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चेहरे को लील रहा था ब्लैक फंगस, डायबिटिज की भी थी टेंशन… प्लास्टिक सर्जरी ने किया कमाल

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नई दिल्ली

देश में कोरोना की पहली लहर की बीच ब्लैक फंगस के भी घातक मामले सामने आए थे। उस दौरान महाराष्ट्र में भी शुरुआत में कुछ केस आए थे। महाराष्ट्र के शुरुआती कुछ रोगियों में धुले की रहने वाली 54 साल की शाइला सोनार भी शामिल थीं। कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद शाइला ब्लैक फंगस की चपटे में आ गई थीं। स्थिति यह थी ब्लैक फंगस उनके चेहरे को पूरी तरह से खोखला कर चुका था। शाइला की जान पर बन आई थी। डॉक्टरों ने कहा कि अब सर्जरी के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। कई तरह की सर्जरी और इलाज के दो साल बाद अब शाइला का चेहरा 85% पहले की तरह हो गया है। हालांकि, अभी भी वह पूरी तरह से स्पष्ट रूप से बोल नहीं पाती हैं।

अभी भी बुरे सपने से उबर नहीं पाई हूं
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार शाइला आज जब आइने में अपने चेहरे को देखती हैं तो उन्हें अपना पिछला समय याद आता है। वह अपने चेहरे को परिवार की एलबम में रखी फोटो से मिलाती हैं और सोच में डूब जाती हैं। ब्लैक फंगस संक्रमण ने ना सिर्फ उनके चेहरे पर निशान छोड़ा है बल्कि इसका असर उनके दिमाग पर असर छोड़ा है। सर्जरी खत्म होने और रिकवर होने के बाद भी वह पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने से बचती थीं। फैमिली फंक्शन में वह मास्क उतार कर फोटो तक नहीं खिंचवा रही थीं। शाइला के शब्दों में भले ही महामारी का वो दौर बीत गया है लेकिन मैं अभी भी उस बुरे सपने से उबर नहीं पाई हूं।

अगस्त 2020 में शुरू हुआ थी जद्दोजहद
दो साल पहले अगस्त का महीना था। उस समय शाइला कोरोना संक्रमित हुई थीं। तब देश कोरोना की डेल्टा लहर का सामना कर रहा था।15 दिन बाद वो ठीक तो हो गईं लेकिन इसके बाद उनके सामने नई परेशान खड़ी हो गई। अस्पताल से छुट्टी के बाद उनके मुंह में दर्द शुरू हो गया। इसके बाद चेहरा पूरी तरह से सूज गया। पहली लहर के बाद इस तरह के लक्षण का अंदाजा उस समय डॉक्टरों को भी नहीं था। तब उस समय राज्य में ब्लैक फंगस के एक या दो रोगी ही सामने आए थे। जब उनकी हालत खराब होने लगी तब परिवार ने उन्हें मुंबई के परेल स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट किया। जांच में उन्हें सिनोसल म्यूकोरमाइकोसिस इंफेक्शन की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने कहा कि जान बचाने के लिए उनके पास सर्जरी के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

अपने आप को शीशे में पहचान नहीं पा रही थीं
जब संक्रमण का पता लगा तो परिवार वाले इस तरह की बीमारी से पूरी तरह से अंजान थे। ब्लैक फंगस का संक्रमण उनके मुंह के भीतर पूरी तरह से फैल चुका था। शाइला डायबिटिज और हाइपरटेंशन से भी ग्रस्त थीं। ऐसे में यदि समय पर इलाज नहीं होता तो उनकी आंख की रोशनी जाने के साथ ही जान का भी खतरा था। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए डॉक्टर ने उनके मुंह से तालु का हिस्सा भी निकाल दिया। ऐसा नहीं करने पर संक्रमण उनके दिमाग तक पहुंच सकता था जो उनके लिए और घातक साबित होता। सर्जरी के कुछ दिन बाद फिर से संक्रमण हो गया। इसके बाद डॉक्टरों को उनके दांत, मसूड़े और चिक बोन को निकालना पड़ा। इतनी सर्जरी के बाद उनका चेहरा पूरी तरह से बिगड़ गया। स्थिति यह थी कि वह अपने आप को शीशे में देखकर पहचान ही नहीं पा रही थीं।

प्लास्टिक सर्जरी से लौटी चेहरे की खुशी
इसके बाद मुंबई के ही प्राइवेट अस्पताल में उनकी प्लास्टिक सर्जरी हुई। इसके बाद उनके चेहरे को पूरी तरह से नया रूप दिया गया। शाइला के इलाज पर परिवार ने करीब 50 लाख रुपये खर्च किए। इसमें प्लास्टिक सर्जरी पर ही करीब 4.50 लाख रुपये का खर्च आया। इलाज के खर्च में परिवार वालों ने रिश्तेदारों से भी मदद ली। हालांकि, सर्जरी के बाद का टाइम भी उनके लिए काफी मुश्किल भरा था। लंबे समय तक चेहरे और गले में सूजन रही थी। डायबिटिज की वजह से उन्हें रिकवर करने में अधिक समय लगा। स्थिति यह थी उन्हें चलने फिरने यहां तक की वॉशरूम तक जाने में मदद लेनी पड़ती थी। इतने संघर्ष के बावजूद शाइला ने हार नहीं मानी। हालांकि, अभी चेहरा पूरी तरह से पहले जैसा नहीं हुआ है लेकिन इतनी खुशी है कि वह काफी हद तक पहले जैसी दिख रही हैं। शाइला अब धीरे-धीरे परिवार वालों से मिलने जुलने लगी हैं। इस सब के बावजूद वह अपने आप को खुशकिस्मत मानती हैं कि उनकी जान बच गई।

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