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Tuesday, April 7, 2026
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अफगानिस्तान में काबुल के कसाई की हत्या की कोशिश, बाल-बाल बचा गुलबुद्दीन हिकमतयार

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काबुल

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल हिज्ब-ए-इस्लामी पार्टी के कार्यालय को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती हमले से दहल उठी। इस हमले के एक व्यक्ति के मौत की खबर है। हमलावर के निशाने पर काबुल का कसाई के नाम से कुख्यात पूर्व अफगान प्रधानमंत्री गुलबुद्दीन हिकमतयार थे। हिकमतयार को तालिबान का खास माना जाता है। ऐसे में उनके ऊपर हुए हमलों से अफगानिस्तान पर तालिबान की पकड़ को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस घटना के चंद घंटों के अंदर पाकिस्तानी दूतावास पर भी गोलियां बरसाई गई। इस हमले में भी पाकिस्तानी सेना का एक एसएसजी कमांडो गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हमला पाकिस्तान के कार्यवाहक राजदूत को निशाना बनाकर किया गया था।

कई हमलावरों की हुई मौत, गाड़ी में विस्फोटक लाए थे
सत्तारूढ़ तालिबान और हिज्ब-ए-इस्लामी ने बताया कि आत्मघाती बम हमले में कई हमलावर मारे गए हैं। इस हमले की चपेट में आने से कार्यालय की सुरक्षा में तैनात गार्ड भी घायल हुए हैं। पार्टी के बयान के अनुसार, हिज्ब-ए-इस्लामी पार्टी कार्यालय पर हमला एक मस्जिद के पास हुआ, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे। तालिबान और पार्टी के सूत्रों ने कहा है कि हमलावर दो गाड़ियां लेकर आए थे, जिसमें एक में बम लदा हुआ था। उन्होंने बताया कि पहले विस्फोटकों से लगे वाहन को पार्टी कार्यालय के गेट पर उड़ा दिया गया। इसके बाद दोनों ही पक्षों में भीषण गोलीबारी हुई। मस्जिद में घुसने की कोशिश के दौरान दो हमलावर मारे गए।

हिकमतयार बोला- आत्मघाती जैकेट पहने थे हमलावर
गुलबुद्दीन हिकमतयार ने कहा कि हमलावरों ने आत्मघाती विस्फोटक जैकेट पहन रखी थी और एक ने महिला का बुर्का पहन रखा था। हाल के महीनों में अफगानिस्तान में कई बमबारी और गोलीबारी की घटनाएं हुई हैं। इनमें से कुछ का दावा इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने किया है। उत्तरी अफगानिस्तान में बुधवार को एक मदरसे में हुए विस्फोट में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई। अगस्त 2021 में अमेरिकी नेतृत्व वाली विदेशी सेना के हटने के बाद सत्ता पर कब्जा करने वाले कट्टर इस्लामी तालिबान ने कहा है कि उनका ध्यान देश को सुरक्षित रखने पर है।

कौन है गुलबुद्दीन हिकमतयार
गुलबुद्दीन हिकमतयार ने 1970 के दशक के मध्य में हिज्ब-ए-इस्लामी की स्थापना की थी। उसने पाकिस्तान की मदद से सोवियत संघ के खिलाफ मुजाहिदीनों का नेतृत्व किया। उसने सोवियत सेना के खिलाफ इतने हमले किए कि पाकिस्तान और अमेरिका ने उसे अपना चहेता बना लिया। 90 के दशक में जब अफगानिस्तान में गृह युद्ध शुरू हुआ तब गुलबुद्दीन हिकमतयार ने काबुल पर कब्जे के लिए इतने रॉकेट दागे कि उसे रॉकेटआर या काबुल का कसाई कहा जाने लगा। उसके गिराए रॉकेट से बड़े पैमाने पर आम लोग मारे गए थे।

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