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Tuesday, March 31, 2026
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न पहाड़ है, न नदी पार करना… MCD चुनाव में आखिर वोट डालने क्यों नहीं निकले दिल्लीवाले?

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नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली में छोटी सरकार यानी एमसीडी चुनाव को चुनने में लोगों में काफी कम उत्साह देखने को मिला। वोटिंग को लेकर मतदाता सुस्त दिखे। सरकार द्वारा बुनियादी सुविधाओं की शिकायत करने का सबसे ज्यादा जोर जिस मध्यम वर्ग पर होता है, उस वर्ग के लोगों का वोटिंग प्रतिशत सबसे कम था। सुबह-सुबह तो कई बूथ पर गिने-चुने लोग ही वोट देने पहुंच रहे थे। हालांकि दोपहर बाद लोगों ने घरों से निकलना जरूर शुरू किया, लेकिन फिर भी पिछले चुनावों की तरह लोगों की भीड़ का नजारा नहीं था।

क्यों घरों से नहीं निकले लोग?
एमसीडी चुनाव की वोटिंग रविवार को हुई। लोगों ने इसे वीकेंड की तरह एन्जॉय किया। लोग पोलिंग बूथ पर वोट देने तो नहीं पहुंचे लेकिन परिवार के साथ वीकेंड मनाने में व्यस्त रहे। वहीं कल भारत और बांग्लादेश के बीच वनडे क्रिकेट मैच भी था। ये मैच काफी रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया। कई लोग मैच देखने में लग गए और चुनाव में वोट देना जरूरी नहीं समझा। इसके साथ ही दिल्ली में कल करीब एक महीने बाद सबसे ज्यादा प्रदूषण दर्ज किया गया।राजधानी के कई इलाकों में एक्यूआई 400 के पार था। ऐसे में लोगों ने घर से बाहर निकलना ठीक नहीं समझा। युवा कूल संडे मना रहे थे तो घर के बड़े बुजुर्ग प्रदूषण से बचने के लिए घरों में कैद रहे।

पॉश इलाकों में काफी कम मतदान
वैसे तो पूरी दिल्ली में ही इस बार एमसीडी चुनाव की वोटिंग को लेकर उत्साह कम दिखा, लेकिन पॉश इलाकों में इसका असर कुछ ज्यादा ही दिखाई दिया। ठंड के मौसम में यहां वोटिंग पर ऐसा पाला पड़ा कि पोलिंग बूथों पर तैनात स्टाफ दिनभर वोटरों की राह ताकते नजर आए। पॉश इलाकों में आमतौर पर वोटिंग का जो ट्रेंड नजर आता है, उसमें सुबह कम लोग ही वोट डालने निकलते हैं, लेकिन दोपहर बाद थोड़ा माहौल बनता है और शाम होते-होते कई जगह लाइनें तक लग जाती है, लेकिन इस बार कहीं पर भी ऐसा नजारा दिखाई नहीं दिया। यहां तक कि भरी दोपहरी में भी पोलिंग बूथों पर ज्यादा वोटर नहीं पहुंचे। इससे सबसे ज्यादा संतुष्ट सिक्योरिटी और पोलिंग स्टाफ नजर आया, जिसे कहीं पर भी कोई खास मशक्कत नहीं करनी पड़ रही थी।

ग्रामीण इलाकों में बुजुर्गों में दिखा उत्साह तो कई बूथ रहे खाली
ग्रामीण इलाकों में बुजुर्ग वोटरों में उत्साह दिखा तो कई जगहों पर बूथ दोपहर तक खाली दिखाई दिए। इन जगहों पर कम वोट प्रतिशत को देखते हुए आरडब्ल्यूए की मदद से वोटरों को घरों से निकालने के प्रयास एक बजे के बाद किए जाने लगे। नजफगढ़ में कई बूथों पर दोपहर एक बजे तक वोटिंग प्रतिशत काफी कम रहा। इसके बाद आरडब्ल्यूए के साथ मिलकर लोगों ने गांव में कुछ ई-रिक्शा आदि की व्यवस्था करवाई, ताकि वोटर बाहर आ सकें। मित्राऊं गांव में दोपहर एक बजे तक 1100 वोटरों में से सिर्फ 273 ने ही वोटिंग की। वहीं सुरहेड़ा के स्कूल में बने पोलिंग स्टेशन में मतदान करने के बाद भी काफी लोग स्टेशन के अंदर ही रुक गए। इसकी वजह से पोलिंग स्टेशन के अंदर भीड़ हो गई। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और ऐसे लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। वहीं पोलिंग स्टेशन के अंदर आने वाले लोगों की वोटिंग स्लिप चेक करने के बाद ही एंट्री देने की व्यवस्था की गई। मित्राऊं गांव के स्कूल में बने पोलिंग बूथ में कई ऐसे लोग थे, जिन्हें पता ही नहीं चल पा रहा था कि कहां वोटिंग करनी है। कैर गांव में भी दोपहर करीब 12 बजे तक वोटिंग के लिए काफी कम लोग आए। ग्रामीण एरिया में कई जगहों पर बुजुर्गों में उत्साह दिखाई दिया। अधिकांश पोलिंग बूथ पर ग्रामीण सुबह से ही आने लगे थे। कई जगहों पर पहले तो कुछ स्लो वोटिंग हुई, लेकिन 10 बजे के बाद लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। सबसे अधिक उत्साह गांव देहात के बुजुर्गों में देखने को मिला।

मुस्लिम बहुल इलाकों में दिखा उत्साह
दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों में एमसीडी चुनाव की वोटिंग को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। हालांकि, सुबह के समय ठंड की वजह से शुरुआत में वोटिंग की रफ्तार थोड़ी धीमी रही, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ने लगा, पोलिंग सेंटरों पर मतदाताओं की चहल-पहल बढ़ने लगी। खास बात यह भी रही कि मुस्लिम बहुल इलाकों के लगभग सभी पोलिंग सेंटरों पर महिला वोटर्स काफी बड़ी तादाद में नजर आईं। कई बूथों पर पुरुषों से ज्यादा महिलाएं लाइन में खड़ी नजर आईं। साउथ दिल्ली के शाहीन बाग, ओखला, जामिया नगर, तैमूर नगर, अबुल फजल एनक्लेव में वोटिंग को लेकर खासा उत्साह देखा गया। यहां पोलिंग एजेंटों की टेबलों पर सुबह 10 बजे के बाद से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी। संकरी गलियों में बने कई पोलिंग सेंटरों के बाहर खासी चहल-पहल रही। बड़ी तादाद में महिलाएं और बुजुर्ग अपने परिवार के सदस्यों के साथ वोट डालने पहुंचे।

पहले घंटे सुस्त रहा मतदान, 50 प्रतिशत हुई वोटिंग
एमसीडी के 250 वॉर्डों के लिए रविवार को हुए चुनाव में शाम साढ़े बजे तक करीब 50 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। मतदान शुरू होने के पहले एक घंटे तक मतदान की प्रक्रिया काफी धीमी रही। इस समय तक मुश्किल से तीन या चार प्रतिशत मतदान हुआ। इसके बाद प्रक्रिया थोड़ी तेज तो हुई, लेकिन आंकड़ा दहाई तक भी नहीं पहुंच पाया। साढ़े 10 बजे तक सिर्फ 9 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया। दोपहर 2 बजे के बाद मतदान प्रक्रिया रफ्तार पकड़ी। साढ़े 5 बजे मतदान खत्म होने तक करीब 50 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया।

कई वॉर्डों में मतदान काफी कम
जिन 250 वॉर्डो में रविवार मतदान हुए, उनमें से कई वॉर्डों में मतदान अपेक्षाकृत काफी कम हुआ। राज्य चुनाव आयोग के अफसरों के अनुसार कुछ ऐसे भी वॉर्ड हैं, जहां 50 प्रतिशत से कम मतदान हुए हैं। कुछ ऐसे भी वॉर्ड हैं, जहां झुग्गी बस्तियों व अनधिकृत कॉलोनियों की संख्या अधिक है, उन वॉर्डों में मतदान 50 प्रतिशत से भी अधिक हुए हैं। आयोग के अफसरों का कहना है कि साल 2017 में हुए एमसीडी चुनावों में 53.5 प्रतिशत, साल 2012 में हुए एमसीडी चुनाव में मतदान 53.39 प्रतिशत और साल 2007 में हुए चुनाव में मतदान 43.2 प्रतिशत हुआ था।

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