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राजद्रोह पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, संसद सत्र में कानून में बदलाव लाने को राजी हुई सरकार

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नई दिल्ली,

राजद्रोह कानून पर लगी रोक अभी जारी रहेगी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के सुनवाई टालने के आग्रह को स्वीकार लिया है. सोमवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र में इस मसले पर वो कुछ करने जा रहा है. यानी कुछ बदलाव हो सकता है. ऐसे में तब तक केंद्र को शीर्ष अदालत के राजद्रोह कानून पर रोक लगाने के आदेश का पालन करना होगा.

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में तीन महीने बाद यानी जनवरी के दूसरे हफ्ते में सुनवाई करेगा. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मई महीने में राजद्रोह कानून के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने कहा था कि पुनर्विचार तक राजद्रोह कानून यानी 124ए के तहत कोई नया केस दर्ज ना किया जाए. केंद्र इस बाबत राज्यों को निर्देशिका जारी करेगा. साथ ही कोर्ट ने पुराने मामलों के बारे में भी कहा था कि जो लंबित मामले हैं, उन पर यथास्थिति रखी जाए. कोर्ट ने उस वक्त नागरिकों के अधिकारों की रक्षा को सर्वोपरि बताया था और कहा था कि देश में इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है.

10 साल में 11 हजार लोगों पर लगा देशद्रोह
एक जानकारी के मुताबिक 2010 से 2020 के बीच करीब 11 हजार लोगों के खिलाफ देशद्रोह के 816 केस दर्ज किए गए. इनमें सबसे ज्यादा 405 भारतीयों के खिलाफ नेताओं और सरकारों की आलोचना करने पर राजद्रोह के आरोप लगे हैं. यूपीए-2 सरकार की तुलना में एनडीए सरकार के कार्यकाल में हर साल राजद्रोह के मामलों में 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. धारा 124 ए का सबसे ज्यादा इस्तेमाल आंदोलनों को दबाने में किया गया.

क्या है राजद्रोह कानून?
आसान भाषा में समझें तो IPC की धारा 124 (A) के अनुसार, राजद्रोह एक अपराध है. राजद्रोह के अंतर्गत भारत में सरकार के प्रति मौखिक, लिखित या संकेतों और दृश्य रूप में घृणा या अवमानना या उत्तेजना पैदा करने के प्रयत्न को शामिल किया जाता है. हालांकि, इसके तहत घृणा या अवमानना फैलाने की कोशिश किए बिना की गई टिप्पणियों को अपराध की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाता. राजद्रोह गैरजमानती अपराध है. राजद्रोह के अपराध में तीन साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और इसके साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है. इस कानून के तहत आरोपी व्यक्ति को सरकारी नौकरी करने से रोका जा सकता है.

बता दें कि यह कानून अंग्रेजों के जमाने में लाया गया था जिसे कि आजादी के बाद 75 सालों में भी नहीं बदला गया. 1870 में लागू हुए इस कानून को भारत के स्वतंत्रता संग्राम को कुचलने के लिए लाया गया था. 152 साल पुराना ये कानून धीरे-धीरे सत्ता का हथियार बन गया. ऐसे में सरकार पर लगातार आरोप लगे कि अंग्रेजों के जमाने के कानून का आजाद भारत में क्या काम है?

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