नई दिल्ली
कर्मचारियों की संख्या के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी ऐमजॉन (Amazon) ने नई भर्तियों पर रोक लगा दी है। इस दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी का साथ ही कहना है कि अगले कई महीनों तक नए लोगों की भर्ती पर रोक जारी रहने की आशंका है। दुनिया में सबसे ज्यादा कर्मचारी अमेरिका की दिग्गज रिटेल कंपनी वॉलमार्ट (Walmart) में हैं। रेवेन्यू के हिसाब से यह दुनिया का सबसे बड़ी कंपनी है और इसमें 23 लाख कर्मचारी काम करते हैं। इसके बाद दूसरे नंबर परऐमजॉन (Amazon) है। इस कंपनी में 16 लाख लोग काम करते हैं। वॉलमार्ट ने भी हाल में 200 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था। इसे मंदी (recession) की संकेत माना जा रहा है। गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) और फेसबुक (Facebook) की मूल कंपनी मेटा (Meta) समेत दुनिया की कई टेक कपंनियां पहले ही हायरिंग बंद कर चुकी हैं। ट्विटर (Twitter) में भी बड़े पैमाने पर छंटनी होने जा रही है।
सवाल यह है कि क्या मंदी आ चुकी है। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्रिटेन में 100 वर्षों में सबसे लंबी मंदी आने की चेतावनी दी है। उसका कहना है कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था बहुत ही चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। इस गर्मी में शुरू हुई मंदी 2024 के मध्य तक चलने की उम्मीद है। अमेरिका में भी लगातार दो तिमाहियों में जीडीपी में गिरावट आई है। तकनीकी रूप से इसे मंदी कहा जाता है। यानी अमेरिका भी मंदी की चपेट में है। कनाडा की सरकार ने भी चेतावनी दी है कि अगले साल देश की इकॉनमी मंदी की चपेट में आ सकती है। ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने भी मंदी की आशंका जताई है। यूरोप के कई देशों में भी हालात ठीक नहीं हैं।
मंदी के संकेत
जिस तरह से कंपनियां बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही हैं, वह साफ इशारा है कि मंदी दुनिया की दहलीज पर पहुंच चुकी है। फेसबुक जैसी कंपनी पहली बार 12,000 कर्मचारियों की निकालने की तैयारी में है। गूगल ने भी अपने खर्चों में कटौती करने और छंटनी की घोषणा की है। बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। महंगाई चरम पर है। महंगाई को रोकने के लिए दुनियाभर के सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर रहे हैं। इससे ग्रोथ प्रभावित हो रही है। ज्यादातर इकनॉमिस्ट्स का कहना है कि मंदी को रोकना मुश्किल है।
मंदी के नतीजे
जानकारों का कहना है कि मंदी के कई कारण हैं। इनमें इकॉनमी में तेजी लाने के मकसद से दिए गए आर्थिक पैकेज के नाम पर बेतहाशा खर्च और दुनिया को चीन की ओर से भेजे जाने वाली चीजों की सप्लाई चेन में रुकावट शामिल है। साथ ही यूक्रेन पर रूस के हमले और दूसरी तमाम वजहों ने महंगाई को उस मुकाम पर पहुंचा दिया है जो बीते कई दशकों में नहीं देखी गई थी। मंदी के कई भयावह नतीजे हो सकते हैं। निवेश का माहौल गड़बड़ा सकता है। खपत और लेन-देन में कमी से कई कंपनियां बंद हो सकती हैं। नौकरियां कम हो जाएंगी, लोग और कंपनियां कर्ज चुकाने में डिफॉल्ट करने लगेंगे।
