वॉशिंगटन
अमेरिका और रूस में दुश्मनी जगजाहिर है। दोनों देश शीत युद्ध के पहले से एक दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी और दुश्मन हैं। इसके बावजूद दोनों देशों की कई कंपनियां आपस में सीक्रेट डील के तहत काम कर रही हैं। खुलासा हुआ है कि एक अमेरिकी टेक्नोलॉजी निर्माता कंपनी ने रूस के एस-400 मिसाइल सिस्टम बनाने वाली सरकारी कंपनी के साथ सीक्रेट डील की थी। यह अमेरिकी कंपनी 2014 में क्रीमिया पर रूस के कब्जे के बाद लगे प्रतिबंधों को बॉयपास कर नेटवर्किंग तकनीक में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की आपूर्ति कर रही थी। यह वही एस-400 सिस्टम है, जिसे खरीदने पर अमेरिका ने तुर्की को अपने एफ-35 प्रोग्राम से बाहर कर कई सैन्य प्रतिबंध लगा दिए थे। भारत को भी रूस से एस-400 खरीदने पर कई साल तक अमेरिकी प्रशासन ने धमकियां दी। ऐसे में एस-400 में अमेरिका में बने उपकरणों के इस्तेमाल ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कंपनी ने मानी गलती, कहा- सरोगेट खरीदार ने की डील
रॉयटर्स के खुलासे के अनुसार, अमेरिका ने 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के बाद एस-400 मिसाइल सिस्टम बनाने वाली रूसी कंपनी एमएमजेड अवांगार्ड को प्रतिबंधित कर दिया था। इस कंपनी के अमेरिका में व्यापार करने या किसी अमेरिकी कंपनी के इसके साथ काम करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। लेकिन, प्रतिबंधों के बावजूद सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी एक्सट्रीम नेटवर्क्स ने रूसी कंपनी एमएमजेड अवांगार्ड को ऑफिस आईटी सिस्टम के लिए कंप्यूटर नेटवर्किंग उपकरणों को बेचा था। खुलासे के बाद एक्सट्रीम ने कहा कि हो सकता है कि कोई सरोगेट खरीदार के जरिए रूसी कंपनी एमएमजेड अवांगार्ड को उपकरण बेचे गए हों। एक्सट्रीम ने कहा कि उपकरण उसकी जानकारी के बिना बेचा गया था। कंपनी ने स्वीकार किया कि वह एक मध्यस्थ के जरिए अपने उत्पादों को एक फ्रंट कंपनी के माध्यम से गलत लोगों को दे चुका है। कंपनी ने यह भी बताया कि वह अमेरिकी अधिकारियों को इन संभावित बिक्री से संबंधित रिपोर्ट दे रहा है।
इसी रूसी कंपनी की मिसाइलों ने यूक्रेन में बरपाया कहर
आरोप हैं कि 24 फरवरी के बाद रूस ने एमएमजेड अवांगार्ड कंपनी की बनाई मिसाइलों के जरिए यूक्रेन में कई हमले किए हैं। यूक्रेनी अधिकारियों ने दावा किया है कि पिछले महीने जापोरोज्जिया में एमएमजेड अवांगार्ड की मिसाइलों ने एक काफिले पर हमला कर कम से कम 30 नागरिकों को मार डाला था। हालांकि, रूस और एमएमजेड अवांगार्ड ने अमेरिकी कंपनी के साथ हुई इस डील को लेकर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। रॉयटर्स की समीक्षा की गई व्यावसायिक रिकॉर्ड और मामले से परिचित लोगों के अनुसार, 2017 और 2021 के बीच एमएमजेड अवांगार्ड ने अपने आईटी सिस्टम के लिए आधे मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के कई हाई टेक्नोलॉजी वाले उपकरणों की खरीद की थी। इनमें हाई-स्पीड स्विच, कॉर्पोरेट आईटी नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण बिल्डिंग ब्लॉक और सॉफ्टवेयर शामिल थे।
कैसे हुए मामले का खुलासा
दरअसल, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के छह सप्ताह बाद एक्सट्रीम नेटवर्क्स के एक कर्मचारी ने आतंरिक शिकायत दर्ज कराई कि कंपनी रूस में कई सैन्य कंपनियों को उपकरण बेच रही है। आरोप में कहा गया था कि अमेरिकी कंपनी एक्सट्रीम नेटवर्क्स के अधिकतर उपकरणों का इस्तेमाल रूसी युद्धपोतों के कम्यूनिकेशन सिस्टम में किया जाता है। इसी के बाद खोजबीन शुरू हुई और इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। इस खुलासे से पता चला कि रूसी कंपनियों को खतरनाक बताए जाने के बावजूद अमेरिकी कंपनियां कंप्यूटर हार्डवेयर की बिक्री जारी रखी हुई थीं। इससे यह भी पता चला है कि रूस के कई हथियार अमेरिका के उच्च तकनीक वाले उपकरणों पर कितने निर्भर हैं।
