. डील की गति के बजाय गुणवत्ता पर ध्यान देने की कोशिश है. इसलिए यह डील तय समय सीमा दीवाली तक नहीं हो पाएगी. ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने इससे पहले कहा था कि भारत और ब्रिटेन के बीच यह डील दीवाली से पहले हो जाएगी.
भारत ने दी थी कड़ी प्रतिक्रिया
ब्रिटेन की गृह मंत्री की टिप्पणी पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी थी. मोदी सरकार ने कहा था कि भारत और ब्रिटेन के बीच वीजा और प्रवास से संबंधित बातचीत चल रही है. अभी इस तरह के बयान का कोई औचित्य नहीं बनता है. भारत ने यह भी कहा था कि भविष्य में कोई भी समझौता दोनों तरफ के हितों को देखते हुए किया जाएगा.
क्या कहा था ब्रिटेन की गृह मंत्री ने
ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते का कड़ा विरोध किया था. ब्रिटिश मैगजीन स्पेक्टेटर को दिए एक इंटरव्यू में ब्रेवरमैन ने कहा था कि ब्रिटिश लोगों ने ब्रेग्जिट से हटने के लिए इसलिए वोट नहीं किया था कि भारतीयों के लिए ब्रिटेन की सीमा इस तरह से खोल दिया जाए. उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी ब्रिटेन में अपनी वीजा अवधि से ज्यादा समय बिताते हैं. इस डील से ब्रिटेन में भारतीयों की भीड़ बढ़ जाएगी.
क्या है मुक्त व्यापार समझौता
इस डील की मदद से ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लीज ट्रस ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में जान फूंकना चाहती हैं, वहीं भारत इस डील से अपने कामगारों और पढ़ने जाने वाले छात्रों के लिए वीजा में रियायात का मांग कर रहा है. इस डील की मदद 2030 तक दोनों देश के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होने की उम्मीद है.
