नई दिल्ली
अगर अगले साल देश की ग्रोथ रेट 5% भी रहती है, तो हम लकी रहेंगे। अगला साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए काफी दिक्कतों भरा रहने वाला है। रघुराम राजन ने राहुल गांधी के साथ बातचीत में यह बात कही है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने राहुल गांधी के साथ कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में भाग लिया है। उन्होंने राहुल के साथ कदमताल की और फिर साथ बैठकर इकनॉमी पर बातचीत की। इस दौरान राहुल ने राजन से कई सारे सवाल पूछे। राहुल ने पूछा कि आप इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे देखते हैं। इस पर राजन ने कहा, ‘इस साल कई सारे मुद्दे हमारे सामने हैं। ग्रोथ रेट धीमी है। भारत का निर्यात घटा है। महंगाई बढ़ी है, जो विकास को रोक रही है।’ उन्होंने कहा कि कोरोना से पहले भी हमारी ग्रोथ रेट कम थी और हमने इसे पैदा किया है। आइए जानते हैं कि राजन और राहुल के बीच और क्या बातचीत हुई।
दिक्कतों भरा रहेगा अगला साल
राजन ने कांग्रेस लीडर राहुल गांधी से कहा कि अगला साल बाकी दुनिया की तरह ही इंडियन इकनॉमी के लिए भी काफी दिक्कतों भरा रहने वाला है। उन्होंने कहा कि अगले साल अगर ग्रोथ रेट 5 फीसदी भी रही तो देश लकी रहेगा, क्योंकि प्रमुख ब्याज दर काफी बढ़ गई है और हमारा निर्यात घट रहा है। राजन ने कहा, ‘जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों के साथ समस्या यह है कि आपको समझना चाहिए कि आप किसके साथ तुलना कर रहे हैं। अगर पिछले साल एक काफी खराब तिमाही रही है और आप उसके साथ तुलना कर रहे हैं, तो आपको ग्रोथ रेट बहुत अच्छी दिखाई देगी।’
2022 की 2019 से तुलना करेंगे तो 2% है ग्रोथ रेट
राजन ने आगे कहा, ‘इसलिए आदर्श स्थिति यह है कि आप महामारी के पहले के समय से तुलना करें। और अगर आप 2022 की 2019 से तुलना करते हैं, तो यह 2 फीसद सालाना की ग्रोथ है। यह हमारे लिए काफी कम है।’ आगे राजन ने कहा कि भले ही महामारी की वजह से काफी नुकसान हुआ है, लेकिन भारत इसके पहले भी धीमी गति से ही बढ़ रहा था। उन्होंने कहा, ‘हमने ग्रोथ के लिए जरूरी सुधार नहीं किए।’
सिर्फ 2-4 उद्योगपति हो रहे अमीर
गांधी ने सवाल किया कि आज पैसा केवल कुछ उद्योगपतियों के पास है। राहुल ने कहा, ‘देश में कुछ 2-4 उद्योगपति लगातार अमीर हो रहे हैं। दो भारत बन रहे हैं, एक किसानों और गरीबों का भारत और दूसरा इन पांच-छह पूंजीपतियों का भारत। इस बढ़ती असमानता पर हमें क्या करना चाहिए?’ इसके जवाब में राजन ने कहा, ‘यह बहुत बड़ी समस्या है। कोरोना काल में अमीर लोगों की इनकम बढ़ी, क्योंकि वे घर से काम कर सकते थे। लेकिन गरीब लोगों को फैक्ट्री जाना था, लेकिन फैक्ट्रियां बंद हो गई थीं। फैक्ट्रियां बंद होने से उनकी इनकम बंद हो गई। इससे यह असमानता और बढ़ गई है।’ राजन ने कहा कि बेरोजगारी बढ़ने और ब्याज दरों में इजाफे से महामारी के दौरान निम्न मध्यम वर्ग को सबसे अधिक तकलीफ हुई। नीतियां इस वर्ग को ध्यान में रखते हुए बननी चाहिए थीं, क्योंकि वे कोरोना वायरस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित हुए।
छोटी कंपनी ग्रो करके बड़ी क्यों नहीं बन पाती?
राजन से सवाल किया गया कि देश में छोटी फर्म्स ग्रो करके बड़ी क्यों नहीं बन पाती। इस पर उन्होंने कहा, ‘वे छोटे रहने के कुछ बेनिफिट्स के अभ्यस्त हो जाते हैं। जैसे ही वे बड़े होते हैं, हम उन लाभों को वापस ले लेते हैं। इसके बजाय हम यह क्यों नहीं कहते कि यदि आप बड़े हो जाते हैं, तो आपको ये लाभ पांच साल तक मिलेंगे।’ राहुल ने कहा, ‘स्मॉल बिजनस को बड़ा करने का हल्दीराम सबसे बड़ा उदाहरण हैं?’ इसके जवाब में राजन ने कहा कि हमें कई हल्दीराम चाहिए। छोटी कंपनी बडे़ रोजगार दे सकती हैं।
विश्व बैंक ने यह जताया है जीडीपी ग्रोथ का अनुमान
विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.9 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान जताया था। विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को पहले के 6.5% से बढ़ाकर 6.9% किया है। वहीं, इसने अगले वित्त वर्ष के लिए अपने अनुमान को पहले के 7% से घटाकर 6.6% कर दिया।
