नई दिल्ली
छठ महापर्व के मौके पर विभिन्न पूजा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दिल्ली स्थित कालिंदी कुंज घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। यहां सबसे पहले आपको बता दें कि कालिंदी कुंज घाट इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि यह वही घाट है जहां जलबोर्ड के डायरेक्टर संजय शर्मा ने भाजपा सांसद की चुनौती को स्वीकार करते हुए स्नान किया था। जलबोर्ड के डायरेक्टर ने यमुना की पानी से स्नान करने के बाद कहा था कि इसमें किसी भी प्रकार का कोई भी जहरीला पदार्थ नहीं मिलाया गया है। यमुना के पानी का BOD लेवल 12-13 है। जबकि TSS 20 के नीचे है, फास्फेट 0.1 और डिसोल्वड ऑक्सीजन 7.0 से ज्यादा है। छठ महापर्व के मौके पर दिल्ली स्थित कालिंदी कुंज घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आई। रविवार को यहां घाट पर श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। जो वीडियो सामने आया है उसमें नजर आ रहा है कि यहां लोगों की भारी भीड़ जमा है। सोमवार को यहां श्रद्धालु अहले सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने भी आएंगे।
#WATCH | Delhi: Huge crowd of devotees gather at the national capital's Kalindi Kunj ghat to offer prayers on #ChhathPooja pic.twitter.com/2Xy42xqlEe
— ANI (@ANI) October 30, 2022
बता दें कि भाजपा के सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने दिल्ली जलबोर्ड के निदेशक संजय शर्मा को चुनौती दी थी कि वो यमुना नदी के पानी से स्नान कर के दिखाएं। इसके बाद संजय शर्मा ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए यमुना नदीं के पानी से स्नान किया था। संजय शर्मा ने कहा था कि यमुना का पानी स्वच्छ है, जहरीला नहीं है। प्रवेश साहिब सिंह ने जलबोर्ड पर आरोप लगाया था कि यमुना के पानी से झाग को कम करने के लिए खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका दावा था कि यमुना के पानी से स्नान करने पर शरीर पर बुरा असर पड़ेगा। संजय शर्मा ने भाजपा सांसद और उनके सहयोगी तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ शिकायत भी की थी।
बता दें कि दिल्ली में नगर निगम चुनाव कभी भी कराए जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी दिल्ली की सड़कों पर फैली गंदगी और कूड़े के पहाड़ को लेकर भाजपा पर लगातार निशाना साध रही थी। इस बीच बीजेपी नेताओं ने यमुना नदी में बढ़े प्रदूषण और झाग का मुद्दा उठा कर आप को घेरा। भाजपा के कुछ नेता नाव पर बैठकर यमुना नदी में जमा झाग दिखाते नजर आए थे। भाजपा नेताओं का आरोप है कि दिल्ली की सरकार ने छठ पूजा से पहले ना तो घाटों की साफ-सफाई करवाई और ना ही यमुना को साफ करवाया गया।
