नई दिल्ली
बढ़ती महंगाई के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि बीते महीने देश में महंगाई दर में कमी आई, ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से उन्हें ब्याज दरों में राहत मिल सकती है, लेकिन आपको जानकर मायूसी होगी कि फिलहाल इस तरह के राहत की उम्मीद नहीं है। आज से शुरू होने वाली मौद्रिक समीक्षा बैठक में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया महंगाई में नरमी के संकेत मिलने के बावजूद ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है।
सोमवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मौद्रिक नीति समीक्षा की शुरुआत हो रही है, जो तीन दिनों तक चलेगी। बैठक को लेकर जानकारों का कहना है कि इस बार महंगाई दर में नरमी के बावजूद आरबीआई ब्याज दरों में 25 से 30 बेसिक प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। इससे पहले लगातार तीन बार आरबीआई ने ब्याज दरों में 50 बेसिक प्वाइंट की बढ़ोतरी की है। माना जा रहा है कि आरबीआई (RBI) इस बार ब्याज दरों में 0.25 से 0.35 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसे में लोगों को बुधवार को आरबीआई के घोषणा का इंतजार है।
आरबीआई की MPC की बैठक आज से
आपको बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मौद्रिक समीक्षा बैठक आज सोमवार से होने जा रही है। तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक को लेकर 7 दिसंबर को नतीजों की घोषणा की जाएगी। इस बार ब्याज दरों को लेकर कयास लगाए जा रहे है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है। पिछले तीन बार से रेपो रेट में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद इस बार इसमें 25 से 30 बेसिक प्वाइंट बढ़ोतरी की उम्मीद है। मई से लेकर सितंबर महीने तक आरबीआई के रेपो रेट में 1.90 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
EMI पर असर
रेपो रेट में बढ़ोतरी का सीधा असर आपके कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ेगा और आपके लोन की ईएमआई (EMI) में बढ़ोतरी होगी। गौरतलब है कि महंगाई जनवरी से 6 फीसदी के स्तर से ऊपर बनी हुई है। आपको बता दें कि आरबीआई मौद्रिक नीति को तय करने के लिए सीपीआई यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर पर गौर करता है। रेपो रेट और आपकी ईएमआई आपस में जुड़े हुए हैं। आरबीआई जैसे ही रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है, बैंक लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देते हैं और आपकी ईएमआई बढ़ जाती है। गौरतलब है कि रेपो रेट (Repo Rate) वह दर होती है, जिसपर ईआरबीआ बैंकों को लोन देता है। वहीं रिवर्ज रेपो रेट वो दर होता है, जिस पर बैंकों को आरबीआई पैसा रखने के लिए इंटरेस्ट देता है। अगर रेपो रेट गिरती है तो लोन की ब्याज दर में गिरावट होती है और अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है तो लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है और ईएमआई बढ़ जाती है।
