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गुजरात में 85% से पास होना क्यों मोदी-शाह के ‘मिशन 2024’ के लिए था बेहद जरूरी, समझें

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नई दिल्ली

गुजरात में बीजेपी ने न सिर्फ लगातार सातवीं पर बार जीत दर्ज की है बल्कि राज्य में सबसे बड़ी जीत का रेकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिया। 182 में से 156 सीटें यानी 85 प्रतिशत पर कमल खिला। कहां तो 27 साल से लगातार सत्ता में रहने पर एंटी-इन्कंबेंसी की आशंका थी और कहां बीजेपी ने उसे कुछ यूं प्रो-इन्कंबेंसी में बदला कि वोटशेयर 50 प्रतिशत के पार पहुंच गया। हालांकि, बीजेपी को मिले इस ऐतिहासिक और प्रचंड बहुमत का स्थानीय मुद्दों से कोई खास वास्ता नहीं रहा। गुजरात चुनाव के नतीजों का ‘मिशन 2024’ पर बहुत पड़ा असर पड़ने वाला था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य बीजेपी हार का मतलब होता ‘मिशन 2024’ में पलीता लगना। पस्त हो चुके विपक्ष में नई जान का फुंकना। यही वजह थी कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले तक नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे लेकिन पीएम बनने के बाद भी वह गुजरात के हर चुनाव में प्रचार की बागडोर खुद संभाली। प्रधानमंत्री रहने के बाद भी सूबे के हर चुनाव में वहीं बीजेपी के कैंपेनर-इन-चीफ रहे हैं। उनके सिपहसालार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी गृह राज्य में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते। 2022 का चुनाव भी अलग नहीं रहा। गुजरात में चुनाव की तारीखों के ऐलान से बहुत पहले ही मोदी और शाह ने मोर्चा संभाल लिया। घर का चुनाव दोनों के लिए न सिर्फ प्रतिष्ठा की लड़ाई थी बल्कि लोकसभा चुनाव से पहले बड़ी परीक्षा भी। दोनों की मेहनत रंग लाई और पार्टी ने गुजरात में जीत के हर रेकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया।

मोदी और शाह जनता को यह संदेश देने में कामयाब हो गए कि बीजेपी की अगर हार हुई तो यह राष्ट्रीय स्तर पर ‘गुजराती अस्मिता’ को चोट होगी। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि जनता तक ये संदेश पहुंचने में कोई कोर-कसर न रह जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव से पहले पूरे गुजरात को मथ डाला। उन्होंने 31 रैलियां कीं। अहमदाबाद में 50 किलोमीटर तो सूरत में 25 किलोमीटर लंबा मेगा रोडशो किया। अमित शाह ने राज्य में ही डेरा डाल दिया और बूथ लेवल से लेकर प्रचार रणनीति तक का बरीक से बारीक डीटेल खुद देखा और मैनेज किया। मिशन था 2024 से पहले बड़ी जीत हासिल करना।

पार्टी के एक नेता ने टइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘मिशन 2024 की घर से शुरुआत हो चुकी है…2022 में गृह राज्य में प्रचंड जीत से 2024 के लिए बाकी देश को भी संदेश जाएगा।’ गुजरात में पिछले लगातार दो चुनावों से बीजेपी की सीटें घट रही थीं। इसलिए सूबे में अबतक की सबसे बड़ी जीत बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।

गुजरात में पीएम मोदी के जबरदस्त प्रचार अभियान को लेकर पूछे जाने पर बीजेपी के एक अन्य नेता ने कहा, ‘प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि वह गुजरात को और ज्यादा गौरव पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं और इसलिए लोगों को बीजेपी को करिश्माई बहुमत देना चाहिए जिससे पीएम मोदी के हाथ और मजबूत हों।’

प्रचार के दौरान मोदी और शाह का फोकस राष्ट्रीय मुद्दों पर ही था। भारत को जी-20 की अध्यक्षता मिलने को उन्होंने इस तरह पेश किया कि इससे गुजरात में बड़े आयोजन तो होंगे ही, निवेश भी आकर्षित होंगे। चुनाव से पहले मोरबी में पुल गिरने से 135 लोगों की मौत हुई थी लेकिन बीजेपी को उससे कोई नुकसान नहीं हुआ। पार्टी ने विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री के नाम पर वोट मांगा। रैलियों में मोदी और शाह दोनों जोर देकर कहते रहे कि ‘डबल इंजन’ (केंद्र और राज्य दोनों में बीजेपी सरकार) सरकार से ही गुजरात लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। दोनों गुजरात की जनता को ये समझाने में कामयाब भी हो गए।

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