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‘तुनिशा का हुआ मर्डर, मैं दावे के साथ कहता हूं’, प्रत्युषा बनर्जी के पापा का छलका दर्द

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तुनिशा शर्मा की मौत टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए शॉकिंग है. पुलिस और प्रसाशन इसकी गुत्थी सुलझाने में लगे हुए हैं. तुनिशा के केस को कहीं हद तक प्रत्युषा बनर्जी के डेथ से भी रिलेट किया जा रहा है. प्रत्युषा ने भी अपने लिव इन बॉयफ्रेंड राहुल संग अनबन के बाद फांसी जैसा कदम उठाया था. हालांकि प्रत्युषा के पैरेंट्स का दावा है कि उनकी बेटी को मारा गया है.

आजतक डॉट इन से प्रत्युषा के पिताजी शंकर बनर्जी ने तुनिशा और प्रत्युषा की मौत पर हमसे एक्सक्लूसिव बातचीत की है. शंकर बताते हैं, जब मैंने तुनिशा के बारे में न्यूज पढ़ी, तो मुझे बहुत दुख हुआ. एकदम से मेरे पुराने जख्म ताजा हो गए. एक पिता होने के नाते मैं, तुनिशा की मम्मी के हाल को समझ सकता हूं.

‘तुनिशा का हुआ मर्डर, मैं दावे के साथ कहता हूं’
सच कहूं, मैं जितना तुनिशा की मौत को समझ पा रहा हूं, वो मुझे मर्डर ही लगता है. पिछले कुछ सालों में देखें तो सारे मर्डर को सुसाइड का रूप दे दिया जा रहा है. सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है. मैं जब अपनी वाइफ से बात कर रहा था, हम दोनों ही रो रहे थे कि फिर एक मां ने अपनी बीस साल की मासूम बच्ची को खो दिया है. उनका दुख अपना सा लगता है.

शंकर आगे कहते हैं, ऐसा कैसे संभव है कि आप एक ऐसे माहौल में हैं, जहां इतने सारे लोग आपके आस-पास घिरे हुए हैं, वहां इस तरह का कदम कैसे कोई उठा सकता है. अगर कोई सुसाइड जानबूझकर करता है, तो वह निश्चित करता है कि कोई नोट या लेटर छोड़कर चला जाए ताकि बाकी लोगों को तकलीफ न हो. ये सौ प्रतिशत मर्डर का केस है.

मैं प्रत्युषा के पिता होने के नाते तो ढंके की चोट पर बोलूंगा कि तुनिशा सुसाइड नहीं कर सकती है. मैं आज तक अपनी बेटी के न्याय के लिए भटक रहा हूं. चिल्ला-चिल्ला कर बोलता हूं कि मेरी बेटी को मारा गया है, लेकिन मेरी कोई नहीं सुनता है. शंकर के अनुसार, मेरी बेटी के साथ जो हुआ है, वो किसी भी बच्चे के साथ नहीं हो. हम तो न्याय के लिए आज भी परेशान हैं.

तुनिशा को मिले इंसाफ
तुनिशा की मां के साथ ऐसा बिलकुल भी नहीं होना चाहिए. उनको इंसाफ मिले. हम उनके साथ हैं. मेरी बेटी को भी ट्रैप किया गया था. उसको बर्गला कर अपने जाल में फंसाया गया. जब मेरी बेटी उससे बाहर आना चाहती थी, तो उसे मार दिया गया. हमने इंसाफ के लिए बहुत कुछ झेला है. यहां तक की पैसे, नाम सब कुछ गवांया है. आज मैं एक कमरे में रहने पर मजबूर हूं, मेरी पत्नी बच्चों की नैनी का काम करती है. हम दोनों ने लेकिन हिम्मत नहीं हारी है. हमारी जिंदगी का मकसद ही यही है कि आखिरी सांस तक बेटी के न्याय के लिए लड़ता रहूं. उनकी मां का क्या हाल हो रहा होगा, सोचकर भी मन सिहर जाता है. भगवान उन्हें शक्ति दे और हिम्मत दे कि वो अपनी बेटी के लिए लड़ सके.

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