नई दिल्ली,
ब्रिटेन के व्यापार मंत्री ग्रेग हैंडस की दो दिवसीय ताइवान दौरे को लेकर चीन ने नाराजगी जताई है. चीन ने कहा है कि ब्रिटेन ‘वन चाइना पॉलिसी’ का उल्लंघन कर रहा है. ब्रिटिश मंत्री हैंडस मंगलवार से शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार विभाग के वार्षिक वार्ता की सह-मेजबानी करेंगे. इस यात्रा के दौरान वह ताइवान के राष्ट्रपति त्साई इंग वेन से मुलाकात भी करेंगे. राजनीतिक और आर्थिक दोनों परिपेक्ष्य से ग्रेग हैंडस की यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण बताई जा रही है. कोविड-19 महामारी के बाद पहली बार ब्रिटेन का कोई मंत्री ताइवान के दौरे पर है. वहीं, किसी उच्च स्तरीय ब्रिटिश मंत्री की यह पहली ताइवान यात्रा है.
चीन ने कहा यह वन चाइना पॉलिसी का उल्लंघन
चीन ने ब्रिटिश व्यापार मंत्री हैंडस की ताइवान दौरे पर नाराजगी जताई है. चीन ने कहा कि हैंडस का यह दौरा ‘वन चाइना पॉलिसी’ का उल्लंघन है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा कि ब्रिटेन को ताइवान के साथ किसी भी प्रकार के आधिकारिक समझौता नहीं करना चाहिए.
ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को बुस्ट करने की कोशिश
ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था इस वक्त मंदी की आहट से गुजर रही है. ब्रिटेन में महंगाई अपने चरम पर है. यही कारण है कि लिज ट्रस को 45 दिनों में ही इस्तीफा देना पड़ा था. ऐसे में नए प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के सामने कई आर्थिक चुनौतियां हैं. ब्रेक्जिट से निकलने के बाद ब्रिटेन प्रशांत महासागर क्षेत्र में अपना व्यापार संबंध स्थापित करना चाहता है.
ब्रिटेन और ताइवान दोनों ग्लोबल टेक्नोलॉजी में अव्वल देश हैं, इसीलिए इस टेक्नोलॉजी के नए युग में ताइवान ब्रिटेन का महत्वपूर्ण सहयोगी देश हो सकता है. ब्रिटिश अखबार द टाइम्स के मुताबिक, ब्रिटेन के व्यापार मंत्री के इस दौरे से ताइवान से सेमीकंडक्टर्स और अन्य इलेक्ट्रोनिक्स समानों की आपूर्ति श्रृंखला को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. जिससे ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने में मदद मिलेगी.
अमेरिकी नेता नैंसी पेलोसी के यात्रा पर भी भड़क उठा था चीन
अगस्त में भी अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन की नेता नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे के बाद तनाव काफी बढ़ गया था. नैंसी पोलिसी की इस यात्रा के बाद चीन ने ताइवान को लेकर बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किया था. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा था कि आग से खेलना अच्छा नहीं है.
ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन
ताइवान खुद को अलग देश मानता है. जबकि चीन इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है. चीन किसी भी देश का ताइवान के साथ राजनायिक संबंधों को नकारता रहा है. ताइवान का अपना संविधान है और यहां लोगों की चुनी हुई सरकार है.
