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हर दिन 1860, प्रति घंटे 77 मौतें… भारत में ये 5 बैक्टीरिया बन रहे ‘हत्यारे’

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नई दिल्ली,

हमारे आसपास और यहां तक कि हमारे शरीर में भी, कुछ ऐसे छोटे-छोटे जीव होते हैं जिन्हें हम ‘बैक्टीरिया’ कहते हैं. ये इतने छोटे होते हैं कि इन्हें हम नंगी आंखों से देख ही नहीं सकते. कुछ बैक्टीरिया अच्छे भी होते हैं तो कुछ थोड़े खतरनाक, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो जानलेवा होते हैं.

साइंस जर्नल लैंसेट ने ऐसे ही 5 बैक्टीरिया के नाम बताए हैं, जो 2019 में भारत ही नहीं, दुनियाभर में ‘हत्यारे’ बनकर उभरे हैं. इन बैक्टीरिया ने दुनियाभर में 1.37 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान ले ली. इनमें से 77 लाख से ज्यादा मौतों का कारण 33 बैक्टीरिया बने हैं और इनमें से भी 55 फीसदी मौतों की वजह सिर्फ यही 5 बैक्टीरिया रहे हैं.

लैंसेट के मुताबिक, जो 5 बैक्टीरिया सबसे ज्यादा जानलेवा रहे हैं, उनमें ई. कोलाई (E. coli), एस. निमोनिया (S. pneumoniae), के. निमोनिया (K. pneumoniae), एस. ऑरियस (S. aureus) और ए. बौमेनियाई (A. baumanii) हैं. इस स्टडी के लिए 204 देशों से आंकड़े जुटाए गए थे. रिसर्चर्स ने 34 करोड़ से ज्यादा मौतों की रिपोर्ट्स को खंगाला था और उसमें से बैक्टीरिया से होने वाली मौतों को अलग किया था.

भारत में हर घंटे 77 मौतें
लैंसेट ने अपनी स्टडी में बताया है कि 2019 में इन पांच बैक्टीरिया से भारत में 6.78 लाख से ज्यादा लोगों की जान गई है. यानी, हर दिन औसतन 1,860 और हर घंटे 77 लोग मारे गए हैं. लैंसेट के मुताबिक, इन पांच में से भी ई. कोलाई सबसे जानलेवा बैक्टीरिया साबित हुआ है. इस बैक्टीरिया से भारत में 2019 में 1.57 लाख से ज्यादा मौतें हुई थीं.इस स्टडी में बताया गया है कि दुनियाभर में मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह बैक्टीरिया से होने वाला इन्फेक्शन है. वहीं, दुनिया में होने वाली हर आठ में से एक मौत इसी से जुड़ी थी.

और क्या सामने आया स्टडी में?
स्टडी में सामने आया कि 2019 में दुनिया में जितनी मौतें हुईं, उनमें से 13.6 फीसदी बैक्टीरियल इन्फेक्शन से हुई.जिन 33 बैक्टीरिया की वजह से 77 लाख मौतें हुईं थीं, उनमें से 75% से ज्यादा मौतें सिर्फ तीन सिंड्रोम- लोअर रेस्पेरिटरी इन्फेक्शन (LRI), ब्लडस्ट्रीम इन्फेक्शन (BSI) और पेरिटोनियल एंड इंट्रा-एब्डोमिनल इन्फेक्शन (IAA) की वजह से हुई.

रिसर्चर्स का कहना है कि जो 5 बैक्टीरिया सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हुए हैं, उनमें से एस. ऑरियस सबसे खतरनाक रहा है. अकेले एस. ऑरियस की वजह से ही 11 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी.स्टडी बताती है कि सब-सहारा अफ्रीका रीजन में मोर्टेलिटी रेट सबसे ज्यादा रहा है. यहां हर एक लाख आबादी पर 230 मौतें हुईं थीं. जबकि, पश्चिमी यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया में एक लाख लोगों पर 52 मौतें हुईं.

कितनी अहम है ये स्टडी?
ये इतने बड़े पैमाने पर हुई पहली स्टडी है, जिसमें बताया गया है कि बैक्टीरिया कितने खतरनाक होते हैं? इस स्टडी में शामिल क्रिस्टोफर मुरे का कहना है कि ऐसे आंकड़े पहली बार आए हैं जो बैक्टीरियल इन्फेक्शन से पैदा होने वाली स्वास्थ्य चुनौती को दिखाते हैं.उन्होंने कहा कि ये आंकड़े दुनिया के सामने रखना जरूरी है, ताकि बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों का पता लगाया जा सके और मौतों के अलावा संक्रमण को कम किया जा सके.

 

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