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प्रकाश की गति से नियुक्ति, 6 साल वाला क्यों नहीं चुना? गोयल पर SC ने जानिए केंद्र से क्या-क्या पूछा

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर आज सरकार से बेहद कड़े सवाल पूछ डाले। कोर्ट ने पूछा कि कानून मंत्री ने जिन चार नामों का जो चुनाव किया उसके लिए क्या क्राइटेरिया रहा है? जस्टिस केएम जोसेफ की अगुवाई वाली संवैधानिक बेंच ने सरकार पर सवालों की बौछार कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र से सवाल किया कि चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति में उसने जल्दीबाजी दिखाई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से कहा कि कि फिलहाल वह बातों पर विराम दे और पूरे मामले की व्यापकता को देखें।

प्रकाश की गति से गोयल की नियुक्ति!
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक अर्जी में चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए कॉलिजियम सिस्टम और स्वतंत्र चयन प्रक्रिया के लिए गुहार लगाई गई है। इसी अर्जी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल-जवाब कर लिया। बुध‌वार को सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अरुण गोयल की चुनाव आयुक्त के पद पर की गई नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज मांगे थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किस तरह से नियुक्ति में आकलन हुआ है?

24 घंटे भी विभाग में घूम नहीं पाई फाइल
हम अरुण गोयल का व्यक्तिगत तौर पर मेरिट पर सवाल नहीं कर रहे हैं। लेकिन हम प्रक्रिया पर सवाल कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रकाश की गति (लाइट की गति) से गोयल की नियुक्ति चुनाव आयुक्त के तौर पर की गई है। उनका फाइल विभाग में 24 घंटे भी नहीं चल पाया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दाखिल याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

गोयल के वीआरएस पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1985 बैच के आइएएस ऑफिसर ने वीआरएस लिया। वह भी मिनिस्ट्री ने जो फाइल क्लीयर किया उसके ठीक एक दिन पहले वीआरएस लिया और एक ही दिन में उनका फाइल क्लीयर हो गया। कानून मंत्रालय ने चार नाम को शॉर्टलिस्ट किया और पीएम को रेफर किया और 24 घंटे के भीतर गोयल के नाम पर राष्ट्रपति की मुहर लग गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन नामों को कानून मंत्री ने चुना उसे इस तरह से चुना जाना चाहिए था कि वह छह साल का कार्यकाल पूरा करता।

क्या गोयल की नियुक्ति में झोल है?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि गोयल की नियुक्ति से पहले उन्हें अपने पद से वीआरएस दिलाया गया और फिर दो दिनों के भीतर ही पिछले गुरुवार को उनकी नियुक्ति चुनाव आयुक्त के पद पर की गई। बेंच ने बुधवार को चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया था कि वह 19 नवंबर को अरुण गोयल को चुनाव आयुक्त के तौर पर की गई नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज पेश करें। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस केएम जोसेफ की अगुवाई वाली संवैधानिक बेंच ने केंद्र सरकार से जानना चाहा था कि हाल ही में गोयल को वीआरएस दिलाया गया और फिर उनकी नियुक्ति की गई है क्या इस नियुक्ति में कोई चालाकी या झोल तो नहीं है। इस मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार को अटॉर्नी जनरल ने इससे संबंधित फाइल पेश की। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि आखिर एक दिन में ही कैसे नियुक्ति हो गई और साथ ही कहा कि ऐसे शख्स की नियुक्ति क्यों नहीं हो रही है जिनका कार्यकाल छह साल का हो जो कानून कहता है।

गोयल की नियुक्ति में इतनी जल्दी क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान जस्टिस जोसेफ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम किसी व्यक्तिगत के खिलाफ कुछ नहीं कह रहे हैं जिनकी नियुक्ति हुई है उनका एकेडमिक करियर बेहतरीन है। लेकिन हमें नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल है। 18 नवंबर को हमने सुनवाई शुरू की और उसी दिन आपने फाइल बढ़ाई और पीएम के पास फाइल गई और मंजूरी हो गई। ऐसी क्या अर्जेंसी थी। लिस्ट में चार नाम थे और ये चार नाम भेजे गए थे। हम यह जानना चाहते हैं कि आखिर नामों का चुनाव कैसे हुआ। जो सबसे यंग है चारों में क्या उनकी सिफारिश हुई? आपने कैसे किसी का चयन किया? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश दस्तावेज देखने के बाद कहा कि यह किस तरह का आकलन है? बेंच अरुण गोयल के मेरिट पर सवाल नहीं कर रहा है लेकिन नियुक्ति प्रकाश की गति से हुई है।

केंद्र की दलील, 3 दिन से ज्यादा वक्त नहीं लगता
सुप्रीम कोर्ट के दूसरे जस्टिस अजय रस्तोगी ने कहा कि कई बार जल्दीबाजी का कोई और कारण होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि 15 मई को यह वेकेंसी हुई थी और 15 मई से लेकर 18 नवंबर के बीच आपने क्या किया? ऐसा क्या कारण था कि आपने एक दिन में सुपर फास्ट तरीके से नियुक्ति कर दी। एक ही दिन में प्रोसेस ऑन हुआ और उसी दिन क्लीयरेंस हुआ, उसी दिन आवेदन और उसी दिन नियुक्ति। फाइल 24 घंटे भी नहीं चला यह तो लाइट की स्पीड से चला। हालांकि इस दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सभी चुनाव आयुक्त की नियुक्ति ऐसे ही जल्दी में होती है। आमतौर पर तौर पर तीन दिन से ज्यादा वक्त नहीं लगता है।

जानिए कोर्ट ने केंद्र से क्या-क्या पूछा
-सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि सरकार बताए कि आखिर लॉ मिनिस्टर ने जो चार नामों को शॉर्टलिस्ट किया गया और नामों की सिफारिश पीएम को की गई उसके पीछे क्राइटेरिया क्या रहा था?
-अटॉर्नी जनरल ने कहा कि शॉर्टलिस्ट वरीयता, रिटायरमेंट और चुनाव आयोग में कार्यकाल आदि को देखकर तय किया गया है।
-जस्टिस जोसेफ ने कहा कि सरकार ने जिस नाम को चारों में फाइनल किया उसे भी छह साल का कार्यकाल नहीं मिलेगा। आपको ऐसे लोगों को चुनना चाहिए जिन्हें छह साल का कार्यकाल मिले। यह एक्ट की धारा-6 कहती है।
-सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि हम यह जानना चाहते हैं कि कैसे आप नाम तक पहुंचे। आपके डाटाबेस में ज्यादा यंग लोग भी हैं हम आपसे यह जानना चाहते हैं कि क्या मैकेनिज्म आपने एडॉप्ट किया हुआ है और क्या उम्र को फिल्टर करने का क्राइटेरिया है।
-अटॉर्नी जनरल ने कहा कि क्राइटेरिया जन्म तीथि और सीनियरिटी के आधार पर है।
-सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जोसेफ ने कहा कि यानी छह साल का कार्यकाल नहीं मिलेगा। हम साफ करना चाहते हैं कि एक्ट के तहत आप सेक्शन छह का उल्लंघन कर रहे हैं। सेक्शन का महत्वपूर्ण पार्ट यह है कि छह साल का कार्यकाल हो।

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