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ISRO ने गगनयान की सुरक्षा के लिए झांसी में किया बड़ा टेस्ट, अब होगी सेफ लैंडिग

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बबीना (झांसी),

उत्तर प्रदेश के झांसी से थोड़ी दूर स्थित मिलिट्री कैंट का इलाका बबीना. सुबह की बात थी. आसमान में हल्का कोहरा था. विजिबिलिटी कम थी. इस दौरान लोगों ने देखा कि आसमान से दो बड़े पैराशूट किसी भारी चीज़ को लेकर जमीन की ओर आ रहे हैं. शुरुआत में लोग थोड़े से घबराए कि अचानक से शांत रहने वाले इस मिलिट्री कैंट में कौन सा मिशन शुरू हो गया. लेकिन जब बात में पता चला कि ये ISRO के गगनयान मिशन के पैराशूट सिस्टम की टेस्टिंग हो रही थी, तब उन्हें चैन आया.

असल में इस तस्वीर में आप जो पैराशूट देख रहे हैं, वही पैराशूट गगनयान के क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग कराएंगे. शुक्रवार यानी 18 नवंबर 2022 को विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के वैज्ञानिकों ने सेना के इस इलाके में गगनयान पैराशूट सिस्टम (Gaganyaan Parachute System) की जांच की. टेस्टिंग के लिए बबीना फील्ड फायरिंग रेंज को चुना गया था. टेस्ट का नाम था इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (IMAT). इस टेस्ट में पैराशूट की ताकत और क्षमता का परीक्षण किया जा रहा था. ताकि भविष्य में गगनयान के क्रू मॉड्यूल की लैंडिंग के समय दिक्कत न हो.

ऐसा नहीं है कि गगनयान में सिर्फ यही तीन पैराशूट रहेंगे. लेकिन ये तीनों मुख्य पैराशूट हैं. इसके अलावा इसमें तीन छोटे एसीएस, पायलट और ड्रोग पैराशूट भी लगाए जाएंगे. ताकि क्रू मॉडयूल को सही दिशा में लाकर उसकी गति को तय मानकों तक कम किया जा सके. IMAT टेस्ट में यह देखा गया कि अगर एक पैराशूट खराब हो जाता है तो क्या दो पैराशूट मिलकर इस मॉड्यूल को सही सलामत उतार पाएंगे. इसलिए यह इंटीग्रेटेड पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट किया गया था.

परीक्षण के दौरान इन पैराशूट की मदद से 5 टन का डमी वजन जमीन पर लैंड कराया गया. यानी यह उतना ही वजन है जितना गगनयान के क्रू मॉड्यूल का है. इस टेस्ट के लिए भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के IL-76 एयरक्राफ्ट की मदद ली गई थी. पैराशूट को ढाई किलोमीटर ऊपर से गिराया गया था. इस टेस्ट के दौरान दो छोटे पाइरो-बेस्ड मोर्टार पायलट पैराशूट छूटे. इसके सात सेकेंड के बाद दोनों मुख्य पैराशूट खुल गए. ये पूरा परीक्षण सिर्फ 2 से 3 मिनट का था.

इस परीक्षण के दौरान इसरो के वैज्ञानिक पूरे समय पैराशूट लैंडिंग के सभी स्टेजेस के डेटा जमा कर रहे थे. सफल लैंडिंग के बाद खुशी से चीयर्स किया. यह टेस्ट इसरो, डीआरडीओ, इंडियन एयरफोर्स और भारतीय सेना की मदद से पूरा हुआ है. पैराशूट टेस्टिंग के दौरान एक्सट्रैक्शन, इजेक्शन, स्पीड में कमी सेट करने वाले सिस्टम, इंस्ट्रूमेंटेशन और एवियोनिक्स की जांच की गई. सभी स्टेजेस ने सही से काम किया.

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