जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने जनजातीय समाज के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बजट वर्ष 2026-27 में कई ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं। सरकार का विशेष फोकस वनाधिकार पट्टों के सुदृढ़ीकरण, महिला सशक्तिकरण, युवा रोजगार और बालिका शिक्षा पर है। सोमवार को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन योजनाओं का उद्देश्य अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सरकारी लाभ पहुँचाना है। राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्रों में व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वनाधिकार पत्र जारी करने के लिए एक विशेष अभियान चलाएगी।
सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि इन पट्टों की प्रविष्टि अब राजस्व रिकॉर्ड में सुनिश्चित की जाएगी। इससे जनजातीय किसान न केवल ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ जैसी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे, बल्कि उन्हें बैंकों से ऋण प्राप्त करने में भी सुगमता होगी। डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल जिलों के लिए सरकार ने दशकों पुरानी समस्या का समाधान किया है।
राजस्थान ग्रामदानी अधिनियम के तहत आने वाले गांवों के किसानों के नाम अब तक राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे। सरकार अब इस अधिनियम में संशोधन कर इन किसानों को खातेदारी अधिकार प्रदान करेगी, जिससे वे अपनी भूमि पर मालिकाना हक पा सकेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। जनजातीय क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार 85 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके तहत 8 लाख 50 हजार जनजातीय कृषकों को संकर मक्का बीज मिनीकिट उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही, मिलेट्स (कांगनी, कोदो, कुटकी आदि) को बढ़ावा देने के लिए 100 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी।
सहरिया, खैरवा और कथौड़ी जनजाति परिवारों के लिए सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाते हुए बड़ा बदलाव किया है। अब खाद्य सामग्री के स्थान पर परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में 1200 रुपये प्रतिमाह सीधे (DBT) ट्रांसफर किए जाएंगे। इस योजना से लगभग 38 हजार परिवार लाभान्वित होंगे।
