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चीन के J-20 फाइटर जेट की ताकत पर बड़ा खुलासा, अमेरिकी F-35, राफेल से होती है तुलना

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बीजिंग

चीन के सबसे ताकतवर और आधुनिक कहे जाने वाले जे-20 और जे-16 फाइटर जेट दुनिया के लिए रहस्‍य बने हुए हैं। अब चीन के झुहाई एयरोशो के दौरान लाल सेना के इन विमानों के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। चीन के पास कम से कम 200 जे-20 और 240 जे-16 फाइटर जेट हैं। चीन का यह जे-20 विमान रेडॉर की पकड़ में नहीं आता है। इन विमानों के निर्माण नंबर के आधार पर एक चीनी विशेषज्ञ ने खुलासा किया है कि चीन के पास इतने बड़े पैमाने पर ये विमान हैं। चीन के इन विमानों की अमेरिका के एफ-35 और एफ-15 तथा भारत के राफेल फाइटर जेट से तुलना होती है।

चीनी सेना के विमानन उद्योग और पीएलए की वायुसेना पर कई किताबें लिख चुके एंडरेस रूप्‍पेरेचट ने बताया कि एयरोशो में मौजूद विमानों के निर्माण नंबर के आधार पर पता चलता है कि जे-20 के 4 प्रोडक्‍शन बैच हैं और जे-16 के 11 बैच हैं। उन्‍होंने कहा कि दो चेंगदू जे-20 फाइटर जेट पर CB0369 और CB0370 लिखा है। उन्‍होंने कहा कि CB03 संभवत: यह संकेत देता है कि ये चीनी विमान चौथे प्रोडक्‍शन बैच के हैं और CB00 पहला बैच है। माना जाता है कि चीन ने अमेरिका के एफ-35 को कॉपी करके इसे बनाया है।

अमेरिका के मुकाबले तेजी से खुद को तैयार कर रहा है चीन
एंडरेस ने कहा कि अंतिम के दो निर्माण नंबर यह बताते हैं कि यह विमान उस खास बैच का रनिंग नंबर है। जिस विमान को एयरो शो में पेश किया गया है, वह चौथे प्रोडक्‍शन बैच का 69वां और 70वां विमान है। इससे पहले माना जाता था कि चीन के पास कम संख्‍या में जे-20 हैं। उन्‍होंने बताया कि ताजा खुलासे से यह पता चला है कि चीन के पास कुल 208 जे-20 हैं। चीन ने इसमें अपना स्‍वदेशी इंजन लगाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन लगातार रेडॉर की पकड़ में नहीं आने वाले विमानों के मामले में अमेरिका के मुकाबले अपनी ताकत को दुरुस्‍त कर रहा है।

चीन ने साल 2015 में अपने जे-16 फाइटर जेट को वायुसेना में शामिल किया था। यह चीन के फाइटर जेट J-11B और रूस के सुखोई-30एमके सीरिज के विमानों पर आधारित है। ये दोनों ही विमान रूस के सुखोई-27 फ्लैंकर इंटरसेप्‍टर पर आधारित हैं। चीन ने जे-16 का इलेक्‍ट्रोनिक वर्जन भी बनाया है जिसे जे-16 डी नाम दिया गया है। चीन के इन घातक विमानों के खुलासे से अमेरिका और भारत की टेंशन बढ़ सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के फाइटर जेट पश्चिमी देशों के मुकाबले अभी भी कमजोर हैं।

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