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भारत में बन रहे थे IIT, तब हम बदल रहे थे 7 प्रधानमंत्री… पाकिस्तान के पूर्व वित्‍त मंत्री का छलका दर्द

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इस्‍लामाबाद

आजादी के 75 साल बाद भारत जहां दुनियाभर में जश्‍न मना रहा है, वहीं धर्म के आधार बना पाकिस्‍तान डिफाल्‍ट होने की कगार पर पहुंच गया है। पाकिस्‍तान के पास इतने पैसे नहीं बचे हैं कि वह विदेश में तैनात अपने कर्मचारियों को सैलरी दे पाए। पाकिस्‍तान को सऊदी अरब और चीन के सामने कर्ज के लिए झोली फैलाना पड़ रहा है। पाकिस्‍तान की इसी बदहाली पर अब शहबाज शरीफ सरकार में वित्‍त मंत्री रह चुके मिफ्ताह इस्‍माइल का दर्द छलक आया है। उन्‍होंने पाकिस्‍तान की तुलना भारत से की है। इस दौरान उनका दर्द छलक आया। मिफ्ताह ने कहा कि आजादी के बाद जब भारत आईआईटी बना रहा था, उस दशक में हमने 7 प्रधानमंत्री बदल दिए।

इस्‍माइल ने कहा कि पाकिस्‍तान को अपनी नई पीढ़ी को स्‍मार्ट बनाना होगा ताकि वे बाकी दुनिया से मुकाबला कर पाएं। उन्‍होंने कहा कि हममें से कुछ लोग यह विलाप करते हैं कि हमारा आईटी निर्यात केवल 3 अरब डॉलर है, वहीं भारत 150 अरब डॉलर का आईटी निर्यात करता है। हमारे उद्योगपति ज्‍यादा बेहतर सुविधाएं चाहते हैं लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि कोई भी छूट हमें आईटी निर्यात का पावरहाउस नहीं बना सकती है। अगर कोई हमें आईटी क्षेत्र में ताकत बना सकता है तो वह है, बेहतर शिक्षा। उन्‍होंने सवाल किया कि क्‍या हमने योग्‍य पेशेवर आईटी या किसी अन्‍य क्षेत्र में बनाए हैं।

‘पाकिस्‍तान ने अपने पहले दशक में 7 प्रधानमंत्री बदल दिए’
पूर्व पाकिस्‍तानी वित्‍त मंत्री ने कहा, ‘भारत ने अपने पहले इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नॉलजी या आईआईटी की स्‍थापना साल 1951 में की थी। इसके अगले दशक में उसने 4 और आईआईटी की स्‍थापना कर दी। भारत के ये संस्‍थान दुनिया के सबसे अच्‍छे अंडरग्रैजुएट शैक्षिक संस्‍थानों में गिने जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ हमने अपने पहले दशक में ही 7 प्रधानमंत्री बदल दिए।’ बता दें कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने आईआईटी की स्‍थापना कराई थी। उन्‍होंने कहा कि अगर हम ऐसा सिस्‍टम बना दें जिसमें पाकिस्‍तान के मलिन इलाकों से कोई बच्ची यूनिवर्सिटी में गणित की पढ़ाई करे और मैडल हासिल करे तो हमें गरीबी या विदेशी मुद्रा भंडार के लिए चिंता नहीं करना होगा।

मिफ्ताह इस्‍माइल भारत के आईआईटी से तुलना कर रहे हैं लेकिन पाकिस्‍तान में शिक्षा की हालत बहुत खराब है। आगा खान विश्‍वविद्यालय के एक शोध में पता चलता है कि पाकिस्‍तानी बच्‍चे विज्ञान और गणित में फेल हो रहे हैं। क्‍लास 8 में केवल 5 प्रतिशत बच्‍चे ही गणित के आसान सवालों के जवाब दे पाए। वहीं केवल 10 फीसदी बच्‍चे ही विज्ञान के बेहद आसान प्रश्‍नों का जवाब दे सके। वह भी तब जब क्‍लास 5 से ही इसकी पढ़ाई शुरू कर देते हैं।

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