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सांठगांठ तो दूर, एक-दूसरे को देख भी नहीं पाएंगे कैदी, सेलुलर की तर्ज पर होगी नरेला की नई जेल!

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नई दिल्ली

तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टरों को जहां एक तरफ साउथ इंडिया और देश के दूर-दराज के राज्यों की जेलों में शिफ्ट किए जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। वहीं दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे इन गैंगस्टरों के नेक्सस को तोड़ने के लिए नरेला जेल को पोर्ट ब्लेयर की सेलुलर जेल जैसा बनाने की योजना बनाई जा रही है।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में अंग्रेजों ने 1906 में सेलुलर जेल बनाई गई थी। यह कालापानी के नाम से भी मशहूर है। ऑक्टोपस डिजाइन में बनाई गई इस जेल में सात पंख बनाए गए। प्रत्येक पंख या शाखा में ग्राउंड, फर्स्ट और सेकंड फ्लोर बनाई गई थी। इसमें 696 कालकोठरी यानी सेल बनाए गए थे। इन तमाम सेल के डिजाइन इस तरह से तैयार किए गए थे कि इनमें बंद कोई भी कैदी न तो एक-दूसरे को देख सकता था और न ही बात कर सकता था।

इसके बीच में एक वॉच टावर बनाया गया। जहां से जेल की सभी सात शाखाओं पर नजर रखी जा सकती थी। इनके गेटों पर ताले लगाने का ऐसा डिजाइन है कि अंदर बंद कैदी चाहकर भी इनका ताला नहीं खोल सकता था। भले ही सेल में बंद कैदी को ताले की चाबी ही क्यों ना दे दी जाए। सूत्रों का कहना है कि ठीक सेलुलर जेल की तर्ज पर ही तिहाड़ की रोहिणी और मंडोली जेल के बाद नरेला में 40 एकड़ जमीन पर यह एक और नई जेल बनाई जानी है।

नरेला जेल चार जेलों का कैंपस होगी। इन चार जेलों में एक या दो जेल हाई सिक्योरिटी जेल बनाई जाएंगी। वहां 250 से 500 गैंगस्टरों और अन्य खतरनाक कैदियों के अलावा कुछ आतंकवादियों को भी शिफ्ट किया जा सकेगा। सूत्र बताते हैं कि दिन-प्रतिदिन गैंगस्टरों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दिल्ली में हाई सिक्योरिटी जेल की बेहद सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।

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